बवासीर की होम्योपैथिक दवा — मस्से, फ़िशर व भगंदर में
इस्तेमाल होने वाली 40 प्रमुख दवाएँ, पूरी जानकारी
हर दवा के लक्षण, मानसिक लक्षण, मात्रा, पोटेंसी, मूल स्रोत, Antidote और ICD-10 कोड — Boericke, Allen's Keynotes व HPI के आधार पर
यह हमारा मुख्य (Pillar) पृष्ठ है — बवासीर पर हमारे बाक़ी 17 लेख इसी से जुड़ते हैं।
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डॉ. सतीश शर्मा (DHMS)
वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक · Reg. No. 5454-A · हिसार, हरियाणा
✅ लिखा व चिकित्सकीय रूप से समीक्षित |
📄 वीडियो का पूरा ट्रांसक्रिप्ट पढ़ें (हिंदी)पहली पंक्ति: “क्या आप जानते हैं — हर तीन में से एक व्यक्ति ज़िंदगी में कभी न कभी बवासीर से परेशान होता है?” — पूरा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ▾
| 00:00 | क्या आप जानते हैं — हर तीन में से एक व्यक्ति ज़िंदगी में कभी न कभी बवासीर से परेशान होता है? |
| 00:06 | अगर आपको भी शौच के बाद खून आ रहा है, मस्से बाहर निकल आए हैं, या डॉक्टर ने ऑपरेशन बोल दिया है… तो अगले चालीस सेकंड रुक जाइए। |
| 00:15 | क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च Turkish J Colorectal Disease, 2018 कहती है — बवासीर की ब्लीडिंग बिना सर्जरी, सिर्फ दो हफ़्ते में चौरानवे प्रतिशत तक कम हो सकती है। नमस्ते, मैं हूँ डॉक्टर सतीश शर्मा, होम्योपैथी में पैंतीस साल का अनुभव। |
| 00:33 | आज मैं आपको बताऊँगा बवासीर, भगंदर, गुदाचीर और खूनी पाइल्स का वो इलाज, जिसे लाखों मरीज़ बिना ऑपरेशन अपना रहे हैं — Doctor Pyro प्लस BC सत्रह। |
| 00:46 | सबसे पहले समझिए, बवासीर होती क्यों है। जब पुरानी कब्ज़, घंटों बैठे रहना, और खाने में फाइबर की कमी की वजह से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है, तो ये नसें फूल जाती हैं। |
| 00:59 | इन्हीं फूली हुई नसों को मस्से या पाइल्स कहते हैं। और अब इसका साइंस सुनिए। |
| 01:04 | एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में अस्सी मरीज़ों पर एक होम्योपैथिक तत्व — Aescin — का परीक्षण हुआ। |
| 01:12 | नतीजा ये रहा कि सिर्फ छह दिन में इक्यासी प्रतिशत मरीज़ों के लक्षण घट गए, और दो हफ़्ते में ब्लीडिंग चौरानवे प्रतिशत तक कम हो गई। यही तत्व, यानी एस्कुलस, Doctor Pyro में मौजूद है। |
| 01:25 | अब लक्षण पहचानिए। शौच के बाद खून आना, मस्सों का बाहर निकलना और खुजली, |
| 01:32 | कटने जैसी तेज़ जलन यानी फिशर, और बार-बार मवाद और सूजन यानी फिस्टुला। |
| 01:39 | अगर इनमें से कोई भी लक्षण है, तो देरी मत कीजिए, क्योंकि पुरानी बवासीर अपने आप ठीक नहीं होती। |
| 01:46 | इसका समाधान है Doctor Pyro प्लस BC सत्रह का कॉम्बो पैक। इसमें मिलते हैं तीस ml ड्रॉप्स और बायो-कॉम्बिनेशन नंबर सत्रह की सौ टेबलेट। |
| 01:58 | आइए जानें ये अंदर से कैसे काम करता है। Doctor Pyro ड्रॉप्स में है एस्कुलस, जो नसों की सूजन और खून बहना रोकता है। |
| 02:07 | हेमामेलिस, जो ब्लीडिंग रोके और नसों को मज़बूत करे। कॉलिनसोनिया, जो मस्से और कब्ज़ में राहत दे। |
| 02:15 | एसिडम नाइट्रिकम, जो फिशर के कटाव और जलन के लिए असरदार है। और नक्स वोमिका, जो कब्ज़ ठीक करके बीमारी की जड़ पर वार करता है। |
| 02:26 | और BC सत्रह टेबलेट क्यों ज़रूरी है? होम्योपैथी कहती है कि हमारे शरीर में बारह ज़रूरी साल्ट्स होते हैं। |
| 02:32 | जिन साल्ट्स की कमी होती है, वही रोग पैदा करती है। बायो-कॉम्बिनेशन नंबर सत्रह इन्हीं साल्ट्स की कमी पूरी करके शरीर को अंदर से ताकत देता है। |
| 02:42 | जब ड्रॉप्स और टेबलेट दोनों साथ लिए जाते हैं, तो ड्रॉप्स लक्षणों पर तेज़ी से काम करते हैं, और BC सत्रह जड़ को मज़बूत करता है। यही दोहरी ताकत Doctor Pyro प्लस BC सत्रह को सबसे स्ट्रॉन्ग और सबसे सेफ बनाती है। |
| 02:59 | इसका पूरा कोर्स है तीन महीने का। और राहत? पहले एक महीने में ही बेहतर परिणाम महसूस होने लगते हैं। |
| 03:06 | सेवन भी आसान है — ड्रॉप्स की दस से पंद्रह बूँद पानी में मिलाकर दिन में चार से पाँच बार, |
| 03:12 | और चार टेबलेट दिन में तीन बार चूसें। बस कच्चा प्याज़, लहसुन और कॉफ़ी से परहेज़ रखें। |
| 03:18 | और भरोसा? Doctor Pyro बनाती है M. Bhattacharyya एंड कंपनी, कोलकाता — जो एक सौ पैंतीस साल से होम्योपैथी दवा बना रही है। |
| 03:28 | ये एक आयुष-मान्य होम्योपैथिक इलाज है — सुरक्षित, और हज़ारों मरीज़ों का आज़माया हुआ। |
| 03:35 | तो आज ही फ़ैसला लीजिए। ऑपरेशन से डरिए मत। Doctor Pyro प्लस BC सत्रह एक बार ज़रूर आज़माइए। |
| 03:43 | ऑर्डर या मुफ़्त सलाह के लिए अभी कॉल करें — सत्तर चार दो दो, चार सात दो चार आठ। या अट्ठानवे नौ छह तीन, नौ नौ शून्य आठ तीन। |
| 03:53 | याद रखिए — होम्योपैथी: शुद्ध भी, सिद्ध भी। |
इस समीक्षा में 80 मरीज़ों के एक प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन का हवाला है, जिसमें दिन में तीन बार 40 मि.ग्रा. एस्किन देने पर दो हफ़्ते में रक्तस्राव 94% तक घटा। एक ज़रूरी स्पष्टीकरण: वह अध्ययन एस्कुलस के मानकीकृत हर्बल अर्क (40 मि.ग्रा. एस्किन) पर था, होम्योपैथिक पोटेंसी पर नहीं — इसलिए उस आँकड़े को सीधे किसी होम्योपैथिक दवा का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। दोनों में मूल पौधा एक ही है, पर तैयारी और मात्रा अलग हैं।
वीडियो में एस्सिन (हॉर्स चेस्टनट अर्क) पर हुए एक अध्ययन के आँकड़े बताए गए हैं। साफ़ कर दें — वो अध्ययन 40 मिलीग्राम हर्बल अर्क, दिन में तीन बार की मात्रा पर हुआ था (Turk J Colorectal Dis 2018;28:54-57 की समीक्षा में उद्धृत), जबकि Doctor Pyro में Aesculus Hippocastanum होम्योपैथिक 3x पोटेंसी में है। दोनों एक बात नहीं हैं, इसलिए उन आँकड़ों को इस दवा के असर का प्रमाण न मानें। इस पृष्ठ पर किसी भी दवा के लिए इलाज की गारंटी का दावा नहीं किया गया है।
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बवासीर की होम्योपैथिक दवा कोई एक नहीं होती — लक्षण देखकर 40 में से एक चुनी जाती है। इस पेज पर हर दवा के मुख्य लक्षण, मानसिक लक्षण, पोटेंसी, मात्रा और मूल स्रोत एक-एक करके दिए गए हैं, ताकि बवासीर का होम्योपैथिक इलाज समझने में अंदाज़ा न लगाना पड़े।
खूनी बवासीर की दवा, फ़िशर की होम्योपैथिक दवा और भगंदर की होम्योपैथिक दवा — तीनों अलग-अलग हिस्सों में बाँट दी गई हैं, और साथ में यह भी कि मस्से सुखाने की दवा किन लक्षणों पर चुनी जाती है। अगर आप सीधे बवासीर की दवा का नाम खोज रहे हैं, तो नीचे 40 दवाओं की पूरी सूची एक जगह मिल जाएगी।
बहुत लोग बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज खोजते हुए यहाँ पहुँचते हैं। बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज मुमकिन है या नहीं, यह श्रेणी पर निर्भर करता है — इस पेज पर उस पर भी सीधी बात है: किस श्रेणी में लक्षण-आधारित दवा से आराम मिलता देखा गया है, और कब सर्जन की राय लेना ज़रूरी हो जाता है।
बवासीर गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों में आई सूजन है, जिसे अंग्रेज़ी में Haemorrhoids या Piles कहते हैं (ICD-10 कोड K64)। ये नसें फूलकर गांठ जैसी बन जाती हैं और शौच के समय खून, दर्द या खुजली पैदा करती हैं।
फ़िशर गुदा की त्वचा में पड़ी एक दरार है (ICD-10 कोड K60.2), जिसमें शौच के बाद घंटों जलन रहती है। भगंदर गुदा के पास बनी एक नली है जो अंदर से बाहर तक रास्ता बना लेती है (ICD-10 कोड K60.3) और उसमें से पीप बहती रहती है।
होम्योपैथी में इनका इलाज बीमारी के नाम से नहीं, लक्षणों की तस्वीर से तय होता है — खून का रंग, आराम ठंडक से मिलता है या गर्मी से, और तकलीफ़ दिन के किस समय बढ़ती है। इसी आधार पर नीचे दी 40 दवाओं में से एक चुनी जाती है।
❓ बवासीर के 40 ज़रूरी सवाल — जल्दी राहत, इलाज, कारण और बचाव
बवासीर को लेकर सबसे आम सवाल यही होते हैं — क्या यह अपने आप ठीक हो सकती है, जल्दी राहत कैसे मिलेगी, कौन-सी क्रीम काम करती है, खून आना कितना सामान्य है और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए? नीचे दिए गए उत्तर इन्हीं practical concerns को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
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बवासीर के लक्षणों से जल्दी राहत कैसे पाएं?How To Get Rid Of Hemorrhoid Symptoms Fast
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बवासीर के लक्षणों में जल्दी राहत के लिए सबसे पहले क़ब्ज़ और मल त्याग के दौरान ज़ोर लगाने को नियंत्रित करें। गुनगुने पानी में बैठना, भरपूर फाइबर और पानी लेना तथा ज़रूरत के अनुसार स्थानीय उपचार दर्द, जलन और खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन राहत मिलने का समय बवासीर की स्थिति पर निर्भर करता है।
| ⬤ | दर्द और जलन में: 10–15 मिनट का गुनगुना Sitz Bath आराम दे सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़ में: फाइबर, पानी और ज़रूरत के अनुसार Stool Softener फ़ायदेमंद हो सकते हैं। |
| ⬤ | मल त्याग में: ज़ोर न लगाएं और टॉयलेट पर ज़रूरत से ज़्यादा देर न बैठें। |
| ⬤ | स्थानीय राहत: डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट की सलाह से उपयुक्त क्रीम या मलहम लिया जा सकता है। |
| ⬤ | जल्दी राहत की सीमा: घरेलू उपाय लक्षण कम कर सकते हैं, लेकिन हर गांठ या सूजन तुरंत ख़त्म नहीं होती। |
| ⬤ | कब डॉक्टर को दिखाएं: दर्द बढ़ रहा हो, रक्तस्राव बार-बार हो या राहत न मिल रही हो। |
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खून का थक्का वाली बवासीर कैसी दिखती है और इसका इलाज कैसे होता है?What Does A Thrombosed Hemorrhoid Look Like And How Do I Treat It
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Thrombosed Hemorrhoid में बाहरी बवासीर के अंदर खून का थक्का बन सकता है। यह अक्सर अचानक उभरी हुई, नीली या बैंगनी रंग की गांठ और तेज़ दर्द के रूप में दिखाई देती है। इसका उपचार दर्द, सूजन और थक्का बनने के समय पर निर्भर करता है।
| ⬤ | कैसी दिख सकती है: गुदा के पास अचानक बनी नीली, बैंगनी या गहरे रंग की गांठ। |
| ⬤ | मुख्य लक्षण: तेज़ दर्द, बैठने में परेशानी और स्थानीय सूजन। |
| ⬤ | शुरुआती जांच: नई और बहुत दर्दनाक गांठ को डॉक्टर से दिखाना बेहतर है। |
| ⬤ | हल्के मामलों में: दर्द कम करने वाली देखभाल और क़ब्ज़ से बचाव फ़ायदेमंद हो सकते हैं। |
| ⬤ | कुछ मामलों में: डॉक्टर द्वारा थक्का हटाने या अन्य प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ सकती है। |
| ⬤ | क्या न करें: गांठ को ख़ुद दबाएं, फोड़ें या काटने की कोशिश न करें। |
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कम उम्र में बवासीर क्यों हो जाती है?Why Do I Have Hemorrhoids At A Young Age
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कम उम्र में भी बवासीर हो सकती है। इसके पीछे क़ब्ज़, मल त्याग में ज़ोर लगाना, लंबे समय तक बैठना, कम शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक प्रवृत्ति जैसे कारण हो सकते हैं।
| ⬤ | क़ब्ज़ और कठोर मल: गुदा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा सकते हैं। |
| ⬤ | टॉयलेट में ज़्यादा देर बैठना: लंबे समय तक दबाव रहने से समस्या बढ़ सकती है। |
| ⬤ | कम गतिविधि: बैठे रहने की आदत और अनियमित दिनचर्या योगदान दे सकती है। |
| ⬤ | अन्य जोखिम: गर्भावस्था, वज़न बढ़ना और कुछ लोगों में पारिवारिक प्रवृत्ति। |
| ⬤ | युवा उम्र में भी जांच ज़रूरी: हर गांठ या रक्तस्राव बवासीर नहीं होता। |
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क्या बवासीर बिना इलाज के अपने आप ठीक हो सकती है?Can Hemorrhoids Go Away On Their Own Without Treatment
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हाँ, हल्की बवासीर के लक्षण कई बार बिना किसी विशेष प्रक्रिया के अपने आप कम हो सकते हैं, ख़ासकर जब क़ब्ज़ और ज़ोर लगाने की आदत सुधर जाए। लेकिन लक्षण कम होना और बवासीर का पूरी तरह ख़त्म होना अलग बातें हैं।
| ⬤ | हल्के लक्षणों में: घरेलू देखभाल से सुधार हो सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़ नियंत्रित करें: कठोर मल और ज़ोर लगाने से बचें। |
| ⬤ | लक्षणों का लौटना: बवासीर दोबारा भी हो सकती है। |
| ⬤ | लगातार रक्तस्राव: इसे केवल बवासीर मानकर नज़रअंदाज़ न करें। |
| ⬤ | कब डॉक्टर को दिखाएं: दर्द, रक्तस्राव या गांठ बढ़ रही हो। |
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बवासीर की कौन-सी बिना पर्ची वाली दवाएं वास्तव में काम करती हैं?Best Over-The-Counter Hemorrhoid Treatments That Actually Work
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OTC बवासीर उपचारों में दर्द कम करने वाली स्थानीय क्रीम, खुजली और जलन के लिए कुछ मलहम तथा क़ब्ज़ नियंत्रित करने वाले उपाय शामिल हो सकते हैं। ये मुख्यतः लक्षणों में राहत देते हैं; सही विकल्प समस्या के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।
| ⬤ | दर्द और जलन: कुछ स्थानीय उत्पाद अस्थायी राहत दे सकते हैं। |
| ⬤ | खुजली और सूजन: कुछ क्रीम इन लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। |
| ⬤ | क़ब्ज़: फाइबर, पानी और ज़रूरत के अनुसार Stool Softener फ़ायदेमंद हो सकते हैं। |
| ⬤ | सही उत्पाद चुनें: हर OTC उत्पाद हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। |
| ⬤ | लंबे समय तक ख़ुद से उपयोग न करें: कुछ उत्पाद त्वचा में जलन कर सकते हैं। |
| ⬤ | गर्भावस्था या अन्य बीमारी में: डॉक्टर से सलाह लेकर दवा चुनें। |
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बवासीर ठीक होने में कितना समय लगता है?How Long Does It Take To Heal A Hemorrhoid
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हल्की बवासीर के लक्षण कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों में कम हो सकते हैं। लेकिन ठीक होने का समय बवासीर के प्रकार, गंभीरता और क़ब्ज़ जैसी समस्याओं पर निर्भर करता है।
| ⬤ | हल्की बवासीर: सही देखभाल से जल्दी सुधार हो सकता है। |
| ⬤ | बाहरी गांठ या थक्का: दर्द और सूजन कम होने में अधिक समय लग सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़ जारी रहने पर: समस्या बार-बार हो सकती है। |
| ⬤ | उपचार के बाद: डॉक्टर की सलाह के अनुसार गतिविधियां और खान-पान रखें। |
| ⬤ | सुधार न हो: लगातार लक्षणों में दोबारा जांच ज़रूरी है। |
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बवासीर को जल्दी सिकोड़ने का सबसे तेज़ तरीक़ा क्या है?What Is The Fastest Way To Shrink Piles
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बवासीर को जल्दी सिकोड़ने का कोई एक तरीक़ा सभी के लिए काम नहीं करता। क़ब्ज़ नियंत्रित करना, ज़ोर न लगाना और ज़रूरत के अनुसार उपचार लेना लक्षणों और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
| ⬤ | क़ब्ज़ नियंत्रित करें: कठोर मल से बचना सबसे ज़रूरी क़दमों में से एक है। |
| ⬤ | गर्म पानी में बैठें: दर्द और सूजन में आराम मिल सकता है। |
| ⬤ | स्थानीय उपचार: डॉक्टर की सलाह से क्रीम या मलहम उपयोग किए जा सकते हैं। |
| ⬤ | गंभीर बाहरी गांठ: कुछ मामलों में डॉक्टर द्वारा प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ सकती है। |
| ⬤ | ख़ुद से गांठ न दबाएं: इससे चोट और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। |
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Hemorrhoids और Piles क्या एक ही चीज़ हैं?Hemorrhoids Vs Piles: Are They The Same Thing
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हाँ, Hemorrhoids और Piles एक ही स्थिति के दो अलग-अलग नाम हैं। हिंदी में इसे आमतौर पर बवासीर कहा जाता है।
| ⬤ | Hemorrhoids: चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाला अंग्रेज़ी शब्द है। |
| ⬤ | Piles: आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द है। |
| ⬤ | बवासीर: हिंदी में इसका प्रचलित नाम है। |
| ⬤ | Internal और External: बवासीर अंदर या बाहर की ओर हो सकती है। |
| ⬤ | हर गांठ बवासीर नहीं: सही पहचान के लिए जांच ज़रूरी हो सकती है। |
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बवासीर में खून क्यों आता है और कब चिंता करनी चाहिए?Why Am I Bleeding From Hemorrhoids And When Should I Worry
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बवासीर में मल त्याग के दौरान ताज़ा लाल खून आ सकता है, लेकिन हर रक्तस्राव को बवासीर मानना सही नहीं है। अधिक, बार-बार या असामान्य रक्तस्राव में डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।
| ⬤ | ताज़ा लाल खून: बवासीर में अक्सर दिखाई दे सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़ और ज़ोर लगाना: रक्तस्राव बढ़ा सकते हैं। |
| ⬤ | अधिक रक्तस्राव: तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। |
| ⬤ | काला मल या चक्कर: अन्य गंभीर कारणों की जांच ज़रूरी हो सकती है। |
| ⬤ | लगातार खून आना: इसे केवल बवासीर समझकर नज़रअंदाज़ न करें। |
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ऑफ़िस में बैठते समय बवासीर का दर्द कैसे कम करें?How To Stop Hemorrhoid Pain While Sitting At Work
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ऑफ़िस में लंबे समय तक बैठने से परेशानी बढ़ सकती है। बीच-बीच में उठना, आरामदायक बैठने की व्यवस्था रखना और क़ब्ज़ से बचना दर्द और असुविधा कम करने में मदद कर सकता है।
| ⬤ | हर 30–60 मिनट में उठें: थोड़ी देर चलें या शरीर को आराम दें। |
| ⬤ | आरामदायक सीट रखें: ज़रूरत के अनुसार कुशन का उपयोग कर सकते हैं। |
| ⬤ | टॉयलेट न रोकें: मल त्याग की इच्छा को बार-बार टालने से क़ब्ज़ बढ़ सकती है। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: दिनभर काफ़ी मात्रा में लें। |
| ⬤ | तेज़ दर्द में: डॉक्टर से सलाह लें। |
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बवासीर में Baby Wipes बेहतर हैं या Toilet Paper?Baby Wipes Vs Toilet Paper For Hemorrhoid Relief
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बवासीर में साफ़-सफ़ाई के लिए पानी से धीरे-धीरे सफ़ाई करना अक्सर बेहतर रहता है। ज़रूरत हो तो बिना ख़ुशबू वाले, त्वचा के लिए gentle wipes उपयोग किए जा सकते हैं।
| ⬤ | पानी से सफ़ाई: त्वचा पर रगड़ कम होती है। |
| ⬤ | Gentle Wipes: बिना ख़ुशबू और बिना alcohol वाले विकल्प चुनें। |
| ⬤ | ज़ोर से न रगड़ें: इससे जलन और खुजली बढ़ सकती है। |
| ⬤ | त्वचा को सुखाएं: हल्के हाथ से थपथपाकर सुखाएं। |
| ⬤ | जलन बढ़े तो बंद करें: किसी भी उत्पाद से परेशानी हो तो उसका उपयोग रोकें। |
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क्या Witch Hazel बवासीर में सच में काम करता है?Does Witch Hazel Really Work For Hemorrhoids
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Witch Hazel कुछ लोगों में खुजली, जलन और असुविधा जैसे हल्के लक्षणों में अस्थायी राहत दे सकता है। लेकिन यह बवासीर का स्थायी इलाज नहीं है।
| ⬤ | हल्की जलन में राहत: कुछ लोगों को आराम मिल सकता है। |
| ⬤ | त्वचा की संवेदनशीलता: कुछ लोगों में जलन या irritation हो सकती है। |
| ⬤ | सही उत्पाद चुनें: बिना ज़रूरत के कई उत्पाद एक साथ न लगाएं। |
| ⬤ | रक्तस्राव में सावधानी: केवल Witch Hazel पर निर्भर न रहें। |
| ⬤ | लक्षण बने रहें: डॉक्टर से सलाह लें। |
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बवासीर किस कारण होती है और इससे कैसे बचें?What Causes Hemorrhoids And How Can I Prevent Them
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क़ब्ज़, मल त्याग में ज़ोर लगाना, लंबे समय तक बैठना और कम शारीरिक गतिविधि बवासीर के सामान्य जोखिम कारकों में शामिल हैं। क़ब्ज़ नियंत्रित करना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना बचाव में मदद कर सकता है।
| ⬤ | फाइबर बढ़ाएं: फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज और दालें फ़ायदेमंद हैं। |
| ⬤ | भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी से क़ब्ज़ बढ़ सकती है। |
| ⬤ | नियमित चलें: शारीरिक गतिविधि आंतों की गति में मदद कर सकती है। |
| ⬤ | टॉयलेट में ज़ोर न लगाएं: मल त्याग को सहज रखें। |
| ⬤ | लंबे समय तक न बैठें: ख़ासकर टॉयलेट पर। |
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बवासीर के दर्द में Sitz Bath कैसे लें?How To Use Sitz Baths For Hemorrhoid Pain Relief
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Sitz Bath में गुनगुने पानी में बैठकर गुदा क्षेत्र को आराम दिया जाता है। यह दर्द, जलन और असुविधा में अस्थायी राहत दे सकता है।
| ⬤ | गुनगुना पानी लें: बहुत गर्म पानी से बचें। |
| ⬤ | 10–15 मिनट बैठें: ज़रूरत के अनुसार दिन में कुछ बार कर सकते हैं। |
| ⬤ | साफ़ पानी काफ़ी है: बिना सलाह के कई पदार्थ न मिलाएं। |
| ⬤ | धीरे से सुखाएं: रगड़ने से बचें। |
| ⬤ | लक्षण बढ़ें तो: उपयोग बंद करके डॉक्टर से सलाह लें। |
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Internal और External Hemorrhoids में क्या अंतर है?Internal Vs External Hemorrhoids: What Is The Difference
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Internal Hemorrhoids गुदा नली के अंदर होती हैं, जबकि External Hemorrhoids गुदा के बाहर की त्वचा के नीचे होती हैं। दोनों के लक्षण और उपचार अलग हो सकते हैं।
| ⬤ | Internal: अक्सर मल त्याग के दौरान ताज़ा लाल रक्तस्राव हो सकता है। |
| ⬤ | External: बाहर गांठ, दर्द या सूजन महसूस हो सकती है। |
| ⬤ | Thrombosed External: इसमें खून का थक्का बनने से तेज़ दर्द हो सकता है। |
| ⬤ | लक्षणों से हमेशा पहचान नहीं होती: जांच की ज़रूरत पड़ सकती है। |
| ⬤ | उपचार: बवासीर के प्रकार और गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है। |
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बवासीर में कौन-से भोजन से बचना चाहिए?What Foods Should I Avoid With Hemorrhoids
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बवासीर में ऐसा कोई एक भोजन नहीं है जिसे हर व्यक्ति को पूरी तरह बंद करना ज़रूरी हो। लेकिन जो भोजन क़ब्ज़, कठोर मल या जलन बढ़ाते हैं, उन्हें कम करना फ़ायदेमंद हो सकता है।
| ⬤ | कम फाइबर वाला भोजन: इसे अधिक मात्रा में लेने से क़ब्ज़ बढ़ सकती है। |
| ⬤ | बहुत अधिक तला-भुना भोजन: कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी बढ़ा सकता है। |
| ⬤ | पानी की कमी: क़ब्ज़ को बढ़ा सकती है। |
| ⬤ | व्यक्तिगत Trigger: जिस भोजन से आपको जलन या परेशानी बढ़ती हो, उसे पहचानें। |
| ⬤ | संतुलित भोजन: फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज और भरपूर पानी फ़ायदेमंद हैं। |
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क्या मल त्याग के दौरान ज़ोर लगाने से बवासीर होती है?Does Straining During Bowel Movements Cause Hemorrhoids
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हाँ, मल त्याग के दौरान बार-बार ज़ोर लगाने से बवासीर का जोखिम बढ़ सकता है। क़ब्ज़ और कठोर मल इस समस्या को बढ़ाने वाले ज़रूरी कारणों में शामिल हैं।
| ⬤ | कठोर मल: मल त्याग में अधिक ज़ोर लगाना पड़ सकता है। |
| ⬤ | टॉयलेट में लंबे समय तक बैठना: दबाव बढ़ा सकता है। |
| ⬤ | मल रोकना: क़ब्ज़ को बढ़ा सकता है। |
| ⬤ | फाइबर और पानी: मल को नरम रखने में मदद करते हैं। |
| ⬤ | लगातार समस्या: क़ब्ज़ के कारण की जांच कराएं। |
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बवासीर से बचने के लिए कितना फाइबर लेना चाहिए?How Much Fiber Do I Need To Prevent Hemorrhoid Flare-Ups
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अधिकांश वयस्कों के लिए रोज़ाना लगभग 25–30 ग्राम फाइबर एक सामान्य लक्ष्य हो सकता है। अपनी ज़रूरत के अनुसार फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं और भरपूर पानी पिएं।
| ⬤ | फल और सब्ज़ियां: फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। |
| ⬤ | साबुत अनाज: आहार में शामिल करें। |
| ⬤ | दालें और बीन्स: फ़ायदेमंद विकल्प हैं। |
| ⬤ | फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं: अचानक बहुत अधिक लेने से गैस या पेट फूलना हो सकता है। |
| ⬤ | पानी काफ़ी लें: फाइबर के साथ पानी भी ज़रूरी है। |
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गर्भावस्था में बवासीर हो जाए तो क्या सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकती हूं?Hemorrhoids During Pregnancy: What Can I Safely Use
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गर्भावस्था में बवासीर के लिए पानी, फाइबर, क़ब्ज़ से बचाव और Sitz Bath जैसे उपाय फ़ायदेमंद हो सकते हैं। किसी भी क्रीम, मलहम या दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह से करें।
| ⬤ | क़ब्ज़ से बचें: गर्भावस्था में यह बहुत ज़रूरी है। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: मल को नरम रखने में मदद कर सकते हैं। |
| ⬤ | Sitz Bath: गुनगुने पानी में बैठना राहत दे सकता है। |
| ⬤ | दवाओं में सावधानी: हर OTC उत्पाद गर्भावस्था में उपयुक्त नहीं होता। |
| ⬤ | अधिक रक्तस्राव या तेज़ दर्द: तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। |
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बवासीर के लिए डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?When Should I See A Doctor About My Hemorrhoids
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अगर रक्तस्राव बार-बार हो, दर्द बढ़ रहा हो, गांठ अचानक बहुत दर्दनाक हो जाए या घरेलू देखभाल से सुधार न हो, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
