अस्थमा एक श्वसन तंत्र (Respiratory System) से जुड़ी बीमारी है जिसमें रोगी को साँस लेने में तकलीफ होती है। इसमें श्वास नलिकाएं (bronchial tubes) सिकुड़ जाती हैं जिससे साँस लेने और छोड़ने में दिक्कत होती है।
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एलर्जी (धूल, धुआं, परागकण, जानवरों के बाल आदि से)
मौसम में बदलाव
धूम्रपान या प्रदूषण
आनुवंशिक कारण (genetic)
तनाव या चिंता
वायरल संक्रमण
साँस लेने में तकलीफ
छाती में जकड़न या घुटन
सीटी जैसी आवाज़ के साथ साँस लेना (Wheezing)
खाँसी (खासकर रात में या सुबह जल्दी)
थकावट और कमजोरी
होम्योपैथिक इलाज लक्षणों के आधार पर होता है, यानी हर मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं। यह इलाज धीरे-धीरे असर करता है लेकिन दीर्घकालिक और सुरक्षित होता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को भी मजबूत करता है।
यह एक combination होम्योपैथिक दवा है जो दमा, साँस की तकलीफ, और सीने में भारीपन के लिए दी जाती है। यह दवा स्थाई समाधान करती है अस्थमा का पूर्ण निरोग के लिए दवा दो से तीन माह तक लेनी चाहिए
यह ब्रोंकियल ट्यूब्स को रिलैक्स करती है और साँस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाती है।
रात को अधिक तकलीफ, बेचैनी, और घुटन के लक्षणों में लाभकारी।
अत्यधिक खाँसी और बलगम की समस्या के लिए उपयुक्त।
साँस लेने में बहुत तकलीफ हो और सीने में बलगम भर जाए तो यह दवा दी जाती है।
नमी वाले मौसम में दमा की तकलीफ बढ़ने पर उपयोगी।
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