| ⬤ | बार-बार रक्तस्राव: जांच ज़रूरी हो सकती है। |
| ⬤ | तेज़ या लगातार दर्द: विशेषकर नई गांठ के साथ। |
| ⬤ | काला मल या चक्कर: तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। |
| ⬤ | लक्षण बढ़ते जाएं: उपचार की समीक्षा ज़रूरी है। |
| ⬤ | पहली बार रक्तस्राव: कारण की पुष्टि कराना बेहतर है। |
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क्या बवासीर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है?Can Hemorrhoids Cause Serious Complications
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अधिकांश बवासीर गंभीर जटिलता नहीं बनती, लेकिन अधिक रक्तस्राव, खून की कमी, थक्का बनने या संक्रमण जैसी समस्याएं कुछ मामलों में हो सकती हैं।
| ⬤ | अधिक रक्तस्राव: कमज़ोरी या खून की कमी हो सकती है। |
| ⬤ | Thrombosed Hemorrhoid: दर्दनाक गांठ बन सकती है। |
| ⬤ | संक्रमण के लक्षण: बुख़ार, बढ़ती सूजन या तेज़ दर्द में जांच ज़रूरी है। |
| ⬤ | लगातार समस्या: सही उपचार की ज़रूरत हो सकती है। |
| ⬤ | हर रक्तस्राव को बवासीर न मानें: अन्य कारणों की जांच ज़रूरी हो सकती है। |
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बवासीर की सूजन प्राकृतिक तरीक़े से कैसे कम करें?How To Reduce Hemorrhoid Swelling Naturally
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गुनगुने पानी में बैठना, क़ब्ज़ से बचना, भरपूर पानी पीना और लंबे समय तक बैठने से बचना बवासीर की सूजन और असुविधा कम करने में मदद कर सकता है।
| ⬤ | Sitz Bath: 10–15 मिनट गुनगुने पानी में बैठें। |
| ⬤ | फाइबर और पानी: मल को नरम रखने में मदद करते हैं। |
| ⬤ | ज़ोर न लगाएं: मल त्याग को सहज रखें। |
| ⬤ | आरामदायक बैठना: लंबे समय तक दबाव से बचें। |
| ⬤ | सूजन बढ़े तो: डॉक्टर से सलाह लें। |
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मेरी बवासीर बढ़ती क्यों जा रही है और मुझे क्या करना चाहिए?Why Are My Hemorrhoids Getting Worse And What Should I Do
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क़ब्ज़, लगातार ज़ोर लगाना, लंबे समय तक बैठना या उपचार में देरी से बवासीर के लक्षण बढ़ सकते हैं। अगर समस्या बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना और उपचार की समीक्षा करना बेहतर है।
| ⬤ | क़ब्ज़ नियंत्रित करें: कठोर मल से बचें। |
| ⬤ | टॉयलेट में ज़ोर न लगाएं: दबाव कम रखें। |
| ⬤ | लक्षणों का रिकॉर्ड रखें: दर्द, रक्तस्राव और गांठ में बदलाव नोट करें। |
| ⬤ | उपचार की समीक्षा करें: अगर राहत नहीं मिल रही तो डॉक्टर से सलाह लें। |
| ⬤ | अचानक तेज़ दर्द या अधिक रक्तस्राव: तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। |
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बवासीर में सोने की सबसे अच्छी स्थिति कौन-सी है?Best Position To Sleep In With Hemorrhoids
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बवासीर में सोने की कोई एक अनिवार्य स्थिति नहीं है। जिस स्थिति में दर्द और दबाव कम महसूस हो, वह बेहतर हो सकती है। कई लोगों को करवट लेकर सोने में आराम मिलता है।
| ⬤ | करवट लेकर सोना: कुछ लोगों में गुदा क्षेत्र पर दबाव कम कर सकता है। |
| ⬤ | आरामदायक बिस्तर: शरीर को काफ़ी सहारा दें। |
| ⬤ | लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें: ज़रूरत के अनुसार करवट बदलें। |
| ⬤ | Sitz Bath: सोने से पहले आराम दे सकता है। |
| ⬤ | तेज़ दर्द में: डॉक्टर से सलाह लें। |
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क्या Stool Softeners बवासीर में सच में मदद करते हैं?Do Stool Softeners Really Help With Hemorrhoids
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हाँ, Stool Softeners कुछ लोगों में मल को नरम रखने में मदद कर सकते हैं, जिससे मल त्याग के दौरान ज़ोर कम लगाना पड़ता है। इनका उपयोग ज़रूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
| ⬤ | कठोर मल में फ़ायदेमंद: मल त्याग आसान हो सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़ का कारण समझें: केवल Stool Softener हमेशा काफ़ी नहीं होता। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: साथ में ज़रूरी हैं। |
| ⬤ | लंबे समय तक उपयोग: डॉक्टर की सलाह से करें। |
| ⬤ | लगातार क़ब्ज़: चिकित्सकीय जांच ज़रूरी हो सकती है। |
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ऑफ़िस में बिना झिझक बवासीर को कैसे संभालें?How To Manage Hemorrhoids At Work Without Embarrassment
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बवासीर एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है। ऑफ़िस में इसे संभालने के लिए नियमित ब्रेक, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, पानी और टॉयलेट की सही आदतें मददगार हो सकती हैं।
| ⬤ | नियमित ब्रेक लें: लंबे समय तक लगातार न बैठें। |
| ⬤ | टॉयलेट न रोकें: मल त्याग की इच्छा को टालने से बचें। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: क़ब्ज़ से बचाव में मदद करते हैं। |
| ⬤ | आरामदायक सीट: ज़रूरत के अनुसार कुशन का उपयोग करें। |
| ⬤ | गोपनीयता की चिंता: ज़रूरत हो तो डॉक्टर से निजी परामर्श लें। |
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बवासीर की गंभीर समस्या के चेतावनी संकेत क्या हैं?What Are The Warning Signs Of A Serious Hemorrhoid Problem
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अधिक रक्तस्राव, तेज़ या लगातार दर्द, अचानक बहुत दर्दनाक गांठ, काला मल, चक्कर या बुख़ार जैसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
| ⬤ | अधिक रक्तस्राव: तुरंत जांच ज़रूरी हो सकती है। |
| ⬤ | तेज़ दर्द: ख़ासकर अचानक शुरू हुआ दर्द। |
| ⬤ | काला मल: ऊपरी पाचन तंत्र से रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। |
| ⬤ | बुख़ार या बढ़ती सूजन: संक्रमण की संभावना में जांच ज़रूरी है। |
| ⬤ | बेहोशी या तेज़ कमज़ोरी: आपातकालीन सहायता लें। |
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बवासीर की क्रीम और मलहम में कौन-सा सबसे अच्छा है?Hemorrhoid Ointments And Creams: Which Ones Work Best
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बवासीर की क्रीम या मलहम का चुनाव लक्षणों के अनुसार किया जाता है। दर्द, खुजली, जलन और सूजन के लिए अलग-अलग प्रकार के उत्पाद उपयोग किए जा सकते हैं।
| ⬤ | दर्द में: कुछ स्थानीय उत्पाद अस्थायी राहत दे सकते हैं। |
| ⬤ | खुजली में: कुछ क्रीम फ़ायदेमंद हो सकती हैं। |
| ⬤ | सूजन में: डॉक्टर की सलाह से उपयुक्त उत्पाद चुनें। |
| ⬤ | लंबे समय तक उपयोग: बिना सलाह के न करें। |
| ⬤ | रक्तस्राव या तेज़ दर्द: केवल क्रीम पर निर्भर न रहें। |
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क्या बवासीर में व्यायाम कर सकते हैं या आराम करना चाहिए?Can I Exercise With Hemorrhoids Or Should I Rest
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हल्की बवासीर में सामान्य हल्की गतिविधियां और चलना फ़ायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन तेज़ दर्द, अधिक रक्तस्राव या गंभीर सूजन में आराम और चिकित्सकीय सलाह ज़रूरी है।
| ⬤ | हल्का चलना: क़ब्ज़ और शरीर की गतिविधि में मदद कर सकता है। |
| ⬤ | भारी वज़न उठाने से बचें: ख़ासकर दर्द या सूजन के दौरान। |
| ⬤ | व्यायाम धीरे-धीरे करें: लक्षण बढ़ें तो रुकें। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: साथ में ज़रूरी हैं। |
| ⬤ | गंभीर दर्द में: डॉक्टर से सलाह लें। |
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बवासीर की खुजली और असुविधा कैसे कम करें?How To Handle Hemorrhoid Itching And Discomfort
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बवासीर की खुजली और असुविधा में साफ़-सफ़ाई, त्वचा को सूखा रखना, रगड़ से बचना और ज़रूरत के अनुसार स्थानीय उपचार मददगार हो सकते हैं।
| ⬤ | धीरे से सफ़ाई करें: पानी से साफ़ करना फ़ायदेमंद हो सकता है। |
| ⬤ | रगड़ से बचें: त्वचा को नुक़सान न पहुंचाएं। |
| ⬤ | बिना ख़ुशबू वाले उत्पाद: ज़रूरत हो तो gentle wipes चुनें। |
| ⬤ | Sitz Bath: जलन और असुविधा में आराम दे सकता है। |
| ⬤ | खुजली लगातार रहे: डॉक्टर से सलाह लें। |
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बवासीर में खून आना सामान्य है या किसी और समस्या का संकेत?Is Bleeding From Hemorrhoids Normal Or A Sign Of Something Else
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बवासीर में ताज़ा लाल रक्तस्राव हो सकता है, लेकिन हर रक्तस्राव को बवासीर मानना सही नहीं है। पहली बार, बार-बार या असामान्य रक्तस्राव में डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी है।
| ⬤ | ताज़ा लाल खून: बवासीर में दिखाई दे सकता है। |
| ⬤ | बार-बार रक्तस्राव: कारण की जांच ज़रूरी है। |
| ⬤ | काला मल: अन्य कारणों की संभावना में तुरंत सलाह लें। |
| ⬤ | दर्द और गांठ: साथ में होने पर जांच ज़रूरी हो सकती है। |
| ⬤ | अधिक रक्तस्राव: आपातकालीन सहायता लें। |
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बवासीर की समस्या के बारे में डॉक्टर से कैसे बात करें?How To Talk To Your Doctor About Hemorrhoid Problems
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डॉक्टर को अपने लक्षण, उनकी अवधि और रक्तस्राव या दर्द की जानकारी स्पष्ट रूप से बताएं। इससे सही जांच और उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है।
| ⬤ | लक्षण कब शुरू हुए: तारीख़ या अनुमान बताएं। |
| ⬤ | रक्तस्राव का प्रकार: ताज़ा लाल खून, काला मल या अन्य बदलाव। |
| ⬤ | दर्द और गांठ: कब बढ़ते हैं, बताएं। |
| ⬤ | क़ब्ज़ की जानकारी: मल की कठोरता और ज़ोर लगाने की आदत। |
| ⬤ | पहले का उपचार: कौन-सी दवा या क्रीम उपयोग की, बताएं। |
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बवासीर को ठीक होने में मदद करने वाले जीवनशैली बदलाव कौन-से हैं?Lifestyle Changes That Actually Help Hemorrhoids Heal
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क़ब्ज़ से बचना, भरपूर पानी पीना, फाइबर बढ़ाना, नियमित चलना और मल त्याग में ज़ोर न लगाना बवासीर के लक्षणों को कम करने और दोबारा होने की संभावना घटाने में मदद कर सकते हैं।
| ⬤ | फाइबर बढ़ाएं: मल को नरम रखने में मदद करता है। |
| ⬤ | पानी काफ़ी लें: क़ब्ज़ से बचाव में फ़ायदेमंद है। |
| ⬤ | नियमित चलें: शारीरिक गतिविधि बनाए रखें। |
| ⬤ | टॉयलेट में देर न करें: ज़रूरत से ज़्यादा समय न बैठें। |
| ⬤ | लक्षणों की निगरानी: सुधार न हो तो डॉक्टर से सलाह लें। |
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ऑफ़िस में बवासीर के दोबारा बढ़ने से कैसे बचें?How To Prevent Hemorrhoid Flare-Ups At Work
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ऑफ़िस में लंबे समय तक बैठने से बचना, नियमित ब्रेक लेना और क़ब्ज़ को नियंत्रित रखना बवासीर के दोबारा बढ़ने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
| ⬤ | नियमित ब्रेक लें: बीच-बीच में उठकर चलें। |
| ⬤ | आरामदायक बैठने की व्यवस्था: ज़रूरत के अनुसार कुशन उपयोग करें। |
| ⬤ | पानी और फाइबर: क़ब्ज़ से बचाव में मदद करते हैं। |
| ⬤ | टॉयलेट न रोकें: मल त्याग की इच्छा को टालने से बचें। |
| ⬤ | लक्षण बढ़ें: डॉक्टर से सलाह लें। |
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बवासीर के दर्द और Anal Fissure के दर्द में क्या अंतर है?What Is The Difference Between Hemorrhoid Pain And Anal Fissure Pain
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बवासीर और Anal Fissure दोनों में दर्द और रक्तस्राव हो सकता है, लेकिन उनके लक्षण अलग हो सकते हैं। Anal Fissure में मल त्याग के दौरान तेज़ चीरने जैसा दर्द हो सकता है, जबकि बवासीर में गांठ, खुजली या रक्तस्राव अधिक प्रमुख हो सकते हैं।
| ⬤ | Hemorrhoids: बाहरी गांठ, खुजली या रक्तस्राव हो सकता है। |
| ⬤ | Anal Fissure: मल त्याग के दौरान तेज़ चीरने जैसा दर्द हो सकता है। |
| ⬤ | रक्तस्राव: दोनों में ताज़ा लाल खून दिखाई दे सकता है। |
| ⬤ | क़ब्ज़: दोनों समस्याओं में योगदान दे सकती है। |
| ⬤ | सही उपचार: बीमारी की पहचान के अनुसार तय किया जाता है। |
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क्या बवासीर में कभी सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है और कब?Do Hemorrhoids Ever Require Surgery And When
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कुछ गंभीर या बार-बार होने वाली बवासीर में सर्जरी या अन्य प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ सकती है। यह निर्णय बवासीर के प्रकार, गंभीरता और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।
| ⬤ | लगातार रक्तस्राव: जांच और उपचार की ज़रूरत हो सकती है। |
| ⬤ | गंभीर बाहरी बवासीर: कुछ मामलों में प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ सकती है। |
| ⬤ | बार-बार समस्या: उपचार की समीक्षा ज़रूरी है। |
| ⬤ | अन्य उपचार: कुछ मामलों में सर्जरी के अलावा भी विकल्प हो सकते हैं। |
| ⬤ | निर्णय डॉक्टर लेते हैं: जांच के बाद सही विकल्प चुना जाता है। |
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बवासीर से जूझते समय Support System कैसे बनाएं?How To Build A Support System While Dealing With Hemorrhoids
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बवासीर एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है और इसके बारे में शर्म महसूस करने की ज़रूरत नहीं है। परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना, डॉक्टर से परामर्श लेना और अपनी दिनचर्या में मदद लेना फ़ायदेमंद हो सकता है।
| ⬤ | भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें: ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगें। |
| ⬤ | डॉक्टर से खुलकर बताएं: लक्षण छिपाने से उपचार कठिन हो सकता है। |
| ⬤ | दैनिक कामों में मदद लें: अगर दर्द या असुविधा अधिक हो। |
| ⬤ | तनाव कम करें: काफ़ी आराम और नींद रखें। |
| ⬤ | लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें: समय पर उपचार लें। |
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क्या बवासीर पर सामान्य क्रीम लगा सकते हैं या विशेष क्रीम चाहिए?Can I Use Regular Creams On Hemorrhoids Or Do I Need Special Ones
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बवासीर पर हर सामान्य क्रीम लगाना उचित नहीं है। कुछ क्रीम त्वचा में जलन बढ़ा सकती हैं, इसलिए विशेष रूप से बवासीर के लिए बने उत्पाद या डॉक्टर की सलाह बेहतर रहती है।
| ⬤ | सामान्य क्रीम से सावधानी: हर उत्पाद गुदा क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं होता। |
| ⬤ | बिना ख़ुशबू वाले उत्पाद: त्वचा की जलन कम करने में मदद कर सकते हैं। |
| ⬤ | क्रीम का सही उपयोग: निर्देशों के अनुसार करें। |
| ⬤ | जलन बढ़े तो बंद करें: और डॉक्टर से सलाह लें। |
| ⬤ | रक्तस्राव या तेज़ दर्द: केवल क्रीम पर निर्भर न रहें। |
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बवासीर में बहुत ज़्यादा खून आए तो कब Emergency है?Hemorrhoids Bleeding A Lot: When Is It An Emergency
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अगर बवासीर में बहुत अधिक रक्तस्राव हो, खून लगातार आ रहा हो, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
| ⬤ | बहुत अधिक रक्तस्राव: तुरंत चिकित्सा सहायता लें। |
| ⬤ | चक्कर या बेहोशी: गंभीर रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। |
| ⬤ | तेज़ कमज़ोरी: खून की कमी की संभावना में जांच ज़रूरी है। |
| ⬤ | काला मल: तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। |
| ⬤ | लगातार रक्तस्राव: इसे केवल बवासीर मानकर न चलें। |
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बवासीर के इलाज के बाद सामान्य गतिविधियों में वापस कैसे लौटें?How To Get Back To Normal Activities After Hemorrhoid Treatment
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बवासीर के इलाज के बाद सामान्य गतिविधियों में लौटने का समय उपचार के प्रकार और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहतर होता है।
| ⬤ | हल्की गतिविधि से शुरुआत करें: चलना फ़ायदेमंद हो सकता है। |
| ⬤ | भारी वज़न से बचें: जब तक डॉक्टर अनुमति न दें। |
| ⬤ | क़ब्ज़ नियंत्रित रखें: मल त्याग में ज़ोर न लगाएं। |
| ⬤ | दवाओं और देखभाल के निर्देश: नियमित रूप से पालन करें। |
| ⬤ | लक्षण वापस आएं: डॉक्टर से सलाह लें। |
⚖️ भ्रम बनाम सच्चाई — बवासीर के 14 सबसे बड़े Myths
बवासीर के बारे में जितनी बातें लोगों के बीच चलती हैं, उनमें से कई ग़लत हैं — और कुछ तो नुक़सानदेह भी। नीचे हर भ्रम के सामने सच्चाई दी गई है, और साथ में यह भी कि वह सच्चाई किस आधार पर लिखी गई है।
💬 लोग अक्सर ये भी पूछते हैं
ये वे सवाल हैं जो ऊपर के 40 सवालों के बाद सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं — दोबारा होना, गांठ और स्राव की पहचान, क़ब्ज़ से रिश्ता, खून की कमी और जांच में क्या-क्या होता है।
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क्या इलाज के बाद बवासीर दोबारा हो सकती है?Can Hemorrhoids Come Back After Treatment?
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हाँ, इलाज के बाद भी बवासीर दोबारा हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह होती है कि जिन आदतों से बवासीर बनी थी — क़ब्ज़, ज़ोर लगाना, घंटों बैठे रहना — वे इलाज के बाद वैसी ही बनी रहें। सर्जरी के बाद भी दोबारा होने की संभावना पूरी तरह ख़त्म नहीं होती।
| ⬤ | मूल कारण न सुधरे तो: क़ब्ज़ और ज़ोर लगाने की आदत बनी रहने पर शिकायत लौट सकती है। |
| ⬤ | दवा बीच में छोड़ना: लक्षण कम होते ही इलाज रोक देने से समस्या अधूरी रह जाती है। |
| ⬤ | सर्जरी के बाद भी: प्रक्रिया के बाद भी जीवनशैली न बदले तो दोबारा हो सकती है। |
| ⬤ | गर्भावस्था व वज़न: हर नई गर्भावस्था या वज़न बढ़ने पर जोखिम फिर बढ़ जाता है। |
| ⬤ | रोकथाम ही असली इलाज है: रोज़ 25–35 ग्राम रेशा, पानी और शौच का नियमित समय सबसे कारगर बचाव हैं। |
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2
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कैसे पता करें कि बवासीर अंदरूनी है या बाहरी?How Do I Know If I Have Internal Or External Hemorrhoids?
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अंदरूनी बवासीर में आमतौर पर दर्द नहीं होता और पहला संकेत मल के साथ चमकीला लाल खून होता है। बाहरी बवासीर में गांठ हाथ से महसूस होती है और दर्द, सूजन व खुजली मुख्य शिकायत रहती है। पक्की पहचान जांच से ही होती है।
| ⬤ | दर्द है या नहीं: अंदरूनी में दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए दर्द कम; बाहरी में दर्द प्रमुख। |
| ⬤ | गांठ महसूस होना: बाहरी बवासीर में गुदा के मुँह पर गांठ हाथ से महसूस होती है। |
| ⬤ | खून का पैटर्न: अंदरूनी में मल के ऊपर या टॉयलेट पेपर पर ताज़ा लाल खून दिखता है। |
| ⬤ | बाहर आना: अंदरूनी मस्सा ज़ोर लगाने पर बाहर आ सकता है — यही Grade तय करता है। |
| ⬤ | दोनों साथ भी हो सकती हैं: मिली-जुली (Interno-External) बवासीर सबसे आम असली तस्वीर है। |
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क्या बवासीर से गुदा के पास गांठ बन सकती है?Can Hemorrhoids Cause A Lump Near The Anus?
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हाँ, बवासीर गुदा के पास गांठ बना सकती है — यह बाहरी बवासीर, बाहर आया अंदरूनी मस्सा, थक्का जमी गांठ या बवासीर के बाद बची त्वचा की झालर हो सकती है। लेकिन गुदा के पास हर गांठ बवासीर नहीं होती, इसलिए नई गांठ की जांच ज़रूरी है।
| ⬤ | बाहरी बवासीर: नरम, दबाने पर दबने वाली गांठ जो सूजन के साथ बढ़ती-घटती है। |
| ⬤ | थक्का जमी गांठ: अचानक बनी नीली-बैंगनी, कड़ी और बेहद दर्दनाक गांठ — तुरंत दिखाएं। |
| ⬤ | त्वचा की झालर: पुरानी सूजन के बाद बची ढीली त्वचा, जो अक्सर दर्द नहीं करती। |
| ⬤ | फोड़ा या भगंदर: गांठ गर्म, लाल हो और उसमें पीप या बुख़ार हो तो यह बवासीर नहीं है। |
| ⬤ | हर गांठ बवासीर नहीं: मस्से, सिस्ट या दूसरी वजहें भी हो सकती हैं — जांच से ही पक्का होता है। |
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क्या बवासीर में बलगम जैसा स्राव आ सकता है?Can Hemorrhoids Cause Mucus Discharge?
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हाँ, बवासीर में गुदा से बलगम जैसा चिपचिपा स्राव आ सकता है, ख़ासकर जब मस्सा बाहर आ जाता है और गुदा पूरी तरह बंद नहीं हो पाता। इस स्राव से आसपास की त्वचा गीली रहती है, जिससे खुजली और जलन बढ़ती है।
| ⬤ | क्यों होता है: बाहर आया मस्सा गुदा को पूरी तरह बंद नहीं होने देता, जिससे भीतर का बलगम रिसता है। |
| ⬤ | खुजली से जुड़ाव: लगातार गीलापन गुदा की खुजली (Pruritus Ani) की बड़ी वजह बनता है। |
| ⬤ | कपड़ों पर निशान: अंडरगारमेंट पर हल्के दाग़ इसी स्राव की वजह से आते हैं। |
| ⬤ | त्वचा की देखभाल: पानी से धीरे सफ़ाई और हल्के हाथ से सुखाना ज़रूरी है; ज़ोर से न रगड़ें। |
| ⬤ | कब जांच कराएं: स्राव में खून, पीप या तेज़ बदबू हो तो यह भगंदर या संक्रमण का संकेत हो सकता है। |
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क्या बवासीर से क़ब्ज़ हो सकती है या क़ब्ज़ और बढ़ सकती है?Can Hemorrhoids Cause Constipation Or Make It Worse?
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बवासीर सीधे क़ब्ज़ नहीं बनाती, पर दोनों एक-दूसरे को बढ़ाते हैं। दर्द के डर से लोग शौच टालने लगते हैं, जिससे मल और कठोर हो जाता है और अगली बार ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है — यही चक्र बवासीर को बिगाड़ता है।
| ⬤ | दर्द का डर: शौच टालने से मल आँत में रुककर सूख जाता है। |
| ⬤ | बड़े मस्सों की रुकावट: कठोर व बड़े मस्से मल के रास्ते में शारीरिक रुकावट बना सकते हैं। |
| ⬤ | अधूरेपन का अहसास: मल निकलने के बाद भी लगता है कुछ बाक़ी है, जिससे बार-बार ज़ोर लगता है। |
| ⬤ | चक्र तोड़ना ज़रूरी: मल नरम रखना ही इलाज की पहली शर्त है — रेशा, पानी, नियमित समय। |
| ⬤ | दवा से पहले आदत: क़ब्ज़ ठीक किए बिना कोई भी इलाज आधा ही असर करता है। |
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बवासीर और मलाशय बाहर आने (Rectal Prolapse) में क्या अंतर है?What Is The Difference Between Hemorrhoids And Rectal Prolapse?
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बवासीर में गुदा की फूली हुई नसें बाहर आती हैं, जबकि Rectal Prolapse में मलाशय की पूरी दीवार ही बाहर निकल आती है। बाहर आया हिस्सा बवासीर में अलग-अलग गुच्छों जैसा दिखता है, जबकि प्रोलैप्स में गोल छल्लेदार परतों वाला दिखता है।
| ⬤ | क्या बाहर आता है: बवासीर में नसों के गुच्छे; प्रोलैप्स में मलाशय की पूरी परत। |
| ⬤ | दिखने में अंतर: बवासीर अलग-अलग उभार जैसी; प्रोलैप्स गोल, छल्लेदार परतों जैसा। |
| ⬤ | मल पर नियंत्रण: प्रोलैप्स में मल या गैस पर नियंत्रण घटने की शिकायत ज़्यादा आम है। |
| ⬤ | किसे ज़्यादा होता है: प्रोलैप्स बुज़ुर्गों, बच्चों और पुरानी क़ब्ज़ वाले लोगों में अधिक देखा जाता है। |
| ⬤ | जांच ज़रूरी: दोनों का इलाज अलग होता है, इसलिए अनुमान लगाने के बजाय जांच कराएं। |
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बवासीर को दोबारा होने से कैसे रोकें?Can Hemorrhoids Be Prevented From Coming Back?
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हाँ, ज़्यादातर मामलों में दोबारा होने का जोखिम काफ़ी घटाया जा सकता है। इसका पूरा दारोमदार तीन चीज़ों पर है — मल नरम रखना, शौच में ज़ोर न लगाना और लंबे समय तक बैठे न रहना। दवा से मिली राहत इन्हीं आदतों से टिकती है।
| ⬤ | रोज़ 25–35 ग्राम रेशा: फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें या ईसबगोल की भूसी से। |
| ⬤ | 2–3 लीटर पानी: रेशा बिना भरपूर पानी के उल्टा क़ब्ज़ बढ़ा सकता है। |
| ⬤ | शौच का समय 3 मिनट: मोबाइल टॉयलेट में न ले जाएं; हाजत होते ही जाएं, टालें नहीं। |
| ⬤ | रोज़ 30 मिनट टहलना: बैठे रहने से पेडू में जमा खून हिलता है। |
| ⬤ | वज़न व भारी बोझ: अतिरिक्त वज़न घटाएं और साँस रोककर भारी वज़न उठाने से बचें। |
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बवासीर का इलाज न कराया जाए तो क्या होता है?What Happens If Hemorrhoids Are Left Untreated?
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हल्की बवासीर कई बार बिना इलाज के भी शांत हो जाती है, पर लगातार अनदेखी करने पर शिकायत बढ़ सकती है — मस्सा बड़ा होकर बाहर रहने लगता है, बार-बार खून जाने से कमज़ोरी आ सकती है, और थक्का या संक्रमण जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
| ⬤ | श्रेणी का बढ़ना: Grade I–II की शिकायत धीरे-धीरे Grade III–IV तक पहुँच सकती है। |
| ⬤ | खून की कमी: लगातार थोड़ा-थोड़ा खून जाने से थकान, पीलापन और हाँफी हो सकती है। |
| ⬤ | थक्का जमना: बाहरी मस्से की नस में खून जमकर अचानक असहनीय दर्द दे सकता है। |
| ⬤ | खुजली व त्वचा की शिकायत: लगातार गीलापन और खुजली से आसपास की त्वचा ख़राब हो जाती है। |
| ⬤ | सबसे बड़ा जोखिम: किसी और गंभीर कारण को ‘बस बवासीर है’ मानकर सालों टाल देना। |
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क्या बवासीर से खून की कमी (Anemia) हो सकती है?Can Hemorrhoids Cause Anemia From Bleeding?
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हाँ, अगर बवासीर से लंबे समय तक बार-बार खून जाता रहे तो शरीर में लौह की कमी से खून की कमी हो सकती है। यह अचानक नहीं, धीरे-धीरे बनती है — इसीलिए कई मरीज़ों को पता तब चलता है जब थकान और पीलापन साफ़ दिखने लगता है।
| ⬤ | किन लक्षणों से पहचानें: लगातार थकान, पीलापन, चक्कर, थोड़ी मेहनत पर हाँफी और धड़कन बढ़ना। |
| ⬤ | धीरे-धीरे बनती है: रोज़ थोड़ा-थोड़ा खून जाना भी महीनों में बड़ी कमी बना सकता है। |
| ⬤ | जांच से पुष्टि: हीमोग्लोबिन और लौह की जांच से ही पक्का होता है, अनुमान से नहीं। |
| ⬤ | सिर्फ़ बवासीर न मानें: खून की कमी के साथ वज़न घटना या मल की आदत बदलना हो तो पूरी जांच कराएं। |
| ⬤ | कब तुरंत जाएं: खून के साथ चक्कर, बेहोशी जैसा या तेज़ कमज़ोरी हो तो देर न करें। |
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बवासीर की जांच में क्या-क्या होता है?What Should I Expect During A Hemorrhoid Examination?
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बवासीर की जांच आमतौर पर आसान और जल्दी हो जाती है। डॉक्टर पहले लक्षण पूछते हैं, फिर गुदा क्षेत्र को बाहर से देखते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर एनोस्कोपी करते हैं जिससे अंदरूनी मस्सों की श्रेणी साफ़ दिखती है। चेतावनी संकेत हों तो कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जाती है।
| ⬤ | पहले सवाल-जवाब: खून का रंग, दर्द कब बढ़ता है, क़ब्ज़ और मल की आदत पूछी जाती है। |
| ⬤ | बाहरी जांच: गुदा के आसपास गांठ, दरार, सूजन या त्वचा की झालर देखी जाती है। |
| ⬤ | एनोस्कोपी: एक छोटी नली से अंदरूनी मस्सों की श्रेणी और दरार की स्थिति देखी जाती है। |
| ⬤ | कोलोनोस्कोपी कब: 45+ उम्र में नया रक्तस्राव, वज़न घटना या पारिवारिक इतिहास होने पर। |
| ⬤ | घबराएं नहीं: जांच में कुछ पल की असुविधा हो सकती है, पर यही सही इलाज की दिशा तय करती है। |
बवासीर में होम्योपैथी की दवा लक्षणों के आधार पर चुनी जाती है, बीमारी के नाम पर नहीं। खूनी बवासीर में Hamamelis व Millefolium, सूखी-दर्दनाक बवासीर में Aesculus, क़ब्ज़ के साथ Collinsonia, जलन-खुजली में Sulphur, फ़िशर में Ratanhia और भगंदर में Silicea सबसे अधिक प्रयोग होती हैं। आम पोटेंसी 30C है; पुरानी शिकायत में 200C चिकित्सक तय करते हैं।
📋 मुख्य तथ्य — एक नज़र में (Key Facts)
| विषय | बवासीर (Piles / Haemorrhoids) की होम्योपैथिक दवाएँ |
| कुल दवाएँ | 40 (आम बवासीर 10 · खूनी बवासीर 10 · फ़िशर 10 · भगंदर-खुजली 10) |
| मुख्य ICD-10 कोड | K64 (Haemorrhoids) · K60 (Anal Fissure & Fistula) · K61 (Anal Abscess) · L29.0 (Pruritus Ani) |
| मुख्य ICD-11 कोड | DB60–DB62 (Haemorrhoids) · DB50.0/DB50.1 (Anal Fissure / Fistula) · DB70.00 (Anal Abscess) · EC90.5 (Anogenital Pruritus) |
| मुख्य MeSH ID | D006484 Hemorrhoids · D005401 Fissure In Ano · D012003 Rectal Fistula · D011538 Pruritus Ani |
| सबसे अधिक प्रयुक्त पोटेंसी | 30C (सामान्य) · 200C (पुरानी शिकायत) · 6X/12X (बायोकेमिक) · Q (मदर टिंक्चर) |
| खूनी बवासीर की प्रमुख दवाएँ | Hamamelis Virginiana · Millefolium · Phosphorus · China Officinalis |
| फ़िशर की प्रमुख दवाएँ | Ratanhia Peruviana · Acidum Nitricum · Graphites · Natrum Muriaticum |
| भगंदर की प्रमुख दवाएँ | Silicea Terra · Hepar Sulphuris · Myristica Sebifera · Calcarea Sulphurica |
| संदर्भ ग्रंथ | Boericke · Allen's Keynotes · Kent's Repertory · HPI (आयुष मंत्रालय) |
| पोटेंसी श्रेणियाँ | X/D (1:10) · C (1:100) · Q (मदर टिंक्चर) · LM/0 (1:50,000) |
| बवासीर की श्रेणियाँ | Goligher Grade I–IV (मस्सा कितना बाहर आता है, उसी आधार पर) |
| सामान्य इलाज अवधि | नई शिकायत 2–4 हफ़्ते · पुरानी बवासीर व भगंदर 3–6 महीने |
| ज़रूरी परहेज़ | कच्चा प्याज़-लहसुन, कॉफ़ी, पुदीना, तंबाकू · तेज़ मसाला, मैदा, तला हुआ, शराब |
🧿 बवासीर कितने प्रकार की होती है — 6 रूप
दवा चुनने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि आपकी बवासीर किस रूप की है, क्योंकि होम्योपैथी में दवा रूप और लक्षण दोनों देखकर चुनी जाती है। नीचे छह रूप उनके ICD-10 व ICD-11 कोड के साथ दिए गए हैं।
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अंदरूनी बवासीर
Internal Haemorrhoids
K64.0–K64.3 · DB60
मलाशय के अंदर, दाँतेदार रेखा (Dentate Line) के ऊपर बनती है। यहाँ दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए अक्सर दर्द बिलकुल नहीं होता — पहला और कई बार इकलौता संकेत मल के साथ चमकीला लाल खून आना होता है।
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बाहरी बवासीर
External Haemorrhoids
K64.5 · DB60
गुदा के मुँह के बाहर, त्वचा के नीचे बनती है। यह हिस्सा दर्द की नसों से भरा है, इसलिए यहाँ दर्द, सूजन और खुजली मुख्य शिकायत होती है और गाँठ हाथ से महसूस होती है।
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बाहर निकलने वाली बवासीर
Prolapsed Haemorrhoids
K64.1–K64.3 · DB60.1–.3
अंदरूनी मस्सा ज़ोर लगाने पर गुदा से बाहर आ जाता है। शुरू में अपने आप वापस चला जाता है, फिर हाथ से अंदर करना पड़ता है, और अंत में बाहर ही रह जाता है।
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अंधी बवासीर
Blind Haemorrhoids
K64.9 · DB60.Z
वह बवासीर जिसमें खून बिलकुल नहीं आता — केवल गाँठ, भारीपन, खुजली और दर्द रहता है। लोग अक्सर इसे 'बादी बवासीर' कहते हैं। Aesculus और Nux Vomica इसी की मुख्य दवाएँ हैं।
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मिली-जुली बवासीर
Interno-External Haemorrhoids
K64.8 · DB6Y
अंदरूनी और बाहरी — दोनों एक साथ मौजूद। यही सबसे आम असली तस्वीर है, जिसमें खून भी आता है और दर्द-सूजन भी रहती है।
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थक्का जमी बवासीर
Thrombosed Haemorrhoids
K64.5 · DB61
बाहरी मस्से की नस में खून का थक्का जम जाना। गाँठ अचानक नीली-बैंगनी, कड़ी और बेहद दर्दनाक हो जाती है। यह तात्कालिक स्थिति है — देर न करें, तुरंत दिखाएँ।
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🧬 चित्र 1 — गुदा-मलाशय की संरचना और दाँतेदार रेखा का महत्व
बवासीर से जुड़ा सबसे अहम शारीरिक तथ्य यही है — गुदा नली के बीचोंबीच एक दाँतेदार रेखा (Dentate Line) होती है। इसके ऊपर और नीचे का हिस्सा शरीर-रचना, नसों और रक्त-प्रवाह तीनों में अलग है। यही एक रेखा तय करती है कि आपकी बवासीर में दर्द होगा या सिर्फ़ खून आएगा।
🔍 बवासीर क्यों होती है — 8 मुख्य कारण
इन कारणों को ठीक किए बिना कोई भी इलाज अधूरा रहता है। ASCRS की 2024 गाइडलाइन भी खान-पान और शौच की आदत सुधारने को ही पहली पंक्ति का इलाज मानती है।
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पुरानी क़ब्ज़ व ज़ोर लगाना
सबसे बड़ा और सबसे आम कारण। कठोर मल निकालने में बार-बार ज़ोर लगाने से मलाशय की नसों पर दबाव बढ़ता है।
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शौचालय में लंबा समय बिताना
मोबाइल लेकर बैठना अब बड़ा कारण बन चुका है। ASCRS की सलाह है शौच का समय 3 मिनट तक सीमित रखें।
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घंटों बैठकर काम करना
ड्राइवर, दफ़्तर की कुर्सी, दुकान का काउंटर — लगातार बैठे रहने से पेडू की नसों में खून जमा होता है।
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रेशे की कमी व कम पानी
मैदा, तला हुआ और कम सब्ज़ी-फल वाला खाना मल कठोर बनाता है। पानी कम पीना उसे और सुखा देता है।
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गर्भावस्था व प्रसव
बढ़ता गर्भाशय पेडू की नसों को दबाता है, और डिलीवरी के समय का ज़ोर मस्सों को उभार देता है।
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मोटापा व भारी वज़न उठाना
पेट का बढ़ा दबाव और जिम में साँस रोककर वज़न उठाना — दोनों नसों पर सीधा भार डालते हैं।
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उम्र व पारिवारिक प्रवृत्ति
उम्र के साथ गुदा को सँभालने वाले ऊतक ढीले पड़ते हैं; परिवार में किसी को होने पर ख़तरा बढ़ जाता है।
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लंबी खाँसी व लीवर की शिकायत
पुरानी खाँसी का बार-बार दबाव, और लीवर की शिकायत में Portal Hypertension — दोनों गुदा की नसों को फुला सकते हैं।
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📈 बवासीर की चार श्रेणियाँ (Grade I–IV)
अंदरूनी बवासीर को Goligher वर्गीकरण से चार श्रेणियों में बाँटा जाता है, और यह बँटवारा इसी बात पर टिका है कि मस्सा कितना बाहर आता है। इलाज की दिशा सीधे इसी श्रेणी से तय होती है।
| Grade Iपहली श्रेणी |
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| Grade IIदूसरी श्रेणी |
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| Grade IIIतीसरी श्रेणी |
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| Grade IVचौथी श्रेणी |
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⚖️ बवासीर में होम्योपैथी, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा — तीनों में क्या-क्या मौजूद है
भारत में बवासीर का इलाज तीनों मान्यता-प्राप्त पद्धतियों में उपलब्ध है, और तीनों का अपना नियामक ढाँचा, अपनी शिक्षा-व्यवस्था और अपना प्रमाण-आधार है। नीचे की तालिका यह तुलना नहीं करती कि कौन बेहतर है — यह सिर्फ़ यह बताती है कि किस पद्धति में क्या साधन मौजूद हैं और वह किस अवस्था में सबसे अधिक काम आती है, ताकि आप अपने चिकित्सक से बेहतर सवाल पूछ सकें।
🗺️ चित्र 2 — लक्षण से दवा तक: होम्योपैथिक चयन का मानचित्र
होम्योपैथी में दवा बीमारी के नाम से नहीं, लक्षणों की तस्वीर से चुनी जाती है। नीचे का मानचित्र दिखाता है कि पाँच मुख्य लक्षण-रास्तों में से आप किस पर हैं, और उस रास्ते पर सबसे अधिक चुनी जाने वाली दवाएं कौन-सी हैं। हर दवा के आगे उसका क्रमांक दिया है — उसी नंबर के कार्ड में पूरी पोटेंसी, मात्रा और सावधानियाँ मिलेंगी।
❓ 40 दवाओं पर 40 सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल
नीचे हर दवा का वही सवाल है जो लोग असल में खोजते हैं — उपयोग, पोटेंसी, मात्रा और साइड इफेक्ट्स सहित। हर सवाल के नीचे सीधा जवाब दिया गया है, और “पूरा जवाब पढ़ें” पर क्लिक करते ही आप उस दवा के विस्तृत कार्ड पर पहुँच जाएँगे।
1Aesculus Hippocastanum Q, 30C व 200C बवासीर में कैसे काम करती है — फायदे, खुराक और सावधानियाँ?
Aesculus Hippocastanum 30C सूखी, खुजली-रहित पर बहुत दर्दनाक बवासीर की प्रमुख दवा है, जिसमें मलाशय में काँटे चुभने जैसा अहसास और कमर में टूटने जैसा दर्द रहता है। सामान्य मात्रा दिन में 3 बार, 4 से 6 हफ़्ते तक।
Aesculus में पोटेंसी का चुनाव शिकायत की उम्र से तय होता है। नई या हल्की तकलीफ़ में मदर टिंक्चर (Q) सबसे ज़्यादा दी जाती है, रोज़ाना के दर्द और कमर की जकड़न में 30C, और सालों पुरानी बवासीर में चिकित्सक 200C चुनते हैं। 30C पर 4 से 6 हफ़्ते का कोर्स सामान्य है। तेज़ दर्द के दिनों में 30C हर 3-4 घंटे पर दोहराई जा सकती है, पर 200C कभी रोज़ नहीं दी जाती।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | शुरुआती व हल्की शिकायत, नसों की सुस्ती | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | रोज़मर्रा की सूखी-दर्दनाक बवासीर व कमर दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व बार-बार लौटने वाली शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
2क़ब्ज़ के साथ बवासीर में Collinsonia Canadensis Q, 30C व 200C कब लेनी चाहिए?
Collinsonia Canadensis 30C तब चुनी जाती है जब ज़िद्दी सूखा क़ब्ज़ और बवासीर साथ-साथ चलें और मलाशय में रेत या तीलियाँ भरी होने का अहसास हो। गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर में यह विशेष फ़ायदेमंद मानी जाती है। मात्रा दिन में 3 बार।
Collinsonia की असली पहचान यह है कि क़ब्ज़ और बवासीर एक-दूसरे से बँधे हों। जहाँ मल की कठोरता मुख्य शिकायत हो वहाँ Q, और जहाँ मस्से व मलाशय में तीलियों जैसा अहसास भी हो वहाँ 30C चुनी जाती है। गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर में 30C ही प्रचलित है। 200C केवल चिकित्सक की देखरेख में, सप्ताह में एक बार।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | ज़िद्दी सूखा क़ब्ज़ प्रमुख हो | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | क़ब्ज़ + बवासीर साथ-साथ, गर्भावस्था की बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बरसों पुरानी क़ब्ज़ वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
3बैठे-बैठे काम और मसालेदार खाने से हुई बवासीर में Nux Vomica 6C, 30C व 200C कैसे लें?
Nux Vomica 30C उन लोगों की बवासीर के लिए पहली पसंद है जो दिनभर बैठकर काम करते हैं, तेज़ मसाला या शराब लेते हैं और जिन्हें बार-बार शौच की इच्छा होने पर भी मल अधूरा निकलता है। रात में सोने से पहले 1 खुराक सबसे असरदार मानी जाती है।
Nux Vomica की खुराक का समय पोटेंसी जितना ही अहम है — 30C की एक खुराक रात में सोने से पहले देने पर सबसे अच्छा असर देखा जाता है, क्योंकि यह दवा पाचन व मल-त्याग की लय पर काम करती है। बार-बार दोहराना हो तो 6C चुनी जाती है। 200C अपने आप शुरू न करें। कॉफ़ी, पुदीना व तंबाकू इसका असर सीधे काट देते हैं।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | रोज़ाना बार-बार दोहराने के लिए, हल्की शिकायत | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | अधूरा शौच, अंधी बवासीर, मसाले-शराब से बढ़ना | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार (रात की खुराक सबसे असरदार) |
| 200C | गहरी, बरसों पुरानी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
4बवासीर में जलन और खुजली हो तो Sulphur 30C व 200C के फायदे और नुकसान क्या हैं?
Sulphur 200C पुरानी व बार-बार लौटने वाली बवासीर में दी जाती है जहाँ गुदा के आसपास तेज़ जलन-खुजली हो, बिस्तर की गर्मी व नहाने से खुजली बढ़े और सुबह जल्दी शौच के लिए भागना पड़े। सामान्य मात्रा सप्ताह में एक बार।
Sulphur को बार-बार दोहराने की दवा नहीं माना जाता। हल्की शिकायत में 30C दिन में एक बार, और पुरानी लौट-लौटकर आने वाली जलन-खुजली में 200C सप्ताह में एक बार, 4 से 6 हफ़्ते तक दी जाती है। एक अहम नियम — अगर बवासीर से खून बह रहा हो तो Sulphur बार-बार नहीं दोहराई जाती, पहले खून रोकने वाली दवा चुनी जाती है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | हल्की व नई जलन-खुजली | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | पुरानी, बार-बार लौटने वाली बवासीर व त्वचा की शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
5बाहर निकले अंगूर जैसे मस्सों में Aloe Socotrina 6C, 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Aloe Socotrina 30C तब चुनी जाती है जब मस्से नीले-बैंगनी अंगूर के गुच्छे जैसे बाहर निकल आएँ, ठंडे पानी की सिकाई से साफ़ आराम मिले और मरीज़ को गैस के साथ मल निकल जाने का डर बना रहे। मात्रा दिन में 3 बार।
Aloe में सबसे पक्का संकेत ठंडे पानी की सिकाई से आराम मिलना है — यही एक बात इसे Muriaticum Acidum से अलग करती है। सामान्य उपयोग 30C दिन में 3 बार है, और तेज़ शिकायत वाले दिनों में हर 4 घंटे पर। जिन मरीज़ों को दिन में कई बार दवा चाहिए उनके लिए 6C ज़्यादा उपयुक्त है। 200C चिकित्सक की देखरेख में।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | लक्षण रोज़ बदलें, बार-बार दोहराना हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | बाहर निकले अंगूर जैसे मस्से, सुबह की तेज़ हाजत | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व बार-बार बाहर आने वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
6गैस और पेट फूलने के साथ बवासीर में Lycopodium 30C व 200C कब लेनी चाहिए?
Lycopodium Clavatum 200C उस बवासीर में दी जाती है जिसके साथ पेट फूलना, गैस और शाम 4 से 8 बजे के बीच तकलीफ़ का बढ़ना जुड़ा हो। थोड़ा खाते ही पेट भर जाना इसका पक्का संकेत है। सामान्य मात्रा सप्ताह में एक बार।
Lycopodium गहरी असर वाली दवा है, इसलिए इसे बहुत बार दोहराना ठीक नहीं माना जाता — एक खुराक को असर करने का समय देना चाहिए। रोज़ाना की गैस-अपच के लिए 30C दिन में 2 बार, और मूल शिकायत पर काम करने के लिए 200C सप्ताह में एक बार, 6 से 8 हफ़्ते। शाम 4 से 8 बजे तकलीफ़ बढ़ना इसका सबसे भरोसेमंद संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | रोज़ाना की गैस, अपच व क़ब्ज़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | गहरी व पुरानी शिकायत, बार-बार लौटने वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
7नीले मस्से और ज़्यादा गैस हो तो Carbo Vegetabilis 6C, 30C व 200C कैसे काम करती है?
Carbo Vegetabilis 30C तब चुनी जाती है जब मस्से नीले-बैंगनी और सूजे हुए हों, बहुत गैस बने, डकार से थोड़ा आराम मिले और मरीज़ को हवा-पंखे की सख़्त ज़रूरत महसूस हो। सामान्य मात्रा दिन में 3 बार।
Carbo Vegetabilis को शास्त्रीय ग्रंथों में उन मरीज़ों की दवा कहा गया है जिनकी ऊर्जा बीमारी के बाद लौटती ही नहीं। रोज़ाना की गैस व जलन के लिए 30C दिन में 3 बार सबसे प्रचलित है; तकलीफ़ ज़्यादा हो तो हर 4 घंटे पर। कमज़ोरी प्रमुख हो तो 200C सप्ताह में एक बार। चिकना व भारी खाना इसका असर कम करता है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | गैस व जलन के लिए बार-बार दोहराना हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | नीले मस्से, कमज़ोर पाचन, डकार से आराम | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | लंबी बीमारी के बाद की कमज़ोरी | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
8महिलाओं की बवासीर व नीचे खिंचाव में Sepia 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Sepia Officinalis 200C महिलाओं की उस बवासीर में दी जाती है जिसमें पेडू व गुदा में नीचे की ओर खिंचाव महसूस हो और मलाशय में गोला फँसा होने जैसा लगे। प्रसव के बाद व रजोनिवृत्ति के आसपास यह विशेष फ़ायदेमंद है। मात्रा सप्ताह में एक बार।
Sepia स्त्री-रोग से जुड़ी बवासीर की गहरी दवा है और इसे बार-बार दोहराने से बचा जाता है। रोज़मर्रा की तकलीफ़ में 30C दिन में 2 बार, और प्रसव के बाद या रजोनिवृत्ति के दौर की शिकायत में 200C सप्ताह में एक बार, 6 से 8 हफ़्ते तक। तेज़ चलने या नाचने जैसे व्यायाम से आराम मिलना इसका बहुत विशिष्ट संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | रोज़मर्रा का खिंचाव व भारीपन | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | प्रसव के बाद व रजोनिवृत्ति से जुड़ी बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
9गर्भावस्था की बवासीर में Pulsatilla 30C व 200C सुरक्षित है और 6C, 30C व 200C में से कौन-सी लें?
Pulsatilla Nigricans 30C उस बवासीर में चुनी जाती है जिसके लक्षण लगातार बदलते रहें, गर्म कमरे में तकलीफ़ बढ़े और खुली ठंडी हवा में आराम मिले। गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर में यह बहुत प्रयोग होती है। मात्रा दिन में 3 बार।
Pulsatilla में 30C सबसे प्रचलित व सुरक्षित पोटेंसी मानी जाती है और गर्भावस्था में भी यही चुनी जाती है — पर चिकित्सक की देखरेख में। 200C तब दी जाती है जब शिकायत हार्मोनल बदलाव से जुड़ी और पुरानी हो। सबसे पक्का संकेत यह है कि गर्म कमरे में तकलीफ़ बढ़े और खुली ठंडी हवा में आराम मिले। चिकना-तला खाना असर कम करता है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर, बदलते लक्षण | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | पुरानी व हार्मोनल बदलाव से जुड़ी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
10कठोर मस्सों से मल रुक जाए तो Causticum 30C व 200C कैसे मदद करती है?
Causticum 30C तब दी जाती है जब मस्से इतने बड़े और कठोर हो जाएँ कि मल का निकलना मुश्किल हो जाए, गर्म पानी की सिकाई से आराम मिले और खड़े होकर मल आसानी से निकले। सामान्य मात्रा दिन में 2 से 3 बार।
Causticum कठोर हो चुके मस्सों की दवा है और इसमें लंबा कोर्स लगता है — 30C दिन में 2 से 3 बार, कम से कम 4 हफ़्ते। बहुत पुराने मामलों में 200C सप्ताह में एक बार। एक व्यावहारिक बात — Coffea और Phosphorus के साथ इसे बहुत पास-पास नहीं दिया जाता, और कॉफ़ी इसका असर काटती है, इसलिए कोर्स के दौरान कॉफ़ी बंद रखें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | कठोर मस्से, मल में रुकावट, गर्म सिकाई से आराम | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | बहुत पुराने व कड़े मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
11खूनी बवासीर में Hamamelis Q, 6C व 30C कैसे लें — फायदे, मात्रा और सावधानियाँ?
Hamamelis Virginiana खूनी बवासीर की सबसे प्रमुख दवा है, ख़ासकर जब खून गहरा-काला हो, लगातार बहे और उसके बाद तेज़ कमज़ोरी महसूस हो। Q रूप में 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार, या 30C दिन में 3 बार दी जाती है।
Hamamelis में ऊँची पोटेंसी की आम तौर पर ज़रूरत नहीं पड़ती — खून बहने की स्थिति में Q और 30C ही सबसे ज़्यादा दी जाती हैं। खून सक्रिय हो तो Q हर 3-4 घंटे पर, और शांत होने पर दिन में 3 बार। जिन्हें बार-बार थोड़ा खून आता है उनके लिए 6C ज़्यादा उपयुक्त है। Q कभी सीधे न लें, हमेशा पानी में मिलाकर।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | सक्रिय रूप से खून बह रहा हो | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार; खून के दिनों में हर 3-4 घंटे पर |
| 6C | थोड़ा-थोड़ा खून बार-बार आता हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ कुचले जाने जैसा दर्द व फूली नसें | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
12चमकीला लाल खून बिना दर्द के आए तो Millefolium Q, 6C व 30C कब लेनी चाहिए?
Millefolium तब चुनी जाती है जब मस्सों से चमकीला लाल खून बिना ख़ास दर्द के बहे, खून पतला हो और आसानी से न जमे — अक्सर वज़न उठाने या ज़ोर लगाने के बाद। Q रूप में 5 से 10 बूँद पानी में दिन में 3 बार।
Millefolium मुख्यतः सक्रिय रक्तस्राव की दवा है — खून रुकने के बाद इसे लंबे समय तक जारी रखने की ज़रूरत नहीं होती। Q 5 से 10 बूँद पानी में दिन में 3 बार सबसे प्रचलित है, और 30C भी उतनी ही चलती है। ऊँची पोटेंसी यहाँ आम तौर पर नहीं दी जाती। खून पतला करने वाली कोई दवा चल रही हो तो चिकित्सक को ज़रूर बताएँ।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | चमकीला लाल खून सक्रिय रूप से बह रहा हो | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | ज़ोर लगाने या वज़न उठाने के बाद खून | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
13बार-बार खून जाने से कमज़ोरी हो तो Phosphorus 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Phosphorus 30C उन मरीज़ों में दी जाती है जिन्हें बार-बार, थोड़ा-थोड़ा पर चमकीला लाल खून जाता है जो आसानी से रुकता नहीं, और उससे पीलापन व कमज़ोरी बढ़ती जा रही हो। सामान्य मात्रा दिन में 2 से 3 बार।
Phosphorus को बहुत बार दोहराना ठीक नहीं माना जाता। सामान्य उपयोग 30C दिन में 2 से 3 बार, 3 से 4 हफ़्ते तक; खून सक्रिय हो तो हर 4 घंटे पर। 200C केवल चिकित्सक की देखरेख में, सप्ताह में एक बार। ठंडा पानी व ठंडी चीज़ों की तेज़ इच्छा और गुदा का खुला-खुला महसूस होना इसके सबसे भरोसेमंद संकेत हैं।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | बार-बार थोड़ा-थोड़ा खून, बढ़ती कमज़ोरी | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | गहरी व पुरानी रक्तस्राव की प्रवृत्ति | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
14खून के साथ जी मिचलाए तो Ipecacuanha 6C व 30C कैसे काम करती है?
Ipecacuanha 30C तब चुनी जाती है जब मस्सों से चमकीला लाल खून बहे और साथ में लगातार जी मिचलाता रहे, और उल्टी हो जाने पर भी मितली कम न हो। जीभ साफ़ रहना इसका विशिष्ट संकेत है। मात्रा हर 3-4 घंटे पर।
Ipecacuanha तात्कालिक (Acute) स्थिति की दवा है, लंबे कोर्स की नहीं। 30C हर 3 से 4 घंटे पर तब तक दी जाती है जब तक खून व मिचली कम न हो जाएँ, फिर दिन में 2 बार। बार-बार दोहराना हो तो 6C ज़्यादा उपयुक्त है। ऊँची पोटेंसी की यहाँ ज़रूरत नहीं पड़ती। जीभ साफ़ रहते हुए तेज़ मिचली इसका सबसे विशिष्ट संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | मिचली बनी रहे और बार-बार दवा चाहिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ लगातार जी मिचलाना | 2 बूँद या 4 गोली हर 3-4 घंटे पर |
15खून जाने पर चक्कर आएँ तो Trillium Pendulum Q, 6C व 30C कब लें?
Trillium Pendulum 30C तब फ़ायदेमंद मानी जाती है जब मस्सों से चमकीला लाल खून तेज़ी से बहे और उसी वजह से चक्कर, आँखों के आगे अंधेरा व बेहोशी जैसा महसूस हो। खून बहने के दौरान हर 3 घंटे पर 1 खुराक दी जाती है।
Trillium Pendulum भी मुख्यतः तात्कालिक स्थिति की दवा है। खून बहने के दौरान 30C हर 3 घंटे पर, और स्थिर होने पर दिन में 2 बार दी जाती है; Q भी उतनी ही प्रचलित है। कमर को कसकर बाँधने पर आराम मिलना इसका अनूठा संकेत है। चक्कर व बेहोशी जैसा लगना गंभीर है — दवा के साथ-साथ जाँच ज़रूर कराएँ।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | तेज़ बहता खून, तुरंत असर के लिए | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ चक्कर व बेहोशी जैसा | 2 बूँद या 4 गोली हर 3 घंटे पर |
16खून जाने के बाद की कमज़ोरी में China Officinalis 6C, 30C व 200C क्यों दी जाती है?
China Officinalis 30C खून बंद होने के बाद रह जाने वाली कमज़ोरी, पसीने, चक्कर और कानों में आवाज़ के लिए दी जाती है। यह खून रोकने की नहीं, बल्कि खून जाने के बाद शरीर को सँभालने की दवा है। मात्रा दिन में 3 बार।
China Officinalis खून रोकने की नहीं, बल्कि खून जाने के बाद शरीर को सँभालने की दवा है — इसलिए इसे तब शुरू किया जाता है जब रक्तस्राव थम चुका हो। 30C दिन में 3 बार, 2 से 3 हफ़्ते, जब तक ताक़त लौट न आए। हल्के स्पर्श से दर्द बढ़ना पर तेज़ दबाव से आराम मिलना इसका बहुत विशिष्ट लक्षण है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | रोज़ाना कमज़ोरी व पेट फूलना | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून जाने के बाद की थकान, पसीना, चक्कर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व गहरी कमज़ोरी | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
17खून की कमी व पीलेपन में Ferrum Metallicum 6X, 12X, 30C व 200C कैसे लें?
Ferrum Metallicum 30C उन मरीज़ों के लिए है जिन्हें बवासीर से लगातार खून जाने की वजह से खून की कमी हो गई हो — चेहरा पीला पर उत्तेजना पर अचानक लाल हो जाए और थोड़ी मेहनत पर हाँफी चढ़े। मात्रा दिन में 2 बार।
Ferrum Metallicum को कम पोटेंसी (6X/12X) में लंबे समय तक और 30C में 4 हफ़्ते के कोर्स के रूप में दिया जाता है। एक ख़ास बात — इस दवा के मरीज़ को आराम करने पर तकलीफ़ बढ़ती है और धीरे-धीरे टहलने पर आराम मिलता है। खून की कमी की पुष्टि जाँच से कराना ज़रूरी है, केवल लक्षणों पर निर्भर न रहें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X / 12X | लंबे समय तक बायोकेमिक शैली में | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | पीलापन, हाँफी, खून की कमी वाली बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
18शुरुआती लाल-सूजे मस्सों में Ferrum Phosphoricum 6X व 12X बायोकेमिक दवा कैसे लें?
Ferrum Phosphoricum 6X बवासीर की शुरुआती अवस्था की बायोकेमिक दवा है, जब मस्से लाल, गर्म व सूजे हुए हों और चमकीला लाल खून थोड़ा-थोड़ा आए। सामान्य मात्रा 4 गोलियाँ दिन में 3 से 4 बार, मुँह में घुलने दें।
Ferrum Phosphoricum शुस्लर की 12 टिश्यू सॉल्ट्स में से एक है और कम पोटेंसी वाली दवा होने के कारण इसे नियमित दोहराया जा सकता है। 6X मानक पोटेंसी है — 4 गोलियाँ दिन में 3 से 4 बार, और शुरुआती लाल-गर्म सूजन में हर 3 घंटे पर। यह दूसरी दवाओं के साथ सहायक रूप में भी चलाई जाती है। गोलियों का आधार दूध-शर्करा होता है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — शुरुआती सूजन व हल्का खून | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें; सूजन में हर 3 घंटे पर |
| 12X | थोड़ी लंबी अवधि के लिए | 4 गोली दिन में 3 बार |
19कठोर व गाँठदार अंदरूनी मस्सों में Calcarea Fluorica 6X, 12X व 30C कब लें?
Calcarea Fluorica 12X उन अंदरूनी मस्सों की बायोकेमिक दवा है जो कठोर, गाँठदार व पत्थर जैसे हो गए हों और जिनसे रुक-रुक कर खून आता हो। सामान्य मात्रा 4 गोलियाँ दिन में 3 बार, 6 से 8 हफ़्ते तक।
Calcarea Fluorica धीरे काम करने वाली दवा है — कठोर मस्सों में लंबा कोर्स ज़रूरी होता है और जल्दबाज़ी में इसे बदलना नहीं चाहिए। 12X मानक बायोकेमिक पोटेंसी है, 4 गोलियाँ दिन में 3 बार, 6 से 8 हफ़्ते तक। यह उन ऊतकों पर काम करती है जो ढीले पड़ गए हों — फूली नसें, ढीली गुदा-दीवार और पुरानी गाँठें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | हल्की व शुरुआती गाँठ | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें |
| 12X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — कठोर, गाँठदार मस्से | 4 गोली दिन में 3 बार, 6-8 हफ़्ते |
| 30C | शास्त्रीय शैली में | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
20बैंगनी मस्से गर्मी से बढ़ें तो Lachesis 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Lachesis Mutus 200C तब चुनी जाती है जब मस्से गहरे बैंगनी-नीले हों, छूने भर से तेज़ दर्द हो, गर्मी से तकलीफ़ बढ़े और नींद से उठने पर शिकायत ज़्यादा हो। सामान्य मात्रा सप्ताह में एक बार।
Lachesis गहरी असर वाली दवा है और इसे रोज़-रोज़ दोहराना ठीक नहीं माना जाता — 200C सप्ताह में एक बार, 4 से 6 हफ़्ते, केवल चिकित्सक की देखरेख में। हल्की शिकायत में 30C सप्ताह में दो बार। सबसे भरोसेमंद संकेत यह है कि खून निकल जाने के बाद कुछ राहत महसूस हो और नींद से उठने पर तकलीफ़ बढ़े।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | हल्की शिकायत | 2 बूँद या 4 गोली सप्ताह में दो बार |
| 200C | बैंगनी मस्से, गर्मी से बढ़ना, रजोनिवृत्ति का दौर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
21गुदा की दरार में Ratanhia Q, 30C व 200C कैसे लें — फ़िशर के दर्द में कितनी असरदार?
Ratanhia Peruviana 30C गुदा की दरार की प्रमुख दवा है, जहाँ शौच के समय टूटे काँच के टुकड़े चुभने जैसा दर्द हो और मल निकलने के बाद घंटों तक जलन बनी रहे। मात्रा दिन में 3 बार, 3 से 4 हफ़्ते।
Ratanhia में 30C सबसे प्रचलित है — दिन में 3 बार, 3 से 4 हफ़्ते; तेज़ जलन वाले दिनों में शौच के तुरंत बाद एक अतिरिक्त खुराक दी जाती है। Q का बाहरी उपयोग शास्त्रीय ग्रंथों में उल्लिखित है पर वह बिना सलाह न करें। सबसे ज़रूरी बात — दर्द के डर से शौच टालना दरार को और बढ़ाता है, इसलिए मल नरम रखना दवा जितना ही अहम है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 30C | शौच के बाद घंटों जलन, काँच चुभने जैसा दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | पुरानी व बार-बार खुलने वाली दरार | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
22पुरानी दरार और गुदा के मस्सों में Acidum Nitricum 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Acidum Nitricum 30C पुरानी, ठीक न होने वाली गुदा-दरार की दवा है जिसमें किरच चुभने जैसा दर्द शौच के बाद घंटों बना रहे, चमकीला लाल खून आए और स्राव बहुत बदबूदार हो। मात्रा दिन में 2 से 3 बार।
Acidum Nitricum में Q का उपयोग नहीं किया जाता। 30C दिन में 2 से 3 बार, 4 से 6 हफ़्ते — पुरानी दरार में लंबा कोर्स लगता है। 200C बहुत ज़िद्दी मामलों में सप्ताह में एक बार, चिकित्सक की देखरेख में। एक अनूठा संकेत यह है कि गाड़ी या ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से आराम मिलता है। अम्ल-वर्ग की दवा होने के कारण तेज़ गंध व पुदीने से दूरी रखें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | पुरानी दरार, किरच जैसा दर्द, बदबूदार स्राव | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | बहुत ज़िद्दी दरार व गुदा के मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
23दरार के साथ चिपचिपा स्राव हो तो Graphites 6C, 30C व 200C कैसे काम करती है?
Graphites 30C उस दरार व बवासीर में दी जाती है जिसमें गुदा के आसपास से गाढ़ा, चिपचिपा, शहद जैसा स्राव निकले, त्वचा फटी-फटी रहे और साथ में ज़िद्दी क़ब्ज़ हो। सामान्य मात्रा दिन में 2 बार।
Graphites में सुधार धीरे-धीरे आता है, इसलिए 30C दिन में 2 बार, 6 से 8 हफ़्ते तक चलाई जाती है। पुरानी त्वचा-शिकायत साथ हो तो 200C सप्ताह में एक बार। शुरुआत के कुछ दिनों में त्वचा के दाने थोड़े बढ़ सकते हैं। मोटापे की ओर झुके, ठंड बर्दाश्त न कर पाने वाले मरीज़ों में यह दवा सबसे सटीक बैठती है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | चिपचिपा शहद जैसा स्राव, फटी त्वचा, क़ब्ज़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | पुरानी त्वचा व दरार की शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
24ज़ख़्म बन चुकी दरार और घाव वाले मस्सों में Paeonia Q, 6C व 30C कब लें?
Paeonia Officinalis 30C तब चुनी जाती है जब दरार या मस्सा घाव में बदल चुका हो, बदबूदार स्राव निकले और गुदा में कोई नुकीली चीज़ अटकी होने जैसा लगे। रात में जलन बढ़ना इसका संकेत है। मात्रा दिन में 3 बार।
Paeonia में 30C सबसे प्रचलित है — दिन में 3 बार, 4 हफ़्ते तक। Q का बाहरी उपयोग शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता है, पर वह चिकित्सक ही तय करें। यह दवा तब चुनी जाती है जब दरार या मस्सा ज़ख़्म में बदल चुका हो और आसपास की त्वचा गीली व बैंगनी हो। घाव के साथ बुख़ार या फैलती सूजन हो तो देर न करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | ज़ख़्मी दरार, घाव बने मस्से, रात में जलन | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
25सूखे-कठोर मल से बनी दरार में Natrum Muriaticum 6X, 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Natrum Muriaticum 200C उस दरार की दवा है जहाँ मल इतना सूखा व कठोर हो कि निकलते समय गुदा को फाड़ दे और उसके बाद घंटों जलन बनी रहे। नमक की तेज़ इच्छा इसका सहायक संकेत है। मात्रा सप्ताह में एक बार।
Natrum Muriaticum को बार-बार दोहराना ठीक नहीं माना जाता। गहरी व पुरानी दरार में 200C सप्ताह में एक बार, 6 से 8 हफ़्ते; रोज़मर्रा की तकलीफ़ में 30C दिन में एक बार। एक व्यावहारिक बात — पानी और रेशेदार भोजन बढ़ाए बिना सूखे मल से बनी दरार पूरी तरह ठीक नहीं होती, इसलिए दवा के साथ खान-पान सुधारना ज़रूरी है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | बायोकेमिक शैली में, लंबे समय तक | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | रोज़मर्रा की जलन व सूखा कठोर मल | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | गहरी व पुरानी दरार, नमक की तेज़ इच्छा | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
26शौच के बाद घंटों दर्द रहे तो Sedum Acre Q व 30C कैसे लें?
Sedum Acre तब चुनी जाती है जब गुदा-दरार का कसाव भरा दर्द शौच के बाद घंटों — कभी पूरे दिन — बना रहे और मरीज़ ठीक से बैठ भी न पाए। Q रूप में 5 बूँद पानी में दिन में 3 बार, या 30C दिन में 3 बार।
Sedum Acre अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल होने वाली पर लक्षण मिलने पर बहुत कारगर दवा है। Q और 30C दोनों प्रचलित हैं और कम पोटेंसी में इसे बार-बार दोहराया जा सकता है — सामान्य कोर्स 4 हफ़्ते। इसका सबसे विशिष्ट संकेत यह है कि दर्द कसाव वाला हो, जैसे गुदा की मांसपेशी जकड़ गई हो, और शौच के बाद घंटों बना रहे।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | कसाव भरा लगातार दर्द, गुदा की जकड़न | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | पुरानी दरार जो बार-बार खुल जाए | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
27छूने भर से दर्द करने वाले नीले मस्सों में Muriaticum Acidum 6C, 30C व 200C कब लें?
Muriaticum Acidum 30C तब दी जाती है जब मस्से इतने संवेदनशील हो जाएँ कि हल्का स्पर्श भी बर्दाश्त न हो, गहरे नीले-बैंगनी दिखें और गर्म सिकाई से आराम मिले। पेशाब करते समय मस्सों का बाहर आना इसका विशिष्ट संकेत है।
Muriaticum Acidum में 30C सबसे प्रचलित है — दिन में 3 बार, और तेज़ दर्द वाले दिनों में हर 4 घंटे पर। इसका निर्णायक संकेत गर्म सिकाई से आराम मिलना है; अगर ठंडे पानी से आराम मिलता हो तो Aloe ज़्यादा उपयुक्त बैठेगी। पेशाब करते समय मस्सों का बाहर आ जाना इस दवा का बहुत अनूठा लक्षण है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | छूने भर से दर्द, नीले-बैंगनी सूजे मस्से | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
28गुदा में आग जैसी जलन हो तो Capsicum 6C, 30C व 200C कैसे काम करती है?
Capsicum Annuum 30C उस बवासीर में दी जाती है जहाँ गुदा में आग लगने जैसी जलन हो, शौच के दौरान व बाद में मिर्च लगी जैसी अनुभूति हो और बार-बार मरोड़ उठने पर भी मल थोड़ा-सा ही निकले। मात्रा दिन में 3 बार।
Capsicum में 30C सामान्य उपयोग की पोटेंसी है — दिन में 3 बार, और तेज़ जलन में हर 4 घंटे पर आराम मिलने तक। बार-बार दोहराना हो तो 6C। एक व्यावहारिक सच्चाई यह है कि तेज़ मिर्च-मसाला बंद किए बिना इस दवा का पूरा असर नहीं मिलता। ठंडा पानी पीते ही कँपकँपी छूटना इसका बहुत विशिष्ट संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | आग जैसी जलन व शौच की बार-बार मरोड़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; तेज़ जलन में हर 4 घंटे पर |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
29तनाव के बाद हुई बवासीर में Ignatia 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Ignatia Amara 200C तब चुनी जाती है जब दर्द मलाशय से ऊपर की ओर सुई चुभने जैसा चढ़े, नरम मल निकालने में तकलीफ़ हो पर कठोर मल आसानी से निकले, और तकलीफ़ किसी शोक या लंबे तनाव के बाद शुरू हुई हो।
Ignatia में पोटेंसी का चुनाव इस बात से तय होता है कि जड़ शारीरिक है या भावनात्मक। तनाव, शोक या आघात के बाद शुरू हुई बवासीर में 200C सप्ताह में एक-दो बार, 4 हफ़्ते तक; और जहाँ शारीरिक लक्षण प्रमुख हों वहाँ 30C दिन में एक बार। कॉफ़ी और तेज़ ख़ुशबू इसके असर को सीधे कम करती हैं, इसलिए कोर्स के दौरान इनसे बचें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | शारीरिक लक्षण प्रमुख हों | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | शोक, आघात या तनाव के बाद शुरू हुई शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक या दो बार |
30बड़े मस्सों के साथ कमर दर्द हो तो Kali Carbonicum 30C व 200C कब लें?
Kali Carbonicum 30C उन बड़े, सूजे व चुभन भरे मस्सों की दवा है जिनके साथ पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द रहता है और मरीज़ रात 2 से 4 बजे के बीच तकलीफ़ से जाग जाता है। मात्रा दिन में 2 से 3 बार।
Kali Carbonicum में 30C दिन में 2 से 3 बार, 4 से 6 हफ़्ते तक दी जाती है, और कमर का दर्द ज़्यादा हो तो रात में एक अतिरिक्त खुराक। बहुत ऊँची पोटेंसी में इसे सावधानी से दिया जाता है, इसलिए 200C चिकित्सक ही तय करें। रात 2 से 4 बजे के बीच तकलीफ़ से जाग जाना इसका सबसे भरोसेमंद समय-संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | बड़े चुभन भरे मस्से व कमर दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार; कमर दर्द में रात को एक अतिरिक्त खुराक |
| 200C | पुरानी व गहरी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
31भगंदर (फ़िस्टुला) में Silicea 6X, 30C व 200C कैसे लें — कितने दिन में असर दिखता है?
Silicea Terra 30C भगंदर की प्रमुख दवाओं में से एक है, जहाँ गुदा के पास बना घाव बार-बार भरकर फिर फूट जाए और पतली पीप निकलती रहे। मात्रा दिन में 2 बार; भगंदर में 6 से 8 हफ़्ते का लंबा कोर्स लगता है।
Silicea भगंदर की प्रमुख दवाओं में है और इसमें लंबा कोर्स ज़रूरी होता है — 30C दिन में 2 बार, 6 से 8 हफ़्ते। 6X भी बायोकेमिक शैली में उतनी ही प्रचलित है। एक अहम सावधानी — शरीर में कोई प्रत्यारोपण, स्क्रू, प्लेट या धातु मौजूद हो तो दवा शुरू करने से पहले चिकित्सक को अवश्य बताएँ। मल आधा बाहर आकर वापस चला जाना इसका विशिष्ट संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | बायोकेमिक शैली में, लंबे समय तक | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | भगंदर, पतली पीप, धीरे भरने वाला घाव | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार, 6-8 हफ़्ते |
| 200C | चुनिंदा गहरे मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
32गुदा के फोड़े में Hepar Sulphuris की 6X, 12X व 200C में से कौन-सी पोटेंसी लेनी चाहिए?
Hepar Sulphuris Calcareum में पोटेंसी का चुनाव नतीजा तय करता है — ऊँची पोटेंसी (200C) फोड़े को बनने से पहले रोकने के लिए और कम पोटेंसी (6X) पीप को बाहर निकालने के लिए दी जाती है। फोड़ा छूने या हवा लगने तक बर्दाश्त न होना इसका संकेत है।
Hepar Sulphuris का सबसे अहम सिद्धांत यह है कि पोटेंसी की दिशा उल्टी काम करती है — ऊँची पोटेंसी (200C) फोड़े को बनने से पहले रोकती है, जबकि कम पोटेंसी (6X/12X) पीप को बाहर निकालने में मदद करती है। इसलिए यह दवा ख़ुद से नहीं चुननी चाहिए, पोटेंसी चिकित्सक ही तय करें। फोड़े का छूने या हवा लगने तक बर्दाश्त न होना इसका निर्णायक संकेत है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X / 12X | पीप को बाहर निकालने के लिए (फोड़ा पक चुका हो) | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें |
| 200C | फोड़े को बनने से पहले रोकने के लिए | 1 खुराक दिन में 2 बार, 3-4 दिन |
33भगंदर से लगातार पीप बहे तो Calcarea Sulphurica 6X, 12X व 30C कब लें?
Calcarea Sulphurica 6X तब दी जाती है जब फोड़ा फूट चुका हो और उसमें से पीली, गाढ़ी पीप लगातार निकलती रहे पर घाव भरे ही नहीं। सामान्य मात्रा 4 गोलियाँ दिन में 3 से 4 बार, 6 हफ़्ते तक।
Calcarea Sulphurica का सही समय तब है जब फोड़ा फूट चुका हो और रास्ता खुल गया हो, पर सफ़ाई व भरने की प्रक्रिया अटकी हो। यही बात इसे Hepar Sulphuris से अलग करती है, जो पीप बनने या निकालने के चरण की दवा है। 6X मानक पोटेंसी है — 4 गोलियाँ दिन में 3 से 4 बार, 6 हफ़्ते या घाव भरने तक।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — फूटे फोड़े से बहती पीप | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें, 6 हफ़्ते |
| 12X | थोड़ी लंबी अवधि के लिए | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | शास्त्रीय शैली में | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
34Myristica Sebifera को 'होम्योपैथिक चाकू' क्यों कहा जाता है और कैसे लें?
Myristica Sebifera 30C को शास्त्रीय ग्रंथों में 'Homoeopathic Knife' कहा गया है क्योंकि पीप भरे फोड़े को खोलने व साफ़ करने में इसका असर तेज़ माना जाता है। गुदा के पास धड़कते दर्द वाले फोड़े में मात्रा दिन में 3 बार।
Myristica Sebifera तेज़ असर वाली दवा है, इसे बिना सलाह लंबे समय तक नहीं चलाना चाहिए। 30C दिन में 3 बार, 2 से 3 हफ़्ते या फोड़ा साफ़ होने तक। शास्त्रीय ग्रंथों में इसे Hepar Sulphuris और Silicea के मुक़ाबले ज़्यादा तेज़ बताया गया है, इसीलिए इसे 'Homoeopathic Knife' कहा जाता है। फोड़ा जल्दी पक कर खुल सकता है, यह अपेक्षित प्रतिक्रिया है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | पीप भरा फोड़ा, धड़कता दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार, 2-3 हफ़्ते |
| 200C | चुनिंदा मामले — चिकित्सक की सलाह पर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
35भगंदर का दर्द कमर-जाँघ तक फैले तो Berberis Vulgaris Q, 6C व 30C कैसे लें?
Berberis Vulgaris तब चुनी जाती है जब भगंदर या गुदा के आसपास का दर्द एक जगह टिकने के बजाय कमर, जाँघ व पेडू तक फैल जाए। Q रूप में 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार, या 30C दिन में 3 बार।
Berberis Vulgaris अपेक्षाकृत सुरक्षित और लंबे समय तक चलाई जा सकने वाली दवा मानी जाती है। Q 10 बूँद पानी में दिन में 3 बार और 30C दिन में 3 बार — दोनों बहुत प्रचलित हैं, सामान्य कोर्स 4 हफ़्ते। इसका निर्णायक संकेत यह है कि दर्द एक जगह टिकता नहीं, बल्कि वहाँ से कमर, जाँघ व पेडू तक फैल जाता है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | फैलता हुआ दर्द व कमर का भारीपन | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | भगंदर व गुदा के आसपास जलन-खुजली | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
36गुदा के मस्सों और दानेदार उभारों में Thuja Q, 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Thuja Occidentalis 200C गुदा के आसपास उभरे फूलगोभी जैसे दानेदार मस्सों (Condylomata) की प्रमुख दवा है, जिनके साथ लगातार गीलापन, खुजली और बदबूदार स्राव रहता है। सामान्य मात्रा सप्ताह में एक बार, 6 से 8 हफ़्ते।
Thuja में 200C सबसे प्रचलित है — सप्ताह में एक बार, 6 से 8 हफ़्ते तक, और इसे बार-बार दोहराना ठीक नहीं। शुरुआती व हल्की शिकायत में 30C दिन में एक बार। Q का बाहरी उपयोग शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता है पर वह केवल चिकित्सक की सलाह से करें। मस्से तेज़ी से बढ़ें, खून आए या रंग बदले तो तुरंत जाँच कराएँ।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 30C | शुरुआती व हल्के मस्से | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | पुराने, गीले व बदबूदार दानेदार मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार, 6-8 हफ़्ते |
37रात में जलन व बेचैनी बढ़े तो Arsenicum Album 6C, 30C व 200C कैसे काम करती है?
Arsenicum Album 30C उस बवासीर में दी जाती है जहाँ गुदा में अंगारे जैसी जलन हो पर गर्म सिकाई से आराम मिले, तकलीफ़ आधी रात के बाद बढ़े और मरीज़ बेचैनी से एक जगह टिक न पाए। मात्रा दिन में 3 बार।
Arsenicum Album गहरी असर वाली दवा है, इसे लंबे समय तक बिना सलाह नहीं चलाना चाहिए। 30C दिन में 3 बार, और तेज़ जलन-बेचैनी में हर 4 घंटे पर। 200C चिकित्सक की देखरेख में, सप्ताह में एक बार। इसका सबसे निर्णायक संकेत विरोधाभासी है — जलन अंगारे जैसी तेज़, फिर भी आराम गर्म सिकाई से मिलता है, ठंडी से नहीं।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | जलन के साथ बेचैनी, आधी रात के बाद बढ़ना | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; तेज़ जलन में हर 4 घंटे पर |
| 200C | पुरानी व गहरी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
38मलाशय बाहर निकल आए तो Podophyllum 6C, 30C व 200C कब लेनी चाहिए?
Podophyllum Peltatum 30C तब चुनी जाती है जब शौच के दौरान या बाद में मलाशय ही बाहर निकल आए और साथ में सुबह-सुबह के तेज़, बदबूदार व बिना दर्द के दस्त हों। मात्रा दिन में 3 बार।
Podophyllum में 30C सबसे प्रचलित है — दिन में 3 बार, और दस्त सक्रिय हों तो हर 3 से 4 घंटे पर, स्थिर होने तक। बच्चों व गर्भावस्था में यह केवल चिकित्सक की सलाह से दी जाती है। दस्त लंबे चलें तो पानी की कमी से बचाव ज़रूरी है। सूरज निकलने से पहले के बदबूदार, बिना दर्द के दस्त इसका सबसे विशिष्ट समय-संकेत हैं।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | मलाशय बाहर आना व सुबह के तेज़ दस्त | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; दस्त में हर 3-4 घंटे पर |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
39माहवारी में बवासीर बढ़ जाए तो Ammonium Carbonicum 6C, 30C व 200C कैसे लें?
Ammonium Carbonicum 30C उन महिलाओं के लिए है जिनकी बवासीर माहवारी के दिनों में साफ़ तौर पर बढ़ जाती है — मस्से बाहर निकल आते हैं, जलन बढ़ती है और हल्का खून आने लगता है। माहवारी से 2-3 दिन पहले शुरू करना अधिक फ़ायदेमंद माना जाता है।
Ammonium Carbonicum में 30C सबसे प्रचलित है — दिन में 2 से 3 बार। सबसे फ़ायदेमंद तरीक़ा यह माना जाता है कि दवा माहवारी शुरू होने से 2-3 दिन पहले से देना शुरू करें, ताकि उन दिनों में मस्सों का उभरना और जलन कम रहे। गीले-नम मौसम में तकलीफ़ बढ़ना और थोड़ी मेहनत पर हाँफी चढ़ना इसके सहायक संकेत हैं।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | माहवारी के दिनों में बढ़ने वाली बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार; माहवारी से 2-3 दिन पहले शुरू करें |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
40गुदा से बलगम जैसा स्राव आए तो Antimonium Crudum 6C, 30C व 200C क्यों दी जाती है?
Antimonium Crudum 30C उस बवासीर व दरार में दी जाती है जिसमें गुदा से लगातार बलगम जैसा स्राव निकले और आसपास की त्वचा फटी व खुरदरी हो जाए। जीभ पर मोटी सफ़ेद परत इसकी सबसे पक्की पहचान है। मात्रा दिन में 2 से 3 बार।
Antimonium Crudum में 30C सामान्य उपयोग की पोटेंसी है — दिन में 2 से 3 बार, 3 से 4 हफ़्ते। इस दवा के साथ खान-पान में संयम अनिवार्य है, क्योंकि ज़्यादा या चिकना खाना इसका असर सीधे काट देता है। जीभ पर जमी मोटी सफ़ेद परत इसकी सबसे पक्की पहचान है, और मल का बारी-बारी कड़ा व पतला आना इसे और पक्का करता है।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | बलगम जैसा स्राव व फटी गुदा-त्वचा | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | पुरानी त्वचा-शिकायत — चिकित्सक की सलाह पर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
🎯 भाग 1 — बवासीर की होम्योपैथिक दवा: आम व पुरानी बवासीर की 10 दवाएँ
आम और पुरानी शिकायत में बवासीर की होम्योपैथिक दवा चुनते समय सबसे पहले यह देखा जाता है कि तकलीफ़ किस बात से बढ़ती है और किस से घटती है — गर्मी, ठंडक, बैठना, या दिन का कोई ख़ास समय।
नीचे दी 10 दवाएँ वो हैं जो बवासीर का होम्योपैथिक इलाज शुरू करते समय सबसे ज़्यादा काम आती हैं। यहाँ बवासीर की होम्योपैथिक दवा के साथ क़ब्ज़ सुधारना उतना ही ज़रूरी है, वरना असर आधा रह जाता है।
मस्से, भारीपन, खुजली, क़ब्ज़ के साथ बवासीर और बैठे-बैठे काम करने वालों की तकलीफ़।
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Aesculus Hippocastanum — सूखी व दर्दनाक बवासीर की होम्योपैथिक दवा
Horse Chestnut / अश्वकर्ण — घोड़ा चेस्टनट
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Q30C200C |
- मलाशय में लकड़ी की तीलियाँ/काँटे चुभने जैसा अहसास (Sticks Or Splinters)
- बैंगनी रंग के सूखे मस्से — खुजली न के बराबर, खून बहुत कम
- शौच के बाद 1-2 घंटे तक जलन व दर्द बना रहना
- कमर व कूल्हे (Lumbosacral) में टूटने जैसा दर्द, चलने-झुकने से बढ़े
- मल कठोर, सूखा, टुकड़ों में — निकलने के बाद भी अधूरापन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | शुरुआती व हल्की शिकायत, नसों की सुस्ती | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | रोज़मर्रा की सूखी-दर्दनाक बवासीर व कमर दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व बार-बार लौटने वाली शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: पके हुए बीज की गिरी (Ripe Seed Kernel)
- दवा चलने के दौरान तेज़ मसाला, अत्यधिक कॉफ़ी व शराब से परहेज़ ज़रूरी है, वरना असर दब जाता है।
- Q रूप कुछ लोगों में हल्की पेट-जलन कर सकता है, इसलिए इसे पानी में मिलाकर ही लें।
- ख़ुद पोटेंसी बढ़ाकर 200C पर न जाएँ।
Local/Hindi: सूखी बवासीर, बिना खून वाले मस्से, कमर दर्द के साथ बवासीर, अंगूर जैसे मस्से
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Collinsonia Canadensis — क़ब्ज़ के साथ बवासीर की होम्योपैथिक दवा
Stone Root / कॉलिन्सोनिया — पत्थर जड़
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Q30C200C |
- मलाशय में रेत या नुकीली तीलियाँ भरी होने का अहसास
- बहुत सूखा, कठोर, गाँठदार मल — ज़ोर लगाने पर ही निकले
- गर्भावस्था व डिलीवरी के बाद उभरी बवासीर
- बवासीर और दिल की धड़कन (Palpitation) का बारी-बारी से बढ़ना
- गुदा में खुजली व चुभन, शौच के बाद भारीपन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | ज़िद्दी सूखा क़ब्ज़ प्रमुख हो | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | क़ब्ज़ + बवासीर साथ-साथ, गर्भावस्था की बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बरसों पुरानी क़ब्ज़ वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: ताज़ा जड़ (Fresh Root)
- गर्भावस्था में इसे केवल चिकित्सक की देखरेख में लें।
- शुरुआती कुछ दिनों में मल-त्याग की आदत बदल सकती है, यह सामान्य है।
- क़ब्ज़ की दूसरी दवा साथ चल रही हो तो चिकित्सक को बताएँ।
Local/Hindi: क़ब्ज़ वाली बवासीर, प्रेगनेंसी में बवासीर, कड़ा मल और मस्से
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Nux Vomica — बैठे-बैठे काम व मसालेदार खाने से हुई बवासीर की दवा
Poison Nut / कुचला — नक्स वोमिका
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6C30C200C |
- बार-बार शौच की इच्छा पर मल अधूरा निकलना (Ineffectual Urging)
- अंधी बवासीर — खुजली, जलन व भारीपन, खून कम या न के बराबर
- बैठे रहने, मसाला, शराब, कॉफ़ी व देर रात जागने से बढ़ना
- ठंडे पानी की सिकाई से आराम, गर्मी से बढ़ना
- पेट में भारीपन, गैस व सुबह उठने पर चिड़चिड़ापन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | रोज़ाना बार-बार दोहराने के लिए, हल्की शिकायत | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | अधूरा शौच, अंधी बवासीर, मसाले-शराब से बढ़ना | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार (रात की खुराक सबसे असरदार) |
| 200C | गहरी, बरसों पुरानी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: सूखे पके बीज (Dried Ripe Seeds)
- कॉफ़ी, तेज़ पुदीना और तंबाकू इसका असर काट देते हैं — इनसे परहेज़ ज़रूरी है।
- शुरुआत में नींद या मल-त्याग का समय बदल सकता है।
- 200C ख़ुद से शुरू न करें, यह चिकित्सक तय करते हैं।
Local/Hindi: अंधी बवासीर, बैठे-बैठे बवासीर, मसालेदार खाने से बवासीर, अधूरा शौच
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
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Sulphur — जलन व खुजली वाली पुरानी बवासीर की दवा
Sublimated Sulphur / गंधक — सल्फर
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30C200C |
- गुदा के आसपास तेज़ जलन व खुजली, ख़ासकर रात में व बिस्तर की गर्मी में
- गुदा व मस्से लाल, गर्म व सूजे हुए
- सुबह जल्दी (5 बजे के आसपास) शौच के लिए भागना पड़ना
- पानी से धोने पर खुजली का बढ़ना
- साथ में त्वचा की पुरानी खुजली या दाने
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | हल्की व नई जलन-खुजली | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | पुरानी, बार-बार लौटने वाली बवासीर व त्वचा की शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध किया हुआ ऊर्ध्वपातित गंधक (Sublimated Sulphur)
- शुरुआती कुछ दिनों में खुजली या त्वचा के दाने थोड़े बढ़ सकते हैं — यह सामान्य प्रतिक्रिया मानी जाती है, पर बहुत बढ़े तो दवा रोककर चिकित्सक से मिलें।
- बवासीर से खून बह रहा हो तो Sulphur बार-बार दोहराना ठीक नहीं।
- त्वचा रोग साथ हो तो चिकित्सक को ज़रूर बताएँ।
Local/Hindi: बवासीर में खुजली, गुदा में जलन, पुरानी बवासीर, मस्सों में जलन
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਖੁਜਲੀ (Punjabi) · गुदद्वाराची खाज (Marathi) · ગુદામાં ખંજવાળ (Gujarati) · পায়ুতে চুলকানি (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Aloe Socotrina — अंगूर के गुच्छे जैसे बाहरी मस्सों की दवा
Socotrine Aloes / एलोवेरा (मुसब्बर) — एलो
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6C30C200C |
- नीले-बैंगनी, अंगूर के गुच्छे जैसे बाहर निकले मस्से
- ठंडे पानी की सिकाई से स्पष्ट आराम
- गुदा पर भरोसा न रहना — गैस के साथ मल निकल जाने का डर
- सुबह उठते ही तेज़ हाजत, तुरंत भागना पड़े
- गुदा में भारीपन व लगातार गीलापन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | लक्षण रोज़ बदलें, बार-बार दोहराना हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | बाहर निकले अंगूर जैसे मस्से, सुबह की तेज़ हाजत | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व बार-बार बाहर आने वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: पत्तियों से निकला सुखाया हुआ रस (Inspissated Juice)
- शुरुआत में मल-त्याग की संख्या कुछ दिन बढ़ सकती है।
- पहले से दस्त की शिकायत हो तो चिकित्सक की सलाह के बिना न लें।
- गर्म सिकाई से आराम मिलता हो तो यह दवा आपके लक्षणों से मेल नहीं खाती।
Local/Hindi: बाहर निकले मस्से, अंगूर जैसी बवासीर, ठंडे पानी से आराम, सुबह की हाजत
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
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| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
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Lycopodium Clavatum — गैस व पेट फूलने के साथ बवासीर की दवा
Club Moss / नागबेल — लाइकोपोडियम
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30C200C |
- पेट फूलना व गैस — बवासीर के साथ हमेशा जुड़ी हुई
- शाम 4 से 8 बजे के बीच तकलीफ़ का बढ़ना
- थोड़ा खाते ही पेट भरना, फिर भी भूख का बने रहना
- मल पहले कठोर फिर नरम; शौच के समय गुदा में सिकुड़न
- दाईं तरफ़ की शिकायत, गर्म पेय से आराम
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | रोज़ाना की गैस, अपच व क़ब्ज़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | गहरी व पुरानी शिकायत, बार-बार लौटने वाली बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: बीजाणु चूर्ण (Spores / Pollen Powder)
- इसे बहुत बार दोहराना ठीक नहीं — एक खुराक को असर करने का समय देना चाहिए।
- शुरुआत में गैस कुछ दिन बढ़ सकती है।
- 200C चिकित्सक की सलाह से ही शुरू करें।
Local/Hindi: गैस के साथ बवासीर, पेट फूलने वाली बवासीर, शाम को बढ़ने वाली तकलीफ़
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| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
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Carbo Vegetabilis — गैस, जलन व नीले मस्सों वाली बवासीर की दवा
Vegetable Charcoal / वनस्पति कोयला — कार्बो वेज
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6C30C200C |
- नीले-बैंगनी, सूजे हुए व जलन वाले मस्से
- बहुत ज़्यादा गैस — डकार आने पर थोड़ा आराम
- गुदा में जलन के साथ खुजली व गीलापन
- पंखे-हवा की सख़्त ज़रूरत महसूस होना
- कमज़ोरी, थकावट व चिकना-भारी खाना न पचना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | गैस व जलन के लिए बार-बार दोहराना हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | नीले मस्से, कमज़ोर पाचन, डकार से आराम | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | लंबी बीमारी के बाद की कमज़ोरी | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध वनस्पति चारकोल (Purified Vegetable Charcoal)
- चिकना व भारी खाना इसके असर को कम करता है।
- बहुत कमज़ोरी हो तो पोटेंसी और अवधि चिकित्सक तय करें।
- लंबे समय तक बिना सलाह न चलाएँ।
Local/Hindi: नीले मस्से, गैस वाली बवासीर, जलन वाली बवासीर, कमज़ोर पाचन
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Sepia Officinalis — महिलाओं की बवासीर व नीचे खिंचाव की दवा
Cuttlefish Ink / समुद्रफेनी की स्याही — सीपिया
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30C200C |
- पेडू व गुदा में नीचे की ओर खिंचाव — पैर दबाकर बैठना पड़े
- मलाशय में गेंद या गोला फँसा होने का अहसास
- गर्भावस्था के बाद व रजोनिवृत्ति के आसपास उभरी बवासीर
- मल कठोर, बार-बार ज़ोर लगाने पर भी अधूरा
- तेज़ चलने या नाचने जैसे व्यायाम से आराम
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | रोज़मर्रा का खिंचाव व भारीपन | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | प्रसव के बाद व रजोनिवृत्ति से जुड़ी बवासीर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: स्याही थैली का सूखा रस (Dried Ink / Liquid Of Ink Bag)
- बार-बार दोहराने से बचें — यह गहरी असर वाली दवा है।
- शुरुआत में उदासी या थकान कुछ दिन बढ़ सकती है।
- गर्भावस्था में केवल चिकित्सक की देखरेख में लें।
Local/Hindi: महिलाओं की बवासीर, डिलीवरी के बाद बवासीर, नीचे खिंचाव, गोला फँसना
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| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
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| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Pulsatilla Nigricans — गर्भावस्था व बदलते लक्षणों वाली बवासीर की दवा
Wind Flower / पल्सेटिला — पवन पुष्प
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30C200C |
- लक्षणों का लगातार बदलते रहना — कोई एक तस्वीर न बनना
- गर्म कमरे में बढ़ना, खुली ठंडी हवा में आराम
- गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर, खुजली प्रमुख
- प्यास बहुत कम, चिकना-तला खाना न पचना
- मस्सों में चुभन के साथ रात में बेचैनी
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | गर्भावस्था व प्रसव के बाद की बवासीर, बदलते लक्षण | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | पुरानी व हार्मोनल बदलाव से जुड़ी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: फूल आने के समय का पूरा ताज़ा पौधा (Whole Fresh Plant In Flower)
- गर्भावस्था में कोई भी दवा — होम्योपैथिक सहित — बिना चिकित्सक की सलाह के शुरू न करें।
- चिकना-तला खाना इसके असर को कम करता है।
- भावनाओं में उतार-चढ़ाव कुछ दिन बढ़ सकता है।
Local/Hindi: प्रेगनेंसी में बवासीर, बदलते लक्षण वाली बवासीर, गर्मी में बढ़ने वाली बवासीर
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| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
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| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
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Causticum — कठोर मस्सों व मल रुक जाने की दवा
Potassium Hydrate / कॉस्टिकम — तीक्ष्ण क्षार
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30C200C |
- बड़े, कठोर मस्से जो मल के रास्ते में रुकावट बनें
- गर्म पानी की सिकाई से स्पष्ट आराम
- खड़े होकर मल आसानी से निकलना, बैठकर नहीं
- मस्सों में जलन के साथ नमी व चलने पर दर्द
- साथ में मूत्र पर नियंत्रण की कमज़ोरी (खाँसने-छींकने पर बूँदें)
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | कठोर मस्से, मल में रुकावट, गर्म सिकाई से आराम | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | बहुत पुराने व कड़े मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: हैनिमैन विधि से बना आसवित द्रव (Distilled Liquid, Hahnemann's Preparation)
- Coffea और Phosphorus के साथ इसे बहुत पास-पास नहीं दिया जाता।
- कॉफ़ी से इसका असर कटता है।
- मूत्र पर नियंत्रण की शिकायत हो तो चिकित्सक को बताएँ।
Local/Hindi: कड़े मस्से, मल रुकना, गर्म सिकाई से आराम, पुरानी बवासीर
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| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
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💧 आम व पुरानी बवासीर के लिए
Doctor Pyro Drops + BC 17
ऊपर की 10 दवाओं में Aesculus, Collinsonia और Nux Vomica शामिल हैं — इन्हीं में से कई इस कॉम्बो का हिस्सा हैं।
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🔴 भाग 2 — खूनी बवासीर की दवा: 10 प्रमुख होम्योपैथिक विकल्प
खून आना बवासीर की सबसे आम शिकायत है। खूनी बवासीर की दवा खून के रंग, बहाव की रफ़्तार और उसके बाद आने वाली कमज़ोरी को देखकर तय की जाती है।
नीचे 10 दवाएँ हैं — इनमें से खूनी बवासीर की दवा वही चुनी जाती है जो आपके लक्षणों से मेल खाए, न कि जो सबसे ज़्यादा मशहूर हो। बहुत खून जाने पर दवा के भरोसे रुकना नहीं, जाँच करानी है।
मल के साथ खून, खून जाने के बाद की कमज़ोरी, खून की कमी और नीले-बैंगनी मस्से।
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Hamamelis Virginiana — खूनी बवासीर की सबसे प्रमुख होम्योपैथिक दवा
Witch Hazel / हैमामेलिस — डायन हेज़ल
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Q6C30C |
- गहरा, काला-सा खून जो लगातार व बिना थके बहे
- दर्द कम, खून ज़्यादा — खून जाने के बाद तेज़ कमज़ोरी
- मस्सों में कुचले जाने जैसा दर्द (Bruised Feeling)
- फूली, नीली व दर्द भरी नसें (Varicose Veins)
- गुदा में भारीपन और लगातार गीलेपन का अहसास
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | सक्रिय रूप से खून बह रहा हो | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार; खून के दिनों में हर 3-4 घंटे पर |
| 6C | थोड़ा-थोड़ा खून बार-बार आता हो | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ कुचले जाने जैसा दर्द व फूली नसें | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: ताज़ी छाल व टहनियाँ (Fresh Bark Of Twigs And Root)
- खून बहुत ज़्यादा या लगातार हो तो दवा के भरोसे न रहें, तुरंत जाँच कराएँ।
- Q सीधे न लें, हमेशा पानी में मिलाकर लें।
- खून रुकने के बाद मात्रा कम करने का निर्णय चिकित्सक लें।
Local/Hindi: खूनी बवासीर, काला खून आना, मस्सों से खून, फूली नसें
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Millefolium — चमकीले लाल व बिना दर्द के खून की दवा
Yarrow / भूतकेशी — मिलीफ़ोलियम
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Q6C30C |
- चमकीला लाल खून, बिना ख़ास दर्द के
- खून पतला व आसानी से न जमने वाला
- वज़न उठाने, ज़ोर लगाने या चोट के बाद खून शुरू होना
- नाक, फेफड़े या गर्भाशय से भी खून की प्रवृत्ति
- खून के बावजूद मरीज़ का अपेक्षाकृत सामान्य दिखना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | चमकीला लाल खून सक्रिय रूप से बह रहा हो | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | ज़ोर लगाने या वज़न उठाने के बाद खून | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: फूल आने के समय का पूरा ताज़ा पौधा (Whole Fresh Plant In Flower)
- खून बंद होने के बाद इसे लंबे समय तक जारी रखने की ज़रूरत नहीं होती।
- खून पतला करने वाली कोई दवा चल रही हो तो चिकित्सक को अवश्य बताएँ।
- खून बार-बार लौटे तो कारण की जाँच कराएँ।
Local/Hindi: लाल खून आना, बिना दर्द खून, वज़न उठाने से खून, मस्सों से खून
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
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Phosphorus — बार-बार खून जाने से कमज़ोरी की दवा
Phosphorus / फ़ॉस्फ़ोरस
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30C200C |
- चमकीला लाल खून जो आसानी से न रुके
- बार-बार खून जाने से पीलापन व कमज़ोरी
- ठंडा पानी व ठंडी चीज़ों की तेज़ इच्छा
- गुदा खुला-खुला महसूस होना, मल पतली लंबी लकीर जैसा
- थोड़ी-सी मेहनत पर भी जल्दी थक जाना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | बार-बार थोड़ा-थोड़ा खून, बढ़ती कमज़ोरी | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | गहरी व पुरानी रक्तस्राव की प्रवृत्ति | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध लाल/श्वेत फ़ॉस्फ़ोरस, अल्कोहल में विलयन के रूप में (Solution In Absolute Alcohol)
- इसे बहुत बार दोहराना ठीक नहीं माना जाता।
- खून की कमी ज़्यादा हो तो जाँच ज़रूरी है, केवल दवा पर निर्भर न रहें।
- 200C चिकित्सक की देखरेख में ही लें।
Local/Hindi: बार-बार खून आना, कमज़ोरी वाली बवासीर, खून न रुकना, खून की कमी
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Ipecacuanha — खून के साथ जी मिचलाने की दवा
Ipecac Root / इपिकाक — इपेकाकुआना
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6C30C |
- चमकीला लाल खून के साथ लगातार जी मिचलाना
- उल्टी के बाद भी मितली का कम न होना
- जीभ साफ़ रहना, जबकि मिचली ज़्यादा
- साँस भारी लगना, कभी-कभी दमे जैसा अहसास
- खून बहने के साथ चेहरा पीला व ठंडा पसीना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | मिचली बनी रहे और बार-बार दवा चाहिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ लगातार जी मिचलाना | 2 बूँद या 4 गोली हर 3-4 घंटे पर |
भाग: सूखी जड़ (Dried Root)
- यह मुख्यतः तात्कालिक स्थिति की दवा है, लंबे कोर्स की नहीं।
- मिचली व खून दोनों बने रहें तो 24 घंटे में चिकित्सक से मिलें।
- ख़ुद पोटेंसी न बदलें।
Local/Hindi: खून के साथ उल्टी, मिचली वाली बवासीर, लाल खून आना
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Trillium Pendulum — तेज़ बहते खून व चक्कर आने की दवा
White Beth Root / ट्रिलियम — बर्थरूट
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Q6C30C |
- चमकीला लाल खून तेज़ी से बहना
- खून जाने पर चक्कर, आँखों के आगे अंधेरा व बेहोशी जैसा
- कमर-कूल्हे बिखर जाने जैसा अहसास, कसकर बाँधने से आराम
- थोड़ी-सी हलचल पर खून फिर से शुरू हो जाना
- चेहरा पीला, हाथ-पैर ठंडे
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | तेज़ बहता खून, तुरंत असर के लिए | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून के साथ चक्कर व बेहोशी जैसा | 2 बूँद या 4 गोली हर 3 घंटे पर |
भाग: ताज़ी जड़ (Fresh Root)
- चक्कर व बेहोशी जैसा लगना गंभीर संकेत है — दवा के साथ-साथ तुरंत चिकित्सकीय जाँच कराएँ।
- यह तात्कालिक स्थिति की दवा है।
- अकेले में तेज़ खून बहने पर किसी को साथ रखें।
Local/Hindi: तेज़ खून बहना, चक्कर के साथ खून, कमर टूटने जैसा दर्द
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| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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China Officinalis — खून जाने के बाद की कमज़ोरी की दवा
Peruvian Bark / सिनकोना — चाइना
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6C30C200C |
- खून जाने के बाद की तेज़ कमज़ोरी व थकावट
- चक्कर आना, कानों में आवाज़, आँखों के आगे अंधेरा
- बहुत पसीना, ख़ासकर हल्की मेहनत पर भी
- पेट फूलना — डकार से भी आराम न मिलना
- हल्के स्पर्श से दर्द बढ़े, पर तेज़ दबाव से आराम
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | रोज़ाना कमज़ोरी व पेट फूलना | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | खून जाने के बाद की थकान, पसीना, चक्कर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | बहुत पुरानी व गहरी कमज़ोरी | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: सूखी छाल (Dried Bark)
- खून अभी बह रहा हो तो पहले खून रोकने वाली दवा चुनी जाती है, यह नहीं।
- पेट फूलना कुछ दिन बढ़ सकता है।
- खून की कमी ज़्यादा हो तो जाँच कराएँ।
Local/Hindi: खून जाने के बाद कमज़ोरी, चक्कर आना, बवासीर से खून की कमी
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
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Ferrum Metallicum — पीलेपन व खून की कमी वाली बवासीर की दवा
Metallic Iron / लोहा — फ़ेरम मेट
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6X12X30C200C |
- चेहरा पीला, पर उत्तेजना या मेहनत पर अचानक लाल हो जाना
- थोड़ी मेहनत पर हाँफी व धड़कन बढ़ना
- खून जाने से लगातार बढ़ती कमज़ोरी
- धीरे-धीरे टहलने से आराम, आराम करने पर तकलीफ़
- ठंड लगना, हाथ-पैर ठंडे रहना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X / 12X | लंबे समय तक बायोकेमिक शैली में | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | पीलापन, हाँफी, खून की कमी वाली बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध लौह चूर्ण (Purified Iron Powder / Triturated Form)
- खून की कमी की पुष्टि जाँच से कराएँ, केवल लक्षण पर निर्भर न रहें।
- लोहे की दूसरी दवा चल रही हो तो चिकित्सक को बताएँ।
- कमज़ोरी ज़्यादा हो तो मात्रा चिकित्सक तय करें।
Local/Hindi: खून की कमी वाली बवासीर, पीला चेहरा, कमज़ोरी और खून आना
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
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Ferrum Phosphoricum — शुरुआती सूजन व लाल खून की बायोकेमिक दवा
Iron Phosphate / फ़ेरम फ़ॉस — बायोकेमिक नं. 4
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6X12X |
- मस्से लाल, गर्म व सूजे हुए — शुरुआती अवस्था
- चमकीला लाल खून, थोड़ा-थोड़ा पर बार-बार
- हल्का बुख़ार जैसा महसूस होना, गाल लाल
- ठंडी सिकाई से आराम, हिलने-डुलने से दर्द बढ़ना
- खून की हल्की कमी के साथ थकान
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — शुरुआती सूजन व हल्का खून | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें; सूजन में हर 3 घंटे पर |
| 12X | थोड़ी लंबी अवधि के लिए | 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध किया गया फ़ेरिक-फ़ेरस फ़ॉस्फ़ेट (Triturated With Lactose)
- यह कम पोटेंसी की टिश्यू सॉल्ट है, इसलिए नियमित दोहराई जा सकती है।
- इसमें दूध-शर्करा (लैक्टोज़) आधार होता है।
- खून बढ़ता जाए तो दवा बदलने का निर्णय चिकित्सक लें।
Local/Hindi: शुरुआती बवासीर, लाल सूजे मस्से, बायोकेमिक दवा, हल्का खून
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Calcarea Fluorica — कठोर गाँठदार व अंदरूनी मस्सों की दवा
Calcium Fluoride / कैल्केरिया फ़्लोर — बायोकेमिक नं. 2
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6X12X30C |
- कठोर, गाँठदार, पत्थर जैसे अंदरूनी मस्से
- रुक-रुक कर खून आना, कब्ज़ के दिनों में ज़्यादा
- फूली हुई नसें व ढीले पड़े ऊतक (Varicose Tendency)
- कमर के निचले हिस्से में दर्द, गर्मी व हलचल से आराम
- गुदा में खुजली व दरारें पड़ने की प्रवृत्ति
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | हल्की व शुरुआती गाँठ | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें |
| 12X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — कठोर, गाँठदार मस्से | 4 गोली दिन में 3 बार, 6-8 हफ़्ते |
| 30C | शास्त्रीय शैली में | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध कैल्शियम फ़्लोराइड (Triturated With Lactose)
- यह धीरे काम करने वाली दवा है — जल्दबाज़ी में बदलनी नहीं चाहिए।
- लैक्टोज़ आधार वाली गोलियाँ हैं।
- कठोर गाँठ बढ़ती जाए या दर्द तेज़ हो तो जाँच कराएँ।
Local/Hindi: कड़े मस्से, अंदरूनी बवासीर, गाँठ वाली बवासीर, बायोकेमिक दवा
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Lachesis Mutus — बैंगनी मस्सों व गर्मी से बढ़ने वाली बवासीर की दवा
Bushmaster Snake Venom / लैकेसिस
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30C200C |
- गहरे बैंगनी-नीले मस्से, छूने से भी तेज़ दर्द
- गर्मी व गर्म कमरे से बढ़ना, ठंडक से आराम
- खून गहरा व आसानी से न जमने वाला
- खून निकल जाने के बाद कुछ राहत महसूस होना
- नींद से उठने के बाद तकलीफ़ का बढ़ जाना
- कमर व गले पर कसा कपड़ा बर्दाश्त न होना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | हल्की शिकायत | 2 बूँद या 4 गोली सप्ताह में दो बार |
| 200C | बैंगनी मस्से, गर्मी से बढ़ना, रजोनिवृत्ति का दौर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध व पोटेंटाइज़ किया गया सर्प विष (Potentised Snake Venom)
- यह गहरी असर वाली दवा है — इसे रोज़-रोज़ दोहराना ठीक नहीं और केवल चिकित्सक की देखरेख में लें।
- शराब इसके प्रभाव को काटती है।
- कमर व गले पर कसा कपड़ा न पहनें।
Local/Hindi: बैंगनी मस्से, गर्मी से बढ़ने वाली बवासीर, छूने से दर्द, मेनोपॉज़ में बवासीर
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
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⚡ भाग 3 — फ़िशर की होम्योपैथिक दवा: दरार व तेज़ दर्द की 10 दवाएँ
गुदा की दरार का दर्द बवासीर से अलग होता है — वो शौच के बाद घंटों बना रहता है। फ़िशर की होम्योपैथिक दवा इसी दर्द की तस्वीर देखकर चुनी जाती है।
नीचे 10 दवाएँ हैं। फ़िशर की होम्योपैथिक दवा के साथ मल नरम रखना भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि कड़ा मल दरार को हर बार दोबारा खोल देता है।
गुदा की दरार, शौच के बाद घंटों जलन, काँच चुभने जैसा दर्द और कठोर मल से बनी दरारें।
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Ratanhia Peruviana — फ़िशर व काँच जैसी चुभन की होम्योपैथिक दवा
Krameria / रतनजोत — रतनहिया
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Q30C200C |
- गुदा में टूटे काँच के टुकड़े चुभने जैसा दर्द
- मल निकलने के बाद घंटों तक तेज़ जलन
- दर्द के डर से शौच टालना — फिर मल का और कठोर होना
- ठंडे पानी की सिकाई से आराम
- मल जैसे किसी रुकावट को धकेलकर निकलता हो
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 30C | शौच के बाद घंटों जलन, काँच चुभने जैसा दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | पुरानी व बार-बार खुलने वाली दरार | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: सूखी जड़ (Dried Root)
- Q का बाहरी उपयोग बिना चिकित्सक की सलाह के न करें।
- दर्द के डर से शौच टालना दरार को और बढ़ाता है — मल नरम रखना ज़रूरी है।
- 6 हफ़्ते में सुधार न हो तो दोबारा जाँच कराएँ।
Local/Hindi: गुदा की दरार, फ़िशर, शौच के बाद जलन, काँच चुभने जैसा दर्द
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਦਰਾਰ (Punjabi) · गुदद्वाराची भेग (Marathi) · ગુદામાં ચીરો-ફિશર (Gujarati) · পায়ুর ফাটল (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
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Acidum Nitricum — पुरानी दरार व फटने जैसे दर्द की दवा
Nitric Acid / शोरे का तेज़ाब — नाइट्रिक एसिड
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30C200C |
- किरच या सूई चुभने जैसा तेज़ दर्द, शौच के बाद घंटों तक
- चमकीला लाल खून, थोड़ा-सा मल निकलने पर भी
- बहुत बदबूदार स्राव; मूत्र से तीखी गंध
- गुदा के आसपास मस्से (Anal Warts / Condylomata)
- गाड़ी या ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से आराम मिलना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | पुरानी दरार, किरच जैसा दर्द, बदबूदार स्राव | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | बहुत ज़िद्दी दरार व गुदा के मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: तनुकृत शुद्ध नाइट्रिक अम्ल (Diluted Pure Nitric Acid)
- यह अम्ल-वर्ग की दवा है — खुराक के आसपास तेज़ गंध व पुदीने से बचें।
- सांत्वना से चिड़चिड़ापन बढ़ना इसका लक्षण है, दुष्प्रभाव नहीं।
- Q का उपयोग नहीं किया जाता।
Local/Hindi: पुरानी दरार, फ़िशर से खून, गुदा के मस्से, चुभन वाला दर्द
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਦਰਾਰ (Punjabi) · गुदद्वाराची भेग (Marathi) · ગુદામાં ચીરો-ફિશર (Gujarati) · পায়ুর ফাটল (Bengali)।
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Graphites — दरार, खुजली व चिपचिपे स्राव की दवा
Black Lead / काला सीसा — ग्रेफ़ाइटीस
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6C30C200C |
- गुदा के आसपास गाढ़ा, चिपचिपा, शहद जैसा स्राव
- त्वचा फटी-फटी, दरारें व लगातार खुजली
- ज़िद्दी क़ब्ज़ — मल बड़ा, गाँठदार, बलगम लिपटा हुआ
- मस्सों में जलन के साथ सूजन
- मोटापे की प्रवृत्ति व ठंड बर्दाश्त न होना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | चिपचिपा शहद जैसा स्राव, फटी त्वचा, क़ब्ज़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | पुरानी त्वचा व दरार की शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: शुद्ध किया हुआ ग्रेफ़ाइट चूर्ण (Purified Graphite, Triturated)
- त्वचा व दरार की शिकायत में सुधार धीरे-धीरे आता है, जल्दी दवा न बदलें।
- शुरुआत में त्वचा के दाने कुछ दिन बढ़ सकते हैं।
- शराब इसके असर को कम करती है।
Local/Hindi: गुदा की दरार, चिपचिपा स्राव, खुजली वाली बवासीर, क़ब्ज़ के साथ दरार
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਦਰਾਰ (Punjabi) · गुदद्वाराची भेग (Marathi) · ગુદામાં ચીરો-ફિશર (Gujarati) · পায়ুর ফাটল (Bengali)।
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| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
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Paeonia Officinalis — ज़ख़्मी दरार व घाव बन चुके मस्सों की दवा
Peony / पिओनिया — पेओनिया
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Q6C30C |
- ज़ख़्म बन चुकी दरार व अल्सर जैसे मस्से
- बदबूदार स्राव व गुदा के आसपास लगातार गीलापन
- गुदा में कोई नुकीली चीज़ अटकी होने का अहसास
- रात में जलन का बढ़ना, नींद टूटना
- चलने-बैठने पर भी दर्द बना रहना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | ज़ख़्मी दरार, घाव बने मस्से, रात में जलन | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: ताज़ी जड़ (Fresh Root)
- बाहरी उपयोग की सलाह चिकित्सक ही तय करें।
- घाव के साथ बुख़ार या तेज़ सूजन हो तो देर न करें, तुरंत दिखाएँ।
- क्षेत्र को सूखा व साफ़ रखना दवा जितना ही ज़रूरी है।
Local/Hindi: ज़ख़्मी दरार, घाव वाले मस्से, बदबूदार स्राव, रात में जलन
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਦਰਾਰ (Punjabi) · गुदद्वाराची भेग (Marathi) · ગુદામાં ચીરો-ફિશર (Gujarati) · পায়ুর ফাটল (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Natrum Muriaticum — सूखे मल से बनी दरार की दवा
Common Salt / सेंधा-सामान्य नमक — नैट्रम म्यूर
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6X30C200C |
- बहुत सूखा, कठोर व टुकड़ों में टूटता मल — गुदा फट जाना
- मल के बाद घंटों तक जलन व चुभन
- नमक व नमकीन चीज़ों की तेज़ इच्छा
- फटे होंठ, दुबला शरीर, धूप में सिरदर्द
- गुदा सिकुड़ा हुआ, शौच के लिए बहुत ज़ोर लगाना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | बायोकेमिक शैली में, लंबे समय तक | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | रोज़मर्रा की जलन व सूखा कठोर मल | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | गहरी व पुरानी दरार, नमक की तेज़ इच्छा | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध सोडियम क्लोराइड (Triturated With Lactose)
- इसे बार-बार दोहराना ठीक नहीं माना जाता।
- शुरुआत में पुरानी दबी हुई भावनाएँ उभर सकती हैं, यह सामान्य प्रतिक्रिया है।
- पानी व रेशेदार भोजन बढ़ाए बिना दरार पूरी तरह ठीक नहीं होती।
Local/Hindi: सूखे मल से दरार, कड़ा मल, शौच में खून, फ़िशर की दवा
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Sedum Acre — दरार में लगातार बने रहने वाले दर्द की दवा
Biting Stonecrop / सेडम एकर
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Q30C |
- शौच के बाद घंटों तक बना रहने वाला कसाव भरा दर्द
- गुदा की मांसपेशी में जकड़न (Sphincter Spasm) का अहसास
- ठीक से बैठ न पाना, करवट बदलते रहना
- पुरानी दरार जो बार-बार खुल जाती हो
- दर्द के साथ हल्का चमकीला खून
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | कसाव भरा लगातार दर्द, गुदा की जकड़न | 5 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 30C | पुरानी दरार जो बार-बार खुल जाए | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: फूल आने के समय का पूरा ताज़ा पौधा (Whole Fresh Plant In Flower)
- यह कम इस्तेमाल होने वाली दवा है — लक्षण पूरी तरह मिलें तभी चुनें।
- Q हमेशा पानी में मिलाकर लें।
- दर्द के साथ बुख़ार या पीप हो तो यह दवा उपयुक्त नहीं, जाँच कराएँ।
Local/Hindi: फ़िशर का लगातार दर्द, गुदा में जकड़न, बैठने में तकलीफ़
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Muriaticum Acidum — छूने भर से दर्द करने वाले नीले मस्सों की दवा
Hydrochloric Acid / म्यूरिएटिक एसिड
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6C30C200C |
- मस्से इतने संवेदनशील कि हल्का स्पर्श भी बर्दाश्त न हो
- गहरे नीले-बैंगनी, सूजे व चमकते मस्से
- पेशाब करते समय भी मस्सों का बाहर आ जाना
- गर्म सिकाई से आराम, ठंड से बढ़ना
- बहुत कमज़ोरी — बिस्तर में नीचे की ओर सरक जाना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | छूने भर से दर्द, नीले-बैंगनी सूजे मस्से | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: तनुकृत शुद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Diluted Pure Hydrochloric Acid)
- यह अम्ल-वर्ग की दवा है — खुराक के आसपास तेज़ गंध व पुदीने से बचें।
- बहुत कमज़ोरी हो तो अवधि चिकित्सक तय करें।
- ठंड से आराम मिलता हो तो यह दवा आपके लक्षणों से मेल नहीं खाती।
Local/Hindi: छूने से दर्द वाले मस्से, नीले मस्से, पेशाब करते समय मस्से बाहर आना
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Capsicum Annuum — आग जैसी जलन व मरोड़ वाली बवासीर की दवा
Cayenne Pepper / लाल मिर्च — कैप्सिकम
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6C30C200C |
- गुदा में आग जैसी तेज़ जलन, शौच के दौरान व बाद में
- बार-बार शौच की मरोड़ पर मल थोड़ा-सा ही निकलना
- ठंड बर्दाश्त न होना; ठंडा पानी पीते ही कँपकँपी
- मल के साथ बलगम व कभी-कभी खून की धारियाँ
- मस्सों में जलन के साथ सूजन व लालिमा
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | आग जैसी जलन व शौच की बार-बार मरोड़ | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; तेज़ जलन में हर 4 घंटे पर |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: सूखे पके फल व बीज (Dried Ripe Fruit With Seeds)
- तेज़ मिर्च-मसाला बंद किए बिना इस दवा का पूरा असर नहीं मिलता।
- शुरुआत में जलन एक-दो दिन बढ़ सकती है।
- ठंड बर्दाश्त न होना इसका लक्षण है, दुष्प्रभाव नहीं।
Local/Hindi: गुदा में जलन, मिर्च जैसी जलन, बार-बार शौच की मरोड़
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
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Ignatia Amara — मलाशय के ऊपर चढ़ते दर्द व तनाव वाली बवासीर की दवा
St. Ignatius Bean / इग्नेशिया
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30C200C |
- मलाशय से ऊपर की ओर सुई चुभने जैसा चढ़ता दर्द
- नरम मल निकालने में तकलीफ़, कठोर मल आसानी से निकलना
- शौच के बाद दर्द का तेज़ हो जाना
- मस्सों का बाहर निकल आना, गुदा में सिकुड़न
- तकलीफ़ का शोक, आघात या तनाव के बाद शुरू होना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | शारीरिक लक्षण प्रमुख हों | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | शोक, आघात या तनाव के बाद शुरू हुई शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक या दो बार |
भाग: सूखे बीज (Dried Seeds / Beans)
- कॉफ़ी और तेज़ ख़ुशबू इसका असर काट देती हैं।
- शुरुआत में भावनाओं का उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
- 200C चिकित्सक की सलाह से ही लें।
Local/Hindi: तनाव से बवासीर, ऊपर चढ़ता दर्द, शौच के बाद दर्द
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Kali Carbonicum — बड़े दर्दनाक मस्सों व कमर दर्द की दवा
Potassium Carbonate / काली कार्ब
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30C200C |
- बड़े, सूजे व चुभन भरे मस्से
- पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द, बैठने पर बढ़े
- रात 2 से 4 बजे के बीच तकलीफ़ से जागना
- शौच के लिए बहुत ज़ोर लगाना पड़ना
- आँखों के ऊपरी पलक व पैरों पर सूजन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 30C | बड़े चुभन भरे मस्से व कमर दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार; कमर दर्द में रात को एक अतिरिक्त खुराक |
| 200C | पुरानी व गहरी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध पोटैशियम कार्बोनेट (Purified Salt)
- बहुत ऊँची पोटेंसी में इसे सावधानी से दिया जाता है।
- कॉफ़ी इसके असर को कम करती है।
- पैरों या पलकों की सूजन बढ़े तो चिकित्सक को बताएँ।
Local/Hindi: बड़े मस्से, कमर दर्द के साथ बवासीर, रात में बढ़ने वाला दर्द
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
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⚡ फ़िशर व तेज़ दर्द के लिए
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गुदा की दरार, शौच के बाद घंटों जलन और काँच चुभने जैसा दर्द — इसी समूह की दवाओं पर आधारित होम्योपैथिक व्यवस्था।
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🩹 भाग 4 — भगंदर की होम्योपैथिक दवा: फोड़ा, खुजली व मस्सों की 10 दवाएँ
भगंदर, फोड़ा, खुजली और मस्से — चारों की तस्वीर अलग है। भगंदर की होम्योपैथिक दवा में पीप का रंग, उसका गाढ़ापन और दर्द की क़िस्म देखी जाती है।
नीचे 10 दवाएँ हैं, और इन्हीं में मस्से सुखाने की दवा भी आती है। पर एक बात पहले से जान लीजिए — भगंदर की होम्योपैथिक दवा लंबी चलती है, और पुराना भगंदर हो तो सर्जन की राय भी साथ में लेनी चाहिए।
फ़िस्टुला, गुदा के पास पीप वाला फोड़ा, लगातार खुजली और गुदा के आसपास के मस्से।
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Silicea Terra — भगंदर व पीप वाले घाव की होम्योपैथिक दवा
Pure Flint / सिलिका — सिलीशिया
|
6X30C200C |
- भगंदर व गुदा के पास बार-बार फूटने वाला पीप भरा घाव
- पतली, बदबूदार पीप जो लंबे समय तक बहती रहे
- मल आधा बाहर आकर वापस अंदर चला जाना
- घाव का बहुत धीरे भरना, ठंड बर्दाश्त न होना
- पैरों में बदबूदार पसीना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | बायोकेमिक शैली में, लंबे समय तक | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | भगंदर, पतली पीप, धीरे भरने वाला घाव | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार, 6-8 हफ़्ते |
| 200C | चुनिंदा गहरे मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध सिलिकॉन डाइऑक्साइड (Triturated With Lactose)
- शरीर में कोई प्रत्यारोपण, स्क्रू, प्लेट या धातु मौजूद हो तो दवा शुरू करने से पहले चिकित्सक को अवश्य बताएँ।
- शुरुआत में पीप कुछ दिन बढ़ सकती है।
- जटिल या बार-बार लौटने वाले फ़िस्टुला में सर्जिकल राय भी साथ लें।
Local/Hindi: भगंदर, फ़िस्टुला, पीप वाला घाव, गुदा के पास फोड़ा
क्षेत्रीय भाषा: ਭਗੰਦਰ (Punjabi) · भगंदर (Marathi) · ભગંદર-ફિસ્ટુલા (Gujarati) · ভগন্দর (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Hepar Sulphuris Calcareum — फोड़े व अत्यधिक संवेदनशील घाव की दवा
Calcium Sulphide / हिपर सल्फ़
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6X12X200C |
- फोड़ा इतना संवेदनशील कि छूना या हवा लगना भी बर्दाश्त न हो
- किरच चुभने जैसा तेज़ दर्द
- गाढ़ी, पनीर जैसी बदबूदार पीप
- ठंड व ठंडी हवा से तकलीफ़ बढ़ना, गर्म सिकाई से आराम
- थोड़ी-सी चोट पर भी पीप पड़ जाने की प्रवृत्ति
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X / 12X | पीप को बाहर निकालने के लिए (फोड़ा पक चुका हो) | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें |
| 200C | फोड़े को बनने से पहले रोकने के लिए | 1 खुराक दिन में 2 बार, 3-4 दिन |
भाग: कैल्शियम सल्फ़ाइड का अशुद्ध रूप, हैनिमैन विधि से तैयार (Impure Calcium Sulphide)
- पोटेंसी की दिशा उलटी काम करती है, इसलिए इसे ख़ुद से न चुनें — चिकित्सक ही तय करें।
- ठंडी हवा से बचें।
- फोड़े के साथ तेज़ बुख़ार हो तो तुरंत दिखाएँ।
Local/Hindi: गुदा का फोड़ा, पीप वाला दर्द, छूने से दर्द, भगंदर बनने से पहले
क्षेत्रीय भाषा: ਭਗੰਦਰ (Punjabi) · भगंदर (Marathi) · ભગંદર-ફિસ્ટુલા (Gujarati) · ভগন্দর (Bengali)।
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Calcarea Sulphurica — पीप बहते रहने वाले भगंदर की बायोकेमिक दवा
Calcium Sulphate / कैल्केरिया सल्फ़ — बायोकेमिक नं. 3
|
6X12X30C |
- फूट चुके फोड़े से पीली, गाढ़ी पीप का लगातार बहना
- घाव का लंबे समय तक न भरना
- पीप के साथ कभी-कभी खून की धारियाँ
- गर्मी बर्दाश्त न होना, खुली हवा से आराम
- त्वचा पर बार-बार फुंसी व दाने की प्रवृत्ति
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6X | मानक बायोकेमिक पोटेंसी — फूटे फोड़े से बहती पीप | 4 गोली दिन में 3-4 बार, मुँह में घुलने दें, 6 हफ़्ते |
| 12X | थोड़ी लंबी अवधि के लिए | 4 गोली दिन में 3 बार |
| 30C | शास्त्रीय शैली में | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध कैल्शियम सल्फ़ेट (Triturated With Lactose)
- फोड़ा अभी फूटा न हो तो पहले दूसरी दवा चुनी जाती है, यह नहीं।
- टिश्यू सॉल्ट होने के कारण इसे नियमित दोहराया जा सकता है।
- पीप में खून या बदबू बढ़े तो जाँच कराएँ।
Local/Hindi: भगंदर से पीप, घाव न भरना, पीली पीप, बायोकेमिक दवा
क्षेत्रीय भाषा: ਭਗੰਦਰ (Punjabi) · भगंदर (Marathi) · ભગંદર-ફિસ્ટુલા (Gujarati) · ভগন্দর (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Myristica Sebifera — फोड़े व भगंदर की 'होम्योपैथिक चाकू' कही जाने वाली दवा
Brazilian Ucuuba / मिरिस्टिका
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6C30C200C |
- गुदा के पास पीप भरा फोड़ा — धड़कता हुआ दर्द
- फोड़े का जल्दी पकना व खुलना
- भगंदर व बार-बार बनने वाले पीप के थैले
- सूजन के साथ आसपास की त्वचा का लाल व गर्म होना
- पीप निकलने के बाद तेज़ी से आराम मिलना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | पीप भरा फोड़ा, धड़कता दर्द | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार, 2-3 हफ़्ते |
| 200C | चुनिंदा मामले — चिकित्सक की सलाह पर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: वृक्ष से निकला गोंद-रस (Gum Resin / Juice)
- यह तेज़ असर वाली दवा है — बिना सलाह लंबे समय तक न चलाएँ।
- फोड़ा जल्दी पक कर खुल सकता है, यह अपेक्षित प्रतिक्रिया है।
- तेज़ बुख़ार या फैलती सूजन में तुरंत दिखाएँ।
Local/Hindi: गुदा का फोड़ा, भगंदर की दवा, पीप निकालने वाली दवा
क्षेत्रीय भाषा: ਭਗੰਦਰ (Punjabi) · भगंदर (Marathi) · ભગંદર-ફિસ્ટુલા (Gujarati) · ভগন্দর (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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Berberis Vulgaris — भगंदर व फैलते हुए दर्द की दवा
Barberry / दारुहल्दी — बरबेरिस
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Q6C30C |
- दर्द का एक जगह से फैलकर कमर, जाँघ व पेडू तक जाना
- भगंदर व गुदा के आसपास जलन-खुजली के साथ पतला स्राव
- हिलने-डुलने व झटके से दर्द का बढ़ना
- कमर में दर्द व भारीपन, गुर्दे की तरफ़ खिंचाव
- मूत्र गाढ़ा व लाल तलछट वाला
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | फैलता हुआ दर्द व कमर का भारीपन | 10 बूँद आधे कप पानी में दिन में 3 बार |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | भगंदर व गुदा के आसपास जलन-खुजली | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार |
भाग: ताज़ी जड़ की छाल (Fresh Root Bark)
- गुर्दे की कोई शिकायत या पथरी की दवा चल रही हो तो चिकित्सक को बताएँ।
- Q हमेशा पानी में मिलाकर लें।
- गर्भावस्था में बिना सलाह न लें।
Local/Hindi: भगंदर, फैलता हुआ दर्द, कमर तक जाने वाला दर्द, गुदा में जलन
क्षेत्रीय भाषा: ਭਗੰਦਰ (Punjabi) · भगंदर (Marathi) · ભગંદર-ફિસ્ટુલા (Gujarati) · ভগন্দর (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Thuja Occidentalis — गुदा के मस्सों व मुँहासेदार उभारों की दवा
Arbor Vitae / मोरपंखी — थूजा
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Q30C200C |
- गुदा के आसपास फूलगोभी जैसे दानेदार मस्से (Condylomata)
- मस्सों के साथ लगातार गीलापन व खुजली
- बदबूदार स्राव, नमी में तकलीफ़ का बढ़ना
- मल के बाद गुदा में चुभन व जलन
- त्वचा पर जगह-जगह तिल, मस्से व दाने
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| Q | बाहरी उपयोग — केवल चिकित्सक की सलाह से | चिकित्सक द्वारा निर्देशित |
| 30C | शुरुआती व हल्के मस्से | 2 बूँद या 4 गोली दिन में एक बार |
| 200C | पुराने, गीले व बदबूदार दानेदार मस्से | 1 खुराक सप्ताह में एक बार, 6-8 हफ़्ते |
भाग: ताज़ी हरी टहनियाँ व पत्तियाँ (Fresh Green Twigs)
- Q का बाहरी उपयोग केवल चिकित्सक की सलाह से करें।
- 200C को बार-बार दोहराना ठीक नहीं।
- मस्से तेज़ी से बढ़ें, खून आए या रंग बदले तो तुरंत जाँच कराएँ।
Local/Hindi: गुदा के मस्से, दाने वाले उभार, मस्सों में खुजली, गीलापन
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਖੁਜਲੀ (Punjabi) · गुदद्वाराची खाज (Marathi) · ગુદામાં ખંજવાળ (Gujarati) · পায়ুতে চুলকানি (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Arsenicum Album — जलन के साथ बेचैनी वाली बवासीर की दवा
White Oxide Of Arsenic / संखिया — आर्सेनिक एल्बम
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6C30C200C |
- गुदा में अंगारे जैसी जलन, पर गर्म सिकाई से आराम
- आधी रात के बाद (12 से 2 बजे) तकलीफ़ का बढ़ना
- बहुत बेचैनी — एक जगह टिक न पाना
- थोड़े-थोड़े घूँट में ठंडा पानी पीने की इच्छा
- कमज़ोरी जो तकलीफ़ के अनुपात से ज़्यादा लगे
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | जलन के साथ बेचैनी, आधी रात के बाद बढ़ना | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; तेज़ जलन में हर 4 घंटे पर |
| 200C | पुरानी व गहरी शिकायत | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध श्वेत आर्सेनिक ऑक्साइड (Triturated With Lactose)
- यह गहरी असर वाली दवा है — लंबे समय तक बिना सलाह न चलाएँ।
- शुरुआत में बेचैनी एक-दो दिन बढ़ सकती है।
- ठंडी सिकाई से आराम मिलता हो तो यह दवा उपयुक्त नहीं।
Local/Hindi: गुदा में जलन, रात में बढ़ने वाली बवासीर, बेचैनी वाली बवासीर
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਖੁਜਲੀ (Punjabi) · गुदद्वाराची खाज (Marathi) · ગુદામાં ખંજવાળ (Gujarati) · পায়ুতে চুলকানি (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Podophyllum Peltatum — मलाशय बाहर निकल आने की होम्योपैथिक दवा
May Apple / पोडोफ़ाइलम
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6C30C200C |
- शौच के दौरान या बाद में मलाशय का बाहर निकल आना
- सुबह-सुबह के तेज़, बदबूदार व बिना दर्द के दस्त
- दस्त के बाद बहुत कमज़ोरी व खालीपन का अहसास
- पेट में गुड़गुड़ाहट, ख़ासकर दाईं तरफ़
- मस्सों का बाहर निकलना, हल्का खून व भारीपन
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | मलाशय बाहर आना व सुबह के तेज़ दस्त | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 3 बार; दस्त में हर 3-4 घंटे पर |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: ताज़ी जड़ व प्रकंद (Fresh Root And Rhizome)
- दस्त लंबे चलें तो पानी की कमी से बचाव ज़रूरी है।
- बच्चों व गर्भावस्था में केवल चिकित्सक की सलाह से दें।
- मलाशय बार-बार बाहर आए तो शल्य-राय भी लें।
Local/Hindi: मलाशय बाहर आना, सुबह के दस्त, कोख निकलना, बवासीर के साथ दस्त
क्षेत्रीय भाषा: ਬਵਾਸੀਰ / ਮੌਹਕੇ (Punjabi) · मूळव्याध (Marathi) · હરસ-મસા (Gujarati) · অর্শ / পাইলস (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Ammonium Carbonicum — माहवारी के दौरान बढ़ने वाली बवासीर की दवा
Ammonium Carbonate / नौसादर — अमोनियम कार्ब
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6C30C200C |
- माहवारी के दिनों में बवासीर का साफ़ तौर पर बढ़ना
- शौच के बाद मस्सों का बाहर निकल आना
- गुदा में जलन व चुभन के साथ हल्का खून
- साँस भारी लगना, थोड़ी मेहनत पर हाँफी
- गीले-नम मौसम में तकलीफ़ का बढ़ना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार देने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | माहवारी के दिनों में बढ़ने वाली बवासीर | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार; माहवारी से 2-3 दिन पहले शुरू करें |
| 200C | चुनिंदा पुराने मामले | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध अमोनियम कार्बोनेट (Purified Salt)
- साँस भारी लगने या हाँफी की शिकायत बढ़े तो चिकित्सक को बताएँ।
- गीले-नम मौसम में तकलीफ़ बढ़ना इसका लक्षण है, दुष्प्रभाव नहीं।
- गर्भावस्था में बिना सलाह न लें।
Local/Hindi: पीरियड में बवासीर बढ़ना, महिलाओं की बवासीर, मस्से बाहर आना
क्षेत्रीय भाषा: ਖ਼ੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ (Punjabi) · रक्ती मूळव्याध (Marathi) · લોહી પડતા હરસ (Gujarati) · রক্ত অর্শ (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
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| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
| ICD-10 कोड | WHO ICD-10 (2019) — यह मैपिंग हमारी संपादकीय है, किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं; केवल विषय-वर्गीकरण हेतु |
| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
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Antimonium Crudum — बलगम भरे स्राव व फटी गुदा-त्वचा की दवा
Black Sulphide Of Antimony / सुरमा — एंटिम क्रूड
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6C30C200C |
- गुदा से लगातार बलगम जैसा स्राव
- गुदा के आसपास फटी, खुरदरी व दरारों वाली त्वचा
- मल का बारी-बारी कड़ा और पतला आना
- जीभ पर मोटी सफ़ेद परत जमी होना
- ज़्यादा या चिकना खाने के बाद तकलीफ़ का बढ़ना
⚕️ चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन/उपयोग करें।
| पोटेंसी | कब चुनें | मात्रा |
| 6C | बार-बार दोहराने के लिए | 4 गोली दिन में 3-4 बार |
| 30C | बलगम जैसा स्राव व फटी गुदा-त्वचा | 2 बूँद या 4 गोली दिन में 2 बार |
| 200C | पुरानी त्वचा-शिकायत — चिकित्सक की सलाह पर | 1 खुराक सप्ताह में एक बार |
भाग: रासायनिक रूप से शुद्ध किया गया एंटिमनी सल्फ़ाइड (Triturated With Lactose)
- ज़्यादा या चिकना खाना इस दवा के असर को सीधे कम करता है — खान-पान में संयम ज़रूरी है।
- नहाने के बाद बेचैनी बढ़ना इसका लक्षण है।
- स्राव में खून या बदबू बढ़े तो जाँच कराएँ।
Local/Hindi: बलगम वाला स्राव, फटी त्वचा, खुजली वाली बवासीर, कड़ा-पतला मल
क्षेत्रीय भाषा: ਗੁਦਾ ਦੀ ਖੁਜਲੀ (Punjabi) · गुदद्वाराची खाज (Marathi) · ગુદામાં ખંજવાળ (Gujarati) · পায়ুতে চুলকানি (Bengali)।
| उपयोग · मुख्य लक्षण · मानसिक लक्षण | Boericke — Pocket Manual Of Homoeopathic Materia Medica (9वाँ संस्करण) · Allen's Keynotes · Kent's Repertory |
| मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग | HPI — होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया, आयुष मंत्रालय (मोनोग्राफ़ में पहचान, संग्रहण, प्रयुक्त भाग व निर्माण विधि निर्धारित) |
| Antidote (प्रतिकारक दवाएँ) | Boericke — Relationship Of Remedies अनुभाग · मतभेद की स्थिति में Clarke को अंतिम प्राधिकार माना जाता है |
| मात्रा व पोटेंसी | Boericke का Dose अनुभाग — सामान्य संदर्भ मात्र। HPI मानक केवल मदर टिंक्चर स्तर तक तय करता है, व्यक्तिगत मात्रा नहीं |
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| ICD-11 कोड | WHO ICD-11 MMS (नवीनतम रिलीज़) — ICD-11 1 जनवरी 2022 से लागू है और भारत सहित कई देशों में क्रमशः अपनाया जा रहा है; मैपिंग हमारी संपादकीय |
| MeSH ID | NLM MeSH Browser — PubMed व MEDLINE में शोध खोजने के लिए प्रयुक्त नियंत्रित शब्दावली; Descriptor UI सीधे NLM रिकॉर्ड से लिया गया |
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⚗️ पोटेंसी को समझें — X, C, Q और LM (50 मिलेसिमल)
इस पृष्ठ की 40 दवाओं में आपने Q, 6X, 12X, 6C, 30C और 200C देखी होंगी। इनके अलावा एक चौथी श्रेणी भी है — LM या 0/ पोटेंसी, जिसे हैनिमैन ने अपने जीवन के अंत में तैयार किया और जो भारत में बवासीर पर हुए सबसे बड़े शोध का विषय रही है।
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1
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3C तक ट्रिचुरेशन
दवा को दूध-शर्करा के साथ तीन घंटे घोटकर 3C (दस लाखवाँ भाग) तक लाया जाता है।
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2
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मूल घोल बनाना
इसका एक ग्रेन 500 बूँद पानी-अल्कोहल मिश्रण (4:1) में घोला जाता है।
|
|
3
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100 आघात (Succussion)
उसमें से 1 बूँद लेकर 100 बूँद अल्कोहल में मिलाकर 100 बार ज़ोर से आघात दिए जाते हैं — यही 0/1 है।
|
|
4
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गोलियों पर चढ़ाना
इस घोल से 500 छोटी गोलियाँ भिगोई जाती हैं; एक गोली से अगली पोटेंसी 0/2, फिर 0/3 … 0/30 तक।
|
|
✅ LM क्यों चुनी जाती है
|
💧 कैसे ली जाती है
एक गोली आधे कप पानी में घोली जाती है। हर खुराक से पहले उस पानी को 8–12 बार हिलाया (succuss) जाता है, फिर उसमें से एक-दो चम्मच लिया जाता है — इसे Plussing कहते हैं। इसी वजह से हर खुराक थोड़ी बदली हुई होती है और शरीर उसे आसानी से स्वीकार करता है।
|
📑 एक नज़र में — 40 दवाओं की सूची
यह सूची चारों हिस्सों को एक जगह लाती है — बवासीर का होम्योपैथिक इलाज, खूनी बवासीर की दवा, फ़िशर की होम्योपैथिक दवा और भगंदर की होम्योपैथिक दवा। मस्से सुखाने की दवा भी इसी सूची में है। नाम पढ़कर सीधे शुरू करने के बजाय ऊपर वाले हिस्से में उसी दवा के लक्षण मिला लीजिए।
| # | दवा का नाम | मुख्य संकेत | प्रचलित पोटेंसी |
| 🎯 भाग 1 — आम व पुरानी बवासीर की 10 दवाएँ | |||
| 1 | Aesculus Hippocastanum | सूखी, दर्दनाक बवासीर + कमर दर्द | Q · 30C · 200C |
| 2 | Collinsonia Canadensis | क़ब्ज़ के साथ बवासीर, गर्भावस्था | Q · 30C · 200C |
| 3 | Nux Vomica | बैठे-बैठे काम, मसाला, अधूरा शौच | 6C · 30C · 200C |
| 4 | Sulphur | जलन-खुजली वाली पुरानी बवासीर | 30C · 200C |
| 5 | Aloe Socotrina | बाहर निकले अंगूर जैसे मस्से | 6C · 30C · 200C |
| 6 | Lycopodium Clavatum | गैस व पेट फूलने के साथ बवासीर | 30C · 200C |
| 7 | Carbo Vegetabilis | नीले मस्से, ज़्यादा गैस, कमज़ोरी | 6C · 30C · 200C |
| 8 | Sepia Officinalis | महिलाओं की बवासीर, नीचे खिंचाव | 30C · 200C |
| 9 | Pulsatilla Nigricans | गर्भावस्था, बदलते लक्षण, खुजली | 30C · 200C |
| 10 | Causticum | कठोर मस्से, मल का रुक जाना | 30C · 200C |
| 🔴 भाग 2 — खूनी बवासीर की 10 दवाएँ | |||
| 11 | Hamamelis Virginiana | गहरा काला खून, कमज़ोरी, फूली नसें | Q · 6C · 30C |
| 12 | Millefolium | चमकीला लाल खून, बिना दर्द | Q · 6C · 30C |
| 13 | Phosphorus | बार-बार खून, पीलापन, कमज़ोरी | 30C · 200C |
| 14 | Ipecacuanha | खून के साथ लगातार मिचली | 6C · 30C |
| 15 | Trillium Pendulum | तेज़ खून, चक्कर व बेहोशी जैसा | Q · 6C · 30C |
| 16 | China Officinalis | खून जाने के बाद की कमज़ोरी | 6C · 30C · 200C |
| 17 | Ferrum Metallicum | खून की कमी, पीला चेहरा, हाँफी | 6X · 12X · 30C · 200C |
| 18 | Ferrum Phosphoricum | शुरुआती लाल-गर्म सूजे मस्से | 6X · 12X |
| 19 | Calcarea Fluorica | कड़े, गाँठदार अंदरूनी मस्से | 6X · 12X · 30C |
| 20 | Lachesis Mutus | बैंगनी मस्से, गर्मी से बढ़ना | 30C · 200C |
| ⚡ भाग 3 — फ़िशर व तेज़ दर्द वाली 10 दवाएँ | |||
| 21 | Ratanhia Peruviana | फ़िशर — काँच चुभने जैसा दर्द | Q · 30C · 200C |
| 22 | Acidum Nitricum | पुरानी दरार, बदबूदार स्राव, मस्से | 30C · 200C |
| 23 | Graphites | दरार + चिपचिपा शहद जैसा स्राव | 6C · 30C · 200C |
| 24 | Paeonia Officinalis | ज़ख़्मी दरार, घाव बने मस्से | Q · 6C · 30C |
| 25 | Natrum Muriaticum | सूखे-कठोर मल से बनी दरार | 6X · 30C · 200C |
| 26 | Sedum Acre | शौच के बाद घंटों रहने वाला दर्द | Q · 30C |
| 27 | Muriaticum Acidum | छूने भर से दर्द, नीले मस्से | 6C · 30C · 200C |
| 28 | Capsicum Annuum | आग जैसी जलन व शौच की मरोड़ | 6C · 30C · 200C |
| 29 | Ignatia Amara | तनाव के बाद, ऊपर चढ़ता दर्द | 30C · 200C |
| 30 | Kali Carbonicum | बड़े मस्से + कमर का तेज़ दर्द | 30C · 200C |
| 🩹 भाग 4 — भगंदर, फोड़ा, खुजली व मस्सों की 10 दवाएँ | |||
| 31 | Silicea Terra | भगंदर, पतली पीप, धीमा घाव | 6X · 30C · 200C |
| 32 | Hepar Sulphuris Calcareum | फोड़ा — छूने तक बर्दाश्त न हो | 6X · 12X · 200C |
| 33 | Calcarea Sulphurica | फूटे फोड़े से लगातार पीली पीप | 6X · 12X · 30C |
| 34 | Myristica Sebifera | पीप भरा फोड़ा, धड़कता दर्द | 6C · 30C · 200C |
| 35 | Berberis Vulgaris | भगंदर, कमर-जाँघ तक फैलता दर्द | Q · 6C · 30C |
| 36 | Thuja Occidentalis | गुदा के मस्से व दानेदार उभार | Q · 30C · 200C |
| 37 | Arsenicum Album | जलन + बेचैनी, आधी रात बढ़ना | 6C · 30C · 200C |
| 38 | Podophyllum Peltatum | मलाशय बाहर आना, सुबह के दस्त | 6C · 30C · 200C |
| 39 | Ammonium Carbonicum | माहवारी में बढ़ने वाली बवासीर | 6C · 30C · 200C |
| 40 | Antimonium Crudum | बलगम स्राव, फटी गुदा-त्वचा | 6C · 30C · 200C |
🔢 सभी 40 दवाओं के ICD-10, ICD-11 व MeSH कोड — एक साथ
ये कोड दवा का नहीं, उस अवस्था का वर्गीकरण हैं जिसमें वह दवा चुनी जाती है। ICD-11 में बवासीर अब DB60–DB62 के अंतर्गत आती है और दरार व भगंदर DB50 के अंतर्गत। MeSH ID से आप PubMed पर उसी विषय का शोध सीधे खोज सकते हैं।
| # | दवा | ICD-10 | ICD-11 | MeSH ID |
| 1 | Aesculus Hippocastanum | K64.9 · K64.4 | DB60.Z · DB62 | D006484 |
| 2 | Collinsonia Canadensis | K64.9 · K59.0 | DB60.Z · ME05.0 | D006484 · D003248 |
| 3 | Nux Vomica | K64.9 · K59.0 | DB60.Z · ME05.0 | D006484 · D003248 |
| 4 | Sulphur | L29.0 · K64.9 | EC90.5 · DB60.Z | D011538 · D006484 |
| 5 | Aloe Socotrina | K64.2 / K64.3 · K62.3 | DB60.2 · DB31.2 | D006484 · D012005 |
| 6 | Lycopodium Clavatum | K64.9 · K59.0 | DB60.Z · ME05.0 | D006484 · D003248 |
| 7 | Carbo Vegetabilis | K64.5 · K64.9 | DB61 · DB60.Z | D006484 |
| 8 | Sepia Officinalis | K64.9 · O22.4 | DB60.Z · JA61.4 | D006484 |
| 9 | Pulsatilla Nigricans | O22.4 · K64.9 | JA61.4 · DB60.Z | D006484 |
| 10 | Causticum | K64.2 · K59.0 | DB60.2 · ME05.0 | D006484 · D003248 |
| 11 | Hamamelis Virginiana | K64.8 · K62.5 | DB6Y · ME24.A1 | D006484 · D006471 |
| 12 | Millefolium | K62.5 · K64.8 | ME24.A1 · DB6Y | D006471 · D006484 |
| 13 | Phosphorus | K62.5 · K64.8 | ME24.A1 · DB6Y | D006471 · D006484 |
| 14 | Ipecacuanha | K62.5 · K64.8 | ME24.A1 · DB6Y | D006471 |
| 15 | Trillium Pendulum | K62.5 · K64.8 | ME24.A1 · DB6Y | D006471 |
| 16 | China Officinalis | K62.5 · D50.0 | ME24.A1 · 3A00 | D018798 · D006471 |
| 17 | Ferrum Metallicum | D50.0 · K64.8 | 3A00 · DB6Y | D018798 · D006484 |
| 18 | Ferrum Phosphoricum | K64.0 · K62.5 | DB60.0 · ME24.A1 | D006484 · D006471 |
| 19 | Calcarea Fluorica | K64.1 / K64.2 · K64.4 | DB60.1 · DB62 | D006484 |
| 20 | Lachesis Mutus | K64.5 · K64.8 | DB61 · DB6Y | D006484 |
| 21 | Ratanhia Peruviana | K60.2 · K60.1 | DB50.0 · DD92.1 | D005401 |
| 22 | Acidum Nitricum | K60.1 · A63.0 | DB50.0 · 1A95 | D005401 · D003218 |
| 23 | Graphites | K60.2 · L29.0 | DB50.0 · EC90.5 | D005401 · D011538 |
| 24 | Paeonia Officinalis | K60.1 · K61.0 | DB50.0 · DB70.00 | D005401 · D001004 |
| 25 | Natrum Muriaticum | K60.2 · K59.0 | DB50.0 · ME05.0 | D005401 · D003248 |
| 26 | Sedum Acre | K60.1 · K60.2 | DB50.0 · DD92.1 | D005401 |
| 27 | Muriaticum Acidum | K64.3 · K64.5 | DB60.3 · DB61 | D006484 |
| 28 | Capsicum Annuum | K64.8 · L29.0 | DB6Y · EC90.5 | D006484 · D011538 |
| 29 | Ignatia Amara | K64.9 · K62.8 | DB60.Z · DD92.1 | D006484 · D001004 |
| 30 | Kali Carbonicum | K64.2 · K64.8 | DB60.2 · DB6Y | D006484 |
| 31 | Silicea Terra | K60.3 · K61.0 | DB50.1 · DB70.00 | D012003 · D001004 |
| 32 | Hepar Sulphuris Calcareum | K61.0 · K60.3 | DB70.00 · DB50.1 | D012003 · D001004 |
| 33 | Calcarea Sulphurica | K60.3 · K61.0 | DB50.1 · DB70.00 | D012003 |
| 34 | Myristica Sebifera | K61.0 · K60.3 | DB70.00 · DB50.1 | D012003 · D001004 |
| 35 | Berberis Vulgaris | K60.3 · K64.8 | DB50.1 · DB6Y | D012003 |
| 36 | Thuja Occidentalis | A63.0 · K64.4 | 1A95 · DB62 | D003218 |
| 37 | Arsenicum Album | L29.0 · K64.8 | EC90.5 · DB6Y | D011538 · D006484 |
| 38 | Podophyllum Peltatum | K62.3 · K64.3 | DB31.2 · DB60.3 | D012005 · D006484 |
| 39 | Ammonium Carbonicum | K64.8 · K62.5 | DB6Y · ME24.A1 | D006484 · D006471 |
| 40 | Antimonium Crudum | L29.0 · K60.2 | EC90.5 · DB50.0 | D011538 · D005401 |
⚖️ मिलती-जुलती दवाओं में फ़र्क़ कैसे पहचानें
| दवाओं की जोड़ी | समान क्षेत्र | मुख्य अंतर | कब कौन-सी चुनें |
| Hamamelis बनाम Millefolium | खूनी बवासीर | Hamamelis में खून गहरा-काला व लगातार, और खून जाने के बाद तेज़ कमज़ोरी। Millefolium में खून चमकीला लाल, पतला और लगभग बिना दर्द के। | ✔ खून काला + कमज़ोरी → Hamamelis ✔ खून लाल + दर्द नहीं → Millefolium |
| Aesculus बनाम Collinsonia | सूखी बवासीर + क़ब्ज़ | Aesculus में मुख्य शिकायत कमर-कूल्हे का दर्द और मलाशय में तीलियाँ चुभना है। Collinsonia में मुख्य शिकायत ज़िद्दी सूखा क़ब्ज़ है, और तकलीफ़ अक्सर गर्भावस्था से जुड़ी होती है। | ✔ कमर दर्द प्रमुख → Aesculus ✔ क़ब्ज़ प्रमुख / प्रेगनेंसी → Collinsonia |
| Ratanhia बनाम Acidum Nitricum | गुदा की दरार (फ़िशर) | Ratanhia में काँच के टुकड़े चुभने जैसी जलन और ठंडे पानी से आराम। Acidum Nitricum में किरच चुभने जैसा दर्द, बहुत बदबूदार स्राव और साथ में गुदा के मस्से। | ✔ जलन + ठंडक से आराम → Ratanhia ✔ बदबू + मस्से → Acidum Nitricum |
| Silicea बनाम Hepar Sulphuris | भगंदर व फोड़ा | Silicea में पीप पतली होती है और घाव बहुत धीरे भरता है। Hepar Sulphuris में फोड़ा इतना संवेदनशील होता है कि छूना या हवा लगना भी बर्दाश्त नहीं होता, पीप गाढ़ी होती है। | ✔ पतली पीप + धीमा घाव → Silicea ✔ छूने तक बर्दाश्त न हो → Hepar Sulph |
| Nux Vomica बनाम Sulphur | पुरानी बवासीर | Nux Vomica में बार-बार अधूरा शौच, चिड़चिड़ापन और अनियमित दिनचर्या मुख्य है। Sulphur में गुदा की जलन-खुजली, सुबह की हाजत और त्वचा की पुरानी शिकायत मुख्य है। | ✔ अधूरा शौच + मसाला → Nux Vomica ✔ जलन-खुजली + सुबह दस्त → Sulphur |
| Aloe बनाम Muriaticum Acidum | बाहर निकले मस्से | Aloe में ठंडे पानी की सिकाई से आराम मिलता है। Muriaticum Acidum में गर्म सिकाई से आराम मिलता है और मस्से इतने संवेदनशील होते हैं कि छूना बर्दाश्त नहीं होता। | ✔ ठंडे पानी से आराम → Aloe ✔ गर्मी से आराम + छूने से दर्द → Mur. Acid |
| Lachesis बनाम Arsenicum Album | जलन वाली बवासीर | Lachesis में गर्मी से तकलीफ़ बढ़ती है और ठंडक से आराम मिलता है; तकलीफ़ नींद से उठने पर बढ़ती है। Arsenicum में जलन तेज़ होने के बावजूद गर्म सिकाई से आराम मिलता है और तकलीफ़ आधी रात के बाद बढ़ती है। | ✔ गर्मी से बढ़े → Lachesis ✔ गर्मी से आराम + आधी रात → Ars. Album |
| Graphites बनाम Antimonium Crudum | स्राव वाली दरार | Graphites में स्राव गाढ़ा, चिपचिपा और शहद जैसा होता है। Antimonium Crudum में स्राव बलगम जैसा होता है और जीभ पर मोटी सफ़ेद परत जमी रहती है। | ✔ शहद जैसा चिपचिपा स्राव → Graphites ✔ बलगम + सफ़ेद जीभ → Ant. Crud |
| Sepia बनाम Pulsatilla | महिलाओं की बवासीर | Sepia में नीचे की ओर खिंचाव, उदासीनता और अपनों से भी दूरी महसूस होती है। Pulsatilla में लक्षण लगातार बदलते हैं, मरीज़ भावुक होती है और खुली हवा में आराम मिलता है। | ✔ नीचे खिंचाव + उदासीनता → Sepia ✔ बदलते लक्षण + भावुकता → Pulsatilla |
| Calcarea Fluorica बनाम Calcarea Sulphurica | कठोर मस्से बनाम बहता घाव | Calcarea Fluorica कठोर, गाँठदार व पत्थर जैसे अंदरूनी मस्सों की दवा है। Calcarea Sulphurica उस अवस्था की दवा है जब फोड़ा फूट चुका हो और पीली पीप लगातार बहती रहे। | ✔ कड़े गाँठदार मस्से → Cal. Fluor ✔ बहता पीप वाला घाव → Cal. Sulph |
🍽️ बवासीर में क्या खाएँ, क्या न खाएँ और कौन-सी आदतें बदलें
यह हिस्सा दवा जितना ही ज़रूरी है। सात यादृच्छिक परीक्षणों की समीक्षा में पाया गया कि रेशा (फ़ाइबर) बढ़ाने भर से लक्षणों के बने रहने का ख़तरा लगभग आधा रह गया।
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✅ क्या खाएँ
रेशेदार अनाज
जौ, बाजरा, दलिया, ब्राउन राइस, चोकर वाला आटा
फल
पपीता, अमरूद, नाशपाती, अंजीर, सेब (छिलके सहित)
सब्ज़ियाँ
पालक, लौकी, तोरी, गाजर, चुकंदर, भिंडी
दालें व बीज
मूंग, चना, राजमा, अलसी, ईसबगोल की भूसी
तरल
दिन भर में 2–3 लीटर पानी, छाछ, नारियल पानी
दही व छाछ
पेट की गति सुधारते हैं, मल नरम रखते हैं
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❌ किससे बचें
तेज़ मिर्च-मसाला
लाल मिर्च, अचार, तीखी चटनी — जलन सीधे बढ़ाते हैं
मैदा व बेकरी
ब्रेड, बिस्किट, समोसा, पिज़्ज़ा — मल कठोर बनाते हैं
तला हुआ व जंक फ़ूड
पूड़ी, पकौड़े, बर्गर, चिप्स
शराब व तंबाकू
शरीर से पानी खींचते हैं और क़ब्ज़ बढ़ाते हैं
ज़्यादा चाय-कॉफ़ी
होम्योपैथिक दवा का असर भी कम करती है
लाल मांस व भारी खाना
देर से पचता है, आँतों की गति धीमी करता है
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⏱️
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शौच का समय 3 मिनट तक
मोबाइल शौचालय में न ले जाएँ — यही आज की सबसे बड़ी नई वजह है।
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हाजत को टालें नहीं
इच्छा होते ही जाएँ; टालने से मल सूखकर कठोर हो जाता है।
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रोज़ 25–35 ग्राम रेशा
ASCRS 2024 की सलाह — खाने से या ईसबगोल जैसी भूसी से।
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रोज़ 30 मिनट टहलना
बैठे रहने से पेडू में जमा खून हिलता है।
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गर्म पानी का सिट्ज़ बाथ
10–15 मिनट। इससे गुदा की मांसपेशी का दबाव घटता है, हालाँकि इस पर शोध सीमित है।
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💉
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स्टेरॉयड क्रीम 2 हफ़्ते से ज़्यादा नहीं
लंबे इस्तेमाल से गुदा की त्वचा पतली पड़ जाती है।
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🚨 ये लक्षण दिखें तो दवा नहीं, तुरंत जाँच
हर गुदा से आने वाला खून बवासीर का नहीं होता। नीचे दिए संकेतों में से कोई भी मिले तो होम्योपैथिक या किसी भी दवा पर समय न लगाएँ — पहले कारण की जाँच कराएँ।
| ⚠️ | खून बहुत ज़्यादा हो, बंद न हो, या चक्कर-कमज़ोरी के साथ आए |
| ⚠️ | मल के बिना भी खून आए, या खून गहरा-काला/लुक जैसा हो |
| ⚠️ | गुदा की गाँठ अचानक बहुत कड़ी, नीली और असहनीय दर्द वाली हो जाए (थक्का) |
| ⚠️ | तेज़ बुख़ार के साथ गुदा में सूजन, लाली या पीप |
| ⚠️ | बिना कारण वज़न घटना या लगातार थकान |
| ⚠️ | मल की आदत में लगातार बदलाव — पतला मल, बार-बार जाना, अधूरापन |
| ⚠️ | परिवार में आँत के कैंसर का इतिहास हो और 45+ उम्र में नया खून आए |
| ⚠️ | गर्भावस्था में तेज़ दर्द या ज़्यादा खून |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
बवासीर की कोई एक 'सबसे अच्छी' दवा नहीं होती — होम्योपैथी में दवा लक्षणों के आधार पर चुनी जाती है। खूनी बवासीर में Hamamelis और Millefolium, सूखी-दर्दनाक बवासीर में Aesculus, क़ब्ज़ के साथ Collinsonia, और जलन-खुजली में Sulphur सबसे अधिक चुनी जाती हैं। सही दवा वही है जो आपके लक्षणों से मेल खाए।
खूनी बवासीर में खून का रंग देखकर दवा तय की जाती है। गहरा-काला खून और साथ में कमज़ोरी हो तो Hamamelis, और चमकीला लाल खून बिना ख़ास दर्द के हो तो Millefolium सबसे पहले विचार में आती हैं। खून जाने के बाद की कमज़ोरी के लिए China Officinalis दी जाती है।
शुरुआती व मध्यम अवस्था (Grade 1 और 2) की बवासीर में होम्योपैथिक इलाज से कई मरीज़ों को लक्षणों में अच्छा आराम मिलता है। पर Grade 3-4, बहुत ज़्यादा खून बहना, या मस्से का गला घुटना (Strangulation) जैसी स्थितियों में सर्जिकल राय लेना ज़रूरी है। किसी भी इलाज में कोई गारंटी का दावा नहीं किया जा सकता।
यह अवस्था पर निर्भर करता है। नई व हल्की शिकायत में 2 से 4 हफ़्ते में सुधार दिखने लगता है, जबकि 5-10 साल पुरानी बवासीर या भगंदर में 3 से 6 महीने तक इलाज चल सकता है। सुधार दिखने के बाद भी दवा अचानक बंद करने के बजाय चिकित्सक की सलाह से धीरे-धीरे कम की जाती है।
30C कम पोटेंसी है और इसे दिन में 2-3 बार दोहराया जा सकता है — रोज़मर्रा के शारीरिक लक्षणों के लिए यह उपयुक्त है। 200C ऊँची पोटेंसी है, जो गहरे व पुराने मामलों में सप्ताह में एक बार दी जाती है। ऊँची पोटेंसी ख़ुद से शुरू नहीं करनी चाहिए — यह चिकित्सक तय करते हैं।
Q यानी मदर टिंक्चर दवा का सबसे कम तनुकृत, तरल रूप है, जिसे आमतौर पर 5 से 10 बूँद पानी में मिलाकर लिया जाता है। गोली या डाइल्यूशन (30C, 200C) उससे आगे की पोटेंसी हैं। Hamamelis, Millefolium और Berberis जैसी दवाएँ Q रूप में भी बहुत दी जाती हैं।
आमतौर पर हाँ — होम्योपैथिक दवा और चल रही एलोपैथिक दवा को साथ लिया जा सकता है, बस दोनों के बीच लगभग आधे घंटे का अंतर रखें। पर किसी भी पहले से चल रही ज़रूरी दवा को अपने आप बंद न करें; दोनों चिकित्सकों को एक-दूसरे के इलाज की जानकारी दें।
होम्योपैथिक इलाज के दौरान कच्चा प्याज़, कच्चा लहसुन, कॉफ़ी, तेज़ पुदीना और तंबाकू से परहेज़ की सलाह दी जाती है। बवासीर में इसके अलावा तेज़ मिर्च-मसाला, मैदा, बहुत ज़्यादा तला हुआ खाना और शराब से भी दूरी ज़रूरी है, क्योंकि ये सीधे क़ब्ज़ बढ़ाते हैं।
हाँ, दोनों में दवा अलग चुनी जाती है। अंधी बवासीर यानी जिसमें खून नहीं आता पर दर्द, खुजली व भारीपन रहता है — इसमें Nux Vomica, Aesculus और Sulphur ज़्यादा चुनी जाती हैं। खूनी बवासीर में Hamamelis, Millefolium और Phosphorus जैसी दवाएँ प्रमुख हैं।
गर्भावस्था में Collinsonia, Pulsatilla, Sepia और Hamamelis जैसी दवाएँ आमतौर पर चुनी जाती हैं और अनुभव में सुरक्षित मानी जाती हैं। फिर भी गर्भावस्था में कोई भी दवा — होम्योपैथिक सहित — बिना चिकित्सक की सलाह के अपने आप शुरू नहीं करनी चाहिए।
फ़िशर में Ratanhia सबसे प्रमुख दवा मानी जाती है, ख़ासकर जब शौच के बाद घंटों जलन बनी रहे। पुरानी व ठीक न होने वाली दरार में Acidum Nitricum, चिपचिपे स्राव के साथ Graphites, और सूखे-कठोर मल से बनी दरार में Natrum Muriaticum चुनी जाती है।
भगंदर में Silicea, Hepar Sulphuris, Myristica Sebifera और Calcarea Sulphurica प्रमुख दवाएँ हैं और शुरुआती व साधारण फ़िस्टुला में इनसे मरीज़ों को अच्छा आराम मिलता देखा गया है। पर जटिल या बार-बार लौटने वाले फ़िस्टुला में सर्जिकल राय भी साथ-साथ लेनी चाहिए।
होम्योपैथी में शुरुआत के कुछ दिनों में लक्षणों का हल्का बढ़ना असामान्य नहीं माना जाता और यह अक्सर अपने आप शांत हो जाता है। पर अगर खून बहुत बढ़ जाए, तेज़ दर्द हो या बुख़ार आ जाए तो दवा तुरंत रोककर चिकित्सक से संपर्क करें — यह सामान्य प्रतिक्रिया नहीं है।
बहुत ज़्यादा या लगातार खून बहना, बिना मल के भी खून आना, तेज़ बुख़ार के साथ गुदा में सूजन, अचानक बहुत तेज़ दर्द, बिना कारण वज़न घटना या मल की आदत में लगातार बदलाव — इनमें से कोई भी लक्षण हो तो देर न करें, तुरंत जाँच कराएँ।
नहीं। होम्योपैथी में एक समय पर लक्षणों से सबसे ज़्यादा मेल खाने वाली एक ही दवा चुनी जाती है, कभी-कभी एक सहायक बायोकेमिक दवा के साथ। यह सूची जानकारी और लक्षण-मिलान के लिए है, ख़ुद दवा चुनने के लिए नहीं — चुनाव चिकित्सक ही करें।
बवासीर का होम्योपैथिक इलाज कितने दिन चलेगा, यह शिकायत की उम्र पर निर्भर करता है। नई शिकायत में 2 से 4 हफ़्ते में फ़र्क़ दिखने लगता है; पुरानी बवासीर में बवासीर का होम्योपैथिक इलाज 3 से 6 महीने तक चल सकता है। अगर 6 से 8 हफ़्ते में कोई बदलाव न दिखे तो दवा बदलने का समय आ गया है — उसी दवा को खींचते रहना सही नहीं। बवासीर का होम्योपैथिक इलाज शुरू करने से पहले एक बार जाँच करा लेना बेहतर रहता है।
खूनी बवासीर की दवा तीन बातों से तय होती है — खून का रंग, दर्द है या नहीं, और खून जाने के बाद कैसा लगता है। गहरा खून और साथ कमज़ोरी हो तो Hamamelis, चमकीला लाल खून बिना दर्द के हो तो Millefolium इस दायरे में आती हैं। खून जाने के बाद की कमज़ोरी में China Officinalis दी जाती है। खूनी बवासीर की दवा ख़ुद तय करने के बजाय लक्षण बताकर चुनवाना ठीक रहता है, क्योंकि खून आँत की दूसरी बीमारी से भी आ सकता है।
फ़र्क़ दर्द के समय का है। बवासीर में तकलीफ़ ज़्यादातर सूजन और खुजली की होती है, जबकि दरार में शौच के बाद घंटों जलन रहती है। इसीलिए फ़िशर की होम्योपैथिक दवा अलग चुनी जाती है — Ratanhia, Acidum Nitricum, Graphites जैसी। दोनों साथ हों तो पहले जो तकलीफ़ ज़्यादा है उसी की दवा दी जाती है। फ़िशर की होम्योपैथिक दवा के साथ मल नरम रखना ज़रूरी है, वरना दरार बार-बार खुलती रहती है।
भगंदर की होम्योपैथिक दवा आम तौर पर सबसे लंबी चलने वाली होती है — 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा। Silicea, Hepar Sulphuris, Calcarea Sulphurica और Myristica इस दायरे में सबसे ज़्यादा चुनी जाती हैं। भगंदर की होम्योपैथिक दवा से पीप कम होते देखा गया है, पर पुराना या कई रास्तों वाला भगंदर हो तो सर्जन की राय साथ-साथ लेते रहना चाहिए। दोनों रास्ते एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।
मस्से सुखाने की दवा भी लक्षण देखकर ही चुनी जाती है, नाम सुनकर नहीं। बाहर निकले अंगूर जैसे मस्सों में Aloe Socotrina, कठोर-गाँठदार मस्सों में Calcarea Fluorica, और दानेदार उभारों में Thuja इस काम में आती हैं। मस्से सुखाने की दवा से पहले यह देखना ज़रूरी है कि गांठ बवासीर की ही है — हर गांठ मस्सा नहीं होती। मस्से सुखाने की दवा के साथ क़ब्ज़ ठीक न हो तो मस्से दोबारा उभर आते हैं।
बवासीर की दवा का नाम बीमारी के नाम से नहीं, लक्षणों की तस्वीर से निकलता है। तीन सवाल तय करते हैं — खून का रंग कैसा है, आराम ठंडक से मिलता है या गर्मी से, और तकलीफ़ दिन के किस समय बढ़ती है। इन्हीं जवाबों से 40 में से बवासीर की दवा का नाम सामने आता है। सिर्फ़ बवासीर की दवा का नाम पढ़कर दवा शुरू कर देना ठीक नहीं, क्योंकि एक ही नाम दो मरीज़ों में अलग नतीजा देता है।
यह श्रेणी पर निर्भर है। Grade I और II में, और चुनिंदा Grade III में, बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज करते हुए कई मरीज़ों को अच्छा आराम मिलता देखा गया है — लक्षण-आधारित दवा, क़ब्ज़ सुधार और खान-पान बदलकर। पर Grade IV, खून का थक्का जमने, या बहुत ज़्यादा खून बहने की स्थिति में बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज खींचना ठीक नहीं — वहाँ सर्जन की राय ज़रूरी है। किसी भी इलाज में गारंटी का दावा नहीं किया जा सकता।
नाम जान लेना पहला क़दम है, आख़िरी नहीं। बवासीर की दवा का नाम मिलने के बाद पोटेंसी और मात्रा तय करनी होती है, और वो दोनों उम्र, शिकायत की उम्र और साथ चल रही दूसरी दवाओं पर निर्भर करती हैं। बवासीर की दवा का नाम सही होने पर भी ग़लत पोटेंसी से असर नहीं दिखता। इसीलिए बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज सोच रहे हों तब भी, एक बार लक्षण बताकर दवा और पोटेंसी दोनों तय करवा लेना सबसे छोटा रास्ता है।
💡 काम की बातें (Key Takeaways)
सबसे ज़रूरी बात यही है कि दवा से पहले शौच की आदत सुधरे। बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज सोचने वालों के लिए भी यही पहला क़दम है — क़ब्ज़ बनी रही तो कोई भी दवा आधा ही काम करेगी।
- होम्योपैथी में दवा बीमारी के नाम से नहीं, लक्षणों की पूरी तस्वीर से चुनी जाती है — इसीलिए एक ही बवासीर के 40 अलग-अलग समाधान मौजूद हैं।
- खून का रंग सबसे बड़ा सुराग़ है: गहरा-काला खून Hamamelis की ओर इशारा करता है, चमकीला लाल खून Millefolium की ओर।
- आराम किससे मिलता है — ठंड से या गर्मी से — यह अकेला सवाल कई बार दवा तय कर देता है (Aloe बनाम Muriaticum Acidum, Lachesis बनाम Arsenicum)।
- बायोकेमिक दवाएँ (Ferrum Phos 6X, Calcarea Fluorica 12X, Calcarea Sulphurica 6X) सहायक रूप में साथ चलाई जा सकती हैं।
- क़ब्ज़ ठीक किए बिना बवासीर का इलाज अधूरा रहता है — पानी, रेशेदार भोजन और शौच का नियमित समय दवा जितने ही ज़रूरी हैं।
- 200C जैसी ऊँची पोटेंसी अपने आप शुरू न करें; इसे चिकित्सक ही तय करते हैं।
- बहुत ज़्यादा खून, बुख़ार के साथ सूजन, बिना कारण वज़न घटना या मल की आदत में लगातार बदलाव — इनमें देरी न करें, तुरंत जाँच कराएँ।
🔬 भारत में बवासीर व होम्योपैथी पर हुए शोध
नीचे भारत में हुए वे छह अध्ययन हैं जो बवासीर में होम्योपैथिक इलाज पर सीधे किए गए हैं — प्रकाशन वर्ष, पत्रिका और अध्ययन-प्रारूप सहित। हमने इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर नहीं लिखा; जहाँ अध्ययन का प्रमाण-स्तर सीमित है, वहाँ यह भी साफ़ लिखा गया है।
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2013
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LM पोटेंसी पर बहुकेंद्रीय RCT
IJRH 7(2):72–80
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2016
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व्यक्तिगत होम्योपैथी पर पायलट अध्ययन
J Intercult Ethnopharmacol 5:335–342
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2015
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नुस्ख़ों व नतीजों का दस्तावेज़ीकरण
J Evid Based Complement Altern Med 20:180–185
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2014
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12 साल के बच्चे की बवासीर का केस
Indian J Res Homoeopathy 8:37–41
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2024
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डबल-ब्लाइंड, यादृच्छिक, प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण
J Integr Complement Med 30(8):783–792
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2026
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डबल-ब्लाइंड, यादृच्छिक, प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण
SAGE / J Integr Complement Med (ऑनलाइन)
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2005 / 2006
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फ़ाइबर (रेशा) पर व्यवस्थित समीक्षा व मेटा-विश्लेषण
Cochrane Database Syst Rev CD004649 · Am J Gastroenterol 101:181–188
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2024
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बवासीर प्रबंधन की नैदानिक दिशानिर्देश
ASCRS Clinical Practice Guidelines
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2018
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एस्कुलस (Aescin / Horse Chestnut) पर समीक्षा
Turkish J Colorectal Dis 28(2):54–57
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2016
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भारत में बवासीर की व्यापकता व प्रबंधन
Indian J Surg / ACRSI Practice Guidelines
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📑 वर्गीकरण व कोडिंग के आधिकारिक स्रोत (ICD-10, ICD-11, MeSH)
इस पृष्ठ की हर दवा के कार्ड में तीन तरह के कोड दिए गए हैं। ये कोड किसी होम्योपैथिक ग्रंथ से नहीं आते — ये अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण प्रणालियाँ हैं, और नीचे उनके मूल स्रोत, संस्करण और सीधे लिंक दिए गए हैं ताकि आप हर कोड ख़ुद जाँच सकें।
भारत सहित दुनिया के अधिकांश अस्पतालों व बीमा प्रणालियों में आज भी यही कोड चलन में हैं। नीचे हर कोड पर क्लिक करके सीधे WHO के ब्राउज़र में उसकी परिभाषा देखी जा सकती है।
ICD-11 ने बवासीर का पूरा ढाँचा बदल दिया है — ICD-10 का एक K64 अब DB60, DB61 और DB62 तीन हिस्सों में बँटा है, और K60 अब DB50 है। MMS का आधिकारिक URI http://id.who.int/icd/release/11/mms है।
MeSH वह नियंत्रित शब्दावली है जिससे PubMed और MEDLINE में शोध खोजा जाता है। नीचे दिए हर Descriptor UI पर क्लिक करके आप NLM का मूल रिकॉर्ड देख सकते हैं — और उसी से उस विषय का सारा प्रकाशित शोध खोज सकते हैं।
📚 संदर्भ व शोध स्रोत (Research & References)
🩺 डॉक्टर की राय — 40 दवाओं के बाद सबसे ज़रूरी 6 बातें
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Dr. Satish Sharma, DHMS
वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक · Reg. No. 5454-A · हिसार, हरियाणा
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⏰ देर करना सबसे भारी पड़ता है
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🚾 दवा से पहले शौच की आदत सुधारिए
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3
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🔍 बीमारी का नाम नहीं, लक्षण की तस्वीर देखिए
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4
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⚗️ पोटेंसी अपने आप न बदलें
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5
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📅 धैर्य रखिए, पर आँख बंद करके नहीं
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6
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🩹 सर्जरी से डरिए मत, पर उसे पहला विकल्प भी मत बनाइए
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🩺 डॉक्टर की सलाह के बाद
Doctor Pyro Drops + BC 17
अगर आप तय नहीं कर पा रहे कि आपके लक्षण किस दवा से मेल खाते हैं, तो अनुमान लगाने के बजाय एक बार बात कर लीजिए।
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🤝 संपादकीय नीति व लेखक जानकारी (Editorial Policy & Author)
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✍️ लेखक व चिकित्सकीय समीक्षक
Dr. Satish Sharma, DHMS
वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक · Reg. No. 5454-A · हिसार, हरियाणा
लेखक पृष्ठ देखें →रजिस्ट्रेशन Council of Homoeopathic System of Medicine, Haryana से जारी है। इस पृष्ठ की हर दवा, मात्रा और सावधानी उन्हीं की समीक्षा के बाद प्रकाशित की गई है। यह पृष्ठ Teqtis India (हिसार, हरियाणा) प्रकाशित करता है — होम्योपैथिक दवाओं का ब्रांड, जो 2017 से इसी क्षेत्र में काम कर रहा है। |
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📚 स्रोत कहाँ से लिए गए
हर दवा के उपयोग, मुख्य लक्षण और मानसिक लक्षण शास्त्रीय Materia Medica — Boericke, Allen's Keynotes और Kent's Repertory — से लिए गए हैं। मूल स्रोत व प्रयुक्त भाग होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया ऑफ़ इंडिया (HPI, आयुष मंत्रालय) के मोनोग्राफ़ के अनुसार हैं।
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🏷️ कोड हमारी अपनी मैपिंग हैं
ICD-10, ICD-11 और MeSH कोड किसी होम्योपैथिक ग्रंथ का हिस्सा नहीं हैं। ये केवल विषय-वर्गीकरण और शोध खोजने की सुविधा के लिए हमारी संपादकीय मैपिंग हैं, और हर कोड WHO ICD ब्राउज़र तथा NLM MeSH रिकॉर्ड से मिलाकर लिखा गया है।
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⚖️ दावों को लेकर हमारी सीमा
इस पृष्ठ पर किसी भी दवा के लिए इलाज की गारंटी का दावा नहीं किया गया है। जहाँ शोध का प्रमाण-स्तर सीमित है, वहाँ हमने यह साफ़ लिखा है — बढ़ा-चढ़ाकर नहीं।
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🔄 सुधार और अपडेट
तथ्य में कोई त्रुटि मिलने पर हमें सूचित करें — हम उसे जाँचकर सुधारते हैं और पृष्ठ पर अपडेट की तारीख़ बदल देते हैं। यह पृष्ठ शैक्षिक है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं।
इस पृष्ठ का स्थायी पता: www.teqtis.in/blog/bawaseer-ki-homeopathic-dawa-40-medicines |
🧭 यह पृष्ठ हमारा Pillar Post है — इसके 17 Cluster लेख
बवासीर पर हमारी सारी सामग्री एक ढाँचे में बँधी हुई है। यह पृष्ठ मुख्य (Pillar) पृष्ठ है, जिसमें बीमारी की पूरी तस्वीर और 40 दवाओं का ब्यौरा एक जगह है। इसके नीचे जुड़े Cluster (चाइल्ड) लेख किसी एक पहलू को गहराई से खोलते हैं — किसी में दवाओं की आपसी तुलना है, किसी में घरेलू उपाय, तो किसी में क़ीमत और कोर्स की जानकारी। जिस विषय पर ज़्यादा जानना हो, सीधे उसी लेख पर जाएं। ध्यान दें: प्रोडक्ट और कैटेगरी पेज इस Cluster का हिस्सा नहीं हैं — वे शॉप पेज हैं और अलग सूचीबद्ध किए गए हैं।
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Doctor Pyro + BC 17 पर केंद्रित लेख
7 लेख
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दूसरी दवाओं से तुलना — Pilex, R13, Arshoghni
6 लेख
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पुरानी बवासीर, मस्से, डाइट व घरेलू उपाय
4 लेख
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| ⬤ | पहली बार पढ़ रहे हैं: इसी पृष्ठ को ऊपर से नीचे पढ़ें — प्रकार, कारण, ग्रेड, फिर दवाएं। |
| ⬤ | कोई एक दवा देखनी है: ऊपर की 40 दवाओं की सूची से सीधे उसी कार्ड पर जाएं। |
| ⬤ | दवाओं की तुलना या क़ीमत जाननी है: नीचे दिए Cluster लेखों में जाएं — वहाँ Pilex, R13 और Arshoghni से तुलना अलग-अलग खोली गई है। |
🔗 Cluster लेख — बवासीर पर हमारे 17 और पेज
नीचे दिए सभी लेख इसी Pillar पृष्ठ के Cluster (चाइल्ड) पेज हैं — हर लेख बवासीर के किसी एक पहलू को गहराई से खोलता है। बवासीर, खूनी पाइल्स, फ़िशर और भगंदर पर हमारे बाक़ी लेख विषय के हिसाब से बँटे हुए हैं — दवा की तुलना, घरेलू उपाय, डाइट और कोर्स से जुड़े सवालों के जवाब यहीं मिलेंगे।
पुरानी बवासीर का होम्योपैथिक इलाज — खूनी पाइल्स, फ़िशर व फ़िस्टुला, बिना ऑपरेशन
हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, यूपी, राजस्थान व बिहार के मरीज़ों के लिए Doctor Pyro BC17 का पूरा गाइड।
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Doctor Pyro के फायदे और उपयोग का सही तरीका — Piles का सुरक्षित होम्योपैथिक इलाज
दवा कैसे लें, कितने दिन लें और Pilex जैसी दवाओं से इसकी तुलना क्या कहती है।
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Doctor Pyro BC17 — घरेलू नुस्खे, योग और होम्योपैथी: तीनों रास्तों का आकलन
घरेलू नुस्खे, योग और होम्योपैथी — तीनों रास्तों का एक साथ आकलन।
पूरा लेख पढ़ें →
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World Class Homeopathic Medicine For Piles — Doctor Pyro BC17 बनाम Dr. Reckeweg R13
R13 की खुराक, असर का समय और Doctor Pyro BC17 से इसका फ़र्क़।
पूरा लेख पढ़ें →
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Doctor Pyro के फायदे और Side Effects — पुरानी बवासीर व मस्सों में क्या ध्यान रखें
दवा से जुड़ी सावधानियाँ, R13 के साथ तुलना और असली-नक़ली की पहचान।
पूरा लेख पढ़ें →
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खूनी बवासीर व फ़िशर में दर्द-जलन से राहत — Doctor Pyro BC17 से मस्से सुखाने का तरीक़ा
बिना सर्जरी खून रोकने के उपाय और Pilex, Baidyanath व R13 से तुलना।
पूरा लेख पढ़ें →
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पुरानी बवासीर में Doctor Pyro BC17 — मस्से सुखाने व जलन-दर्द कम करने का कोर्स
R13 के साथ तुलना, कोर्स की अवधि और फ़िशर-फ़िस्टुला में उपयोग।
पूरा लेख पढ़ें →
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Baidyanath Arshoghni Vati बवासीर में कितनी असरदार है — पूरा आकलन
आयुर्वेदिक दवा कितने दिन में असर करती है और फ़िशर-फ़िस्टुला में साथ इलाज संभव है या नहीं।
पूरा लेख पढ़ें →
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Best Homeopathic Medicine For Piles — 136 साल पुराना फार्मूला बनाम Himalaya Pilex
Pilex की क़ीमत, खाने का सही तरीक़ा, कोर्स की अवधि और होम्योपैथी से तुलना।
पूरा लेख पढ़ें →
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मस्से सुखाने की दवा — पुरानी बवासीर का 3 महीने का कोर्स, बिना ऑपरेशन
Pilex के लंबे इस्तेमाल, गर्भावस्था में सुरक्षा और दोबारा बवासीर लौटने के सवाल।
पूरा लेख पढ़ें →
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₹1085 में पुरानी बवासीर का कोर्स — World Class होम्योपैथी दवा
क़ीमत, पैक और Pilex से तुलना — किस दवा का कोर्स कितने दिन का होता है।
पूरा लेख पढ़ें →
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Dr. Reckeweg R13 Drops — क़ीमत, खुराक, फायदे और सावधानियाँ
R13 को कैसे लें, कितने दिन में असर दिखता है और किसके साथ लेना ठीक है।
पूरा लेख पढ़ें →
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Piles में Dr. Reckeweg बनाम आयुर्वेदिक दवा — कौन-सी सबसे कारगर?
फ़िशर और फ़िस्टुला का फ़र्क़, क्या खाएँ-क्या न खाएँ, और बार-बार बवासीर लौटने की वजह।
पूरा लेख पढ़ें →
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पुरानी बवासीर में घरेलू नुस्खे व होम्योपैथी — क्या-क्या काम आता है
मस्से सुखाने, फ़िशर की जलन और खून रोकने पर घरेलू व होम्योपैथिक दोनों नज़रिए।
पूरा लेख पढ़ें →
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योग से बवासीर में राहत — होम्योपैथिक फार्मूला व 3 महीने का कोर्स
योग, आयुर्वेद और होम्योपैथी में से किसे कब चुनें, और Baidyanath-Patanjali की तुलना।
पूरा लेख पढ़ें →
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World Class Piles Treatment — जिद्दी व पुराने मस्सों पर कौन-सी दवा असर करती है
योग-आधारित उपाय, आयुर्वेदिक दवाएँ और फ़िशर-फ़िस्टुला के इलाज का आकलन।
पूरा लेख पढ़ें →
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बवासीर में क्या खाएँ, क्या न खाएँ और मस्से सुखाने का सबसे अच्छा तरीक़ा
बार-बार बवासीर लौटने की वजह, दर्द-सूजन काबू करना और फ़िस्टुला का बिना सर्जरी इलाज।
पूरा लेख पढ़ें →
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नीचे के दो पेज लेख नहीं, हमारे शॉप पेज हैं — इसीलिए इन्हें Cluster की गिनती में नहीं रखा गया। यहाँ दवा की पूरी जानकारी, पैक विकल्प और ऑर्डर की सुविधा मिलती है।
🚨 डॉक्टर को कब दिखाएँ — Red Flags की पूरी सूची
हर गुदा से आने वाला खून बवासीर का नहीं होता। नीचे तीन स्तर दिए गए हैं — कौन-सी स्थिति में उसी दिन जाना है, कौन-सी में कुछ दिनों के भीतर, और कौन-सी में इलाज चलते हुए दोबारा दिखाना है। इनमें से कुछ भी दिखे तो दवा पर समय न लगाएँ।
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खून बहुत ज़्यादा हो, रुक न रहा हो, या साथ में चक्कर, पसीना व बेहोशी जैसा लगे
यह ख़ून की तेज़ कमी का संकेत हो सकता है।
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गुदा की गाँठ अचानक कड़ी, नीली-बैंगनी और असहनीय दर्द वाली हो जाए
यह थक्का जमने (Thrombosis) की स्थिति है, जिसमें पहले कुछ दिन ही इलाज का सही समय होता है।
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तेज़ बुख़ार के साथ गुदा में सूजन, लाली या पीप
संक्रमण फैलने का ख़तरा रहता है — इसमें देर करना ठीक नहीं।
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मस्सा बाहर आकर अंदर न जाए और रंग बदलने लगे
यह Grade IV या गला घुटने (Strangulation) की स्थिति हो सकती है।
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मल के बिना भी खून आए, या खून गहरा-काला/लुक जैसा हो
हर खून बवासीर का नहीं होता — ऊपरी पाचन-तंत्र से आने वाला खून काला दिखता है।
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मल की आदत में लगातार बदलाव — पतला मल, बार-बार जाना, अधूरापन
दो हफ़्ते से ज़्यादा चले तो जाँच ज़रूरी है।
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बिना कारण वज़न घटना, लगातार थकान या खून की कमी
इन्हें बवासीर मानकर टालना सबसे आम और सबसे भारी ग़लती है।
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45 साल से ऊपर उम्र और नया रक्तस्राव, या परिवार में आँत के कैंसर का इतिहास
ऐसे में एनोस्कोपी के साथ कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जाती है।
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गर्भावस्था में तेज़ दर्द या ज़्यादा खून
गर्भावस्था में कोई भी दवा ख़ुद से शुरू न करें।
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6 से 8 हफ़्ते के इलाज के बाद भी सुधार न दिखे
दवा बदलने या पोटेंसी बदलने का निर्णय चिकित्सक ही लें।
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बवासीर बार-बार लौट आती हो
क़ब्ज़, थायरॉइड या लीवर जैसी कोई छुपी वजह हो सकती है।
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दवा शुरू करने पर तकलीफ़ तेज़ी से बढ़ जाए
शुरुआत में हल्का बढ़ना सामान्य है, पर तेज़ी से बढ़ना नहीं — दवा रोककर सलाह लें।
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पहले से कोई दवा चल रही हो या गर्भावस्था-स्तनपान की स्थिति हो
दोनों चिकित्सकों को एक-दूसरे के इलाज की जानकारी दें।
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🚚 Doctor Pyro Drops + BC 17 भारत के किन-किन राज्यों में भेजी जाती है — पूरी डिलीवरी सूची
नीचे हर राज्य के लिए पिनकोड रेंज, प्रमुख शहर और अनुमानित डिलीवरी समय दिया है। दवा हिसार (हरियाणा) से भेजी जाती है, इसलिए पास के राज्यों में जल्दी और दूर के राज्यों में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है। सूची में जिस शहर का नाम नहीं है वहाँ भी डिलीवरी होती है — अपना पिनकोड फ़ोन पर बता दीजिए, हम जाँचकर बता देंगे।
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| हरियाणा, दिल्ली | 1–3 कार्यदिवस |
| पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड | 2–4 कार्यदिवस |
| हिमाचल प्रदेश | 2–5 कार्यदिवस |
| मध्य प्रदेश, गुजरात | 3–5 कार्यदिवस |
| महाराष्ट्र | 3–6 कार्यदिवस |
| बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक | 4–6 कार्यदिवस |
| तमिलनाडु, केरल | 4–7 कार्यदिवस |
| जम्मू-कश्मीर व पहाड़ी-दुर्गम इलाक़े | 5–8 कार्यदिवस |
ये India Post के स्पीड पोस्ट डिलीवरी नॉर्म्स पर आधारित अनुमान हैं, कोई गारंटी नहीं। रविवार और सरकारी छुट्टियाँ इनमें नहीं गिनी जातीं; ब्रांच ऑफ़िस वाले पते पर एक दिन ज़्यादा लगता है, और पहाड़ी, आदिवासी व द्वीप इलाक़ों में इससे ज़्यादा समय लग सकता है। त्योहारों और मौसम की वजह से भी देर हो सकती है।
Hisar (125001), Hansi (125033), Adampur (125052), Barwala (125121), Uklana (125113), Narnaund (125039), Agroha (125047), Bass (125042)
Rohtak (124001), Meham (124401), Sampla (124501), Kalanaur (124113)
Bhiwani (127021), Tosham (127040), Loharu (127201), Siwani (127046)
Sirsa (125055), Ellenabad (125102), Dabwali (125104)
Fatehabad (125050), Tohana (125120), Ratia (125051)
Gurugram (122001), Faridabad (121001), Palwal (121102)
Panipat (132103), Karnal (132001), Kurukshetra (136118)
Ambala (134003), Naraingarh (134102), Shahabad (136135)
बवासीर की दवा · मस्से · खूनी बवासीर · भगंदर · गुदाचीर · बवासीर का इलाज हिसार
New Delhi (110001), Dwarka (110075), Rohini (110085)
Laxmi Nagar (110092), Shahdara (110032), Karol Bagh (110005)
Janakpuri (110058), Pitampura (110034), Saket (110017)
बवासीर की दवा दिल्ली · पाइल्स ट्रीटमेंट · खूनी बवासीर · भगंदर
Ludhiana (141001), Moga (142001), Khanna (141401), Samrala (141114)
Amritsar (143001), Pathankot (145001), Gurdaspur (143521)
Jalandhar (144001), Hoshiarpur (146001), Kapurthala (144601)
Patiala (147001), Rajpura (140401), Nabha (147201)
Bathinda (151001), Barnala (148101), Sangrur (148001)
ਬਵਾਸੀਰ ਦੀ ਦਵਾਈ · ਖੂਨੀ ਬਵਾਸੀਰ · ਮਸੇ · ਭਗੰਦਰ
Sector 17 (160017), Panchkula (134109), Mohali (160055)
ਬਵਾਸੀਰ ਦੀ ਦਵਾਈ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ · बवासीर का इलाज · पाइल्स
Jaipur (302001), Alwar (301001), Dausa (303303)
Jodhpur (342001), Barmer (344001), Jaisalmer (345001)
Udaipur (313001), Bhilwara (311001), Chittorgarh (312001)
Kota (324001), Bundi (323001), Baran (325205)
Sikar (332001), Jhunjhunu (333001), Sri Ganganagar (335001)
बवासीर री दवा · मस्से · खूनी बवासीर · भगंदर का इलाज
Lucknow (226001), Kanpur (208001), Agra (282001)
Meerut (250001), Noida (201301), Ghaziabad (201001)
Varanasi (221001), Prayagraj (211001), Gorakhpur (273001)
Bareilly (243001), Aligarh (202001), Mathura (281001)
Moradabad (244001), Saharanpur (247001), Jhansi (284001)
बवासीर के दवा · मस्सा · खूनी बवासीर · भगंदर · पाइल्स के इलाज
Dehradun (248001), Haridwar (249401), Haldwani (263139)
Roorkee (247667), Rudrapur (263153), Nainital (263001)
बवासीर की दवा · मस्से · खूनी बवासीर · भगंदर
Shimla (171001), Solan (173212), Dharamshala (176215)
Mandi (175001), Hamirpur (177001), Una (174303)
बवासीर की दवा · मस्से · खूनी बवासीर · पाइल्स का इलाज
Jammu (180001), Srinagar (190001), Anantnag (192101)
Baramulla (193101), Kathua (184101), Udhampur (182101)
بواسیر کی دوا · बवासीर की दवा · खूनी बवासीर · भगंदर
Bhopal (462001), Indore (452001), Jabalpur (482001)
Gwalior (474001), Ujjain (456001), Sagar (470001)
बवासीर की दवा · मस्से · खूनी बवासीर · भगंदर · पाइल्स
Ahmedabad (380001), Surat (395001), Vadodara (390001)
Rajkot (360001), Bhavnagar (364001), Jamnagar (361001)
Anand (388001), Bharuch (392001), Mehsana (384001)
હરસ · મસા · લોહી પડતા હરસ · ભગંદર · હરસ મસાની દવા
Mumbai (400001), Thane (400601), Navi Mumbai (400703)
Pune (411001), Pimpri (411017), Chinchwad (411019)
Nagpur (440001), Nashik (422001), Aurangabad (431001)
Kolhapur (416003), Solapur (413001), Amravati (444601)
मूळव्याध · मूळव्याध कोंब · रक्ती मूळव्याध · भगंदर · मूळव्याधावर औषध
Patna (800001), Gaya (823001), Muzaffarpur (842001)
Bhagalpur (812001), Darbhanga (846001), Purnia (854301)
बवासीर के दवाई · मस्सा · खूनी बवासीर · भगंदर
Kolkata (700001), Siliguri (734001), Durgapur (713201)
Howrah (711101), Asansol (713301), Malda (732101)
পাইলস · অর্শ · অর্শ্বরোগ · রক্ত অর্শ · পাইলসের ওষুধ
Bhubaneswar (751001), Cuttack (753001), Rourkela (769001)
Sambalpur (768001), Puri (752001), Balasore (756001)
ପାଇଲ୍ସ · ଅର୍ଶ · ପାଇଲ୍ସ ଔଷଧ · भगंदर
Hyderabad (500001), Warangal (506001), Karimnagar (505001)
Nizamabad (503001), Khammam (507001), Adilabad (504001)
మొలలు · పైల్స్ · రక్త మొలలు · మొలల మందు · భగందరం
Visakhapatnam (530001), Vijayawada (520001), Guntur (522001)
Tirupati (517501), Nellore (524001), Kurnool (518001)
మొలలు · పైల్స్ · రక్త మొలలు · మొలల చికిత్స
Bengaluru (560001), Mysuru (570001), Hubli (580001)
Belagavi (590001), Mangaluru (575001), Davanagere (577001)
Tumakuru (572101), Shivamogga (577201), Ballari (583101)
ಮೂಲವ್ಯಾಧಿ · ಪೈಲ್ಸ್ · ರಕ್ತ ಮೂಲವ್ಯಾಧಿ · ಮೂಲವ್ಯಾಧಿ ಔಷಧಿ
Chennai (600001), Coimbatore (641001), Madurai (625001)
Salem (636001), Erode (638001), Tiruppur (641601)
Vellore (632001), Tirunelveli (627001), Thanjavur (613001)
மூல நோய் · மூலம் · ரத்த மூலம் · பவுத்திர மூலம் · மூல நோய் மருந்து
Kochi (682001), Kozhikode (673001), Kannur (670001)
Thrissur (680001), Alappuzha (688001), Kollam (691001)
മൂലക്കുരു · പൈൽസ് · രക്തം പോകുന്ന മൂലക്കുരു · മൂലക്കുരു മരുന്ന്
ऊपर 20 राज्य व केंद्र-शासित प्रदेश गिनाए हैं, पर Doctor Pyro Drops + BC 17 पूरे भारत में भेजी जाती है — असम, झारखंड, छत्तीसगढ़, गोवा, पूर्वोत्तर के राज्य, अंडमान व लक्षद्वीप समेत। अपना पिनकोड बता दीजिए, हम जाँचकर डिलीवरी का समय बता देंगे।
दवा का चुनाव लक्षण देखकर चिकित्सक करते हैं। डिलीवरी की जानकारी इलाज का दावा नहीं है — बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज हर श्रेणी में मुमकिन नहीं होता, और यह बात ऊपर विस्तार से लिखी है।
यह पृष्ठ केवल शैक्षिक व सूचनात्मक उद्देश्य से बनाया गया है और इसे किसी योग्य चिकित्सक की सलाह, जाँच या इलाज का विकल्प न समझें। यहाँ दी गई मात्रा व पोटेंसी शास्त्रीय ग्रंथों के सामान्य संदर्भ हैं — हर मरीज़ के लिए दवा, मात्रा व अवधि अलग होती है और उसका निर्णय चिकित्सक ही करते हैं। किसी भी दवा के लिए इलाज की गारंटी का दावा नहीं किया गया है। गर्भावस्था, स्तनपान, बच्चों तथा पहले से चल रही किसी दवा की स्थिति में बिना सलाह कोई दवा शुरू न करें। बहुत ज़्यादा खून बहने, तेज़ बुख़ार के साथ सूजन, बिना कारण वज़न घटने या मल की आदत में लगातार बदलाव जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जाँच कराएँ।



